
चित्रक के फूल को क्यों कहा जाता है बीमारियों का काल, आइए जानते हैं?

भारत की पारंपरिक आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में एक ऐसा पौधा है जिसे सदियों से रोगों का प्रबल शत्रु माना गया है—चित्रक। ग्रामीण अंचलों से लेकर आयुर्वेदिक औषधालयों तक, इसके फूल और जड़ को “बीमारियों का काल” कहा जाता है। आखिर क्या है इस उपाधि के पीछे का विज्ञान और विश्वास?
क्यों है चित्रक ओषधीय शक्ति का केंद्र
चित्रक एक झाड़ीदार औषधीय पौधा है, जिसके सफेद (कभी-कभी लाल) फूल और तीक्ष्ण जड़ विशेष रूप से उपयोग में लाए जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार इसका रस कटु (तीखा), गुण उष्ण और प्रभाव अत्यंत तीव्र होता है। यही कारण है कि इसे शरीर में जमे “आम” (टॉक्सिन) को नष्ट करने वाला माना जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार चित्रक में पाया जाने वाला सक्रिय तत्व प्लम्बाजिन जीवाणुरोधी, सूजनरोधी और पाचनशक्ति बढ़ाने वाले गुणों से युक्त होता है।
किन बीमारियों में किया जाता है उपयोग?
जोड़ों के दर्द से राहत
दूसरा, अगर जोड़ों में दर्द की परेशानी है या फिर सूजन की परेशानी है, तब भी चित्रक का सेवन किया जा सकता है. इसके अलावा दर्द में राहत पाने के लिए प्रभावित स्थान पर लेप भी लगाया जा सकता है.
स्किन के लिए फायदेमंद
आज की जीवनशैली में त्वचा से संबंधित रोग बहुत जल्दी प्रभावित करते हैं। रक्त में अशुद्धि की वजह से चेहरे पर कील और मुहांसे परेशान करने लगते हैं। कई लोगों को, खासकर गर्मियों में, फोड़े-फुंसी और पुराने त्वचा रोगों की समस्या होने लगती है। ऐसे में चित्रक का लेप प्रभावी तरीके से काम करता है।
बदलते मौसम में होने वाली समस्याओं से राहत
इसके साथ ही अगर श्वसन से जुड़े मौसम बदलते ही परेशान करने लगते हैं या सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने की वजह से पुरानी खांसी, जुकाम और दमा जैसी समस्याएं आती हैं, तब भी चित्रक का सेवन किया जा सकता है, लेकिन ध्यान रखें कि किसी भी रोग में इसका सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें।
सूजन से राहत मिलना
चित्रक की जड़ में एंटी-डायबिटिक, एंटी-फंगल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-अल्सर गुण पाए जाते हैं, जो बॉडी में होने वाली सूजन को कम करने में लाभकारी हैं। यह वात और कफ दोष को संतुलित करने का काम भी करता है।




