
Government’s Export Promotion Mission aims to strengthen footwear and leather exports, reports Shah Times.
एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन से एसएमई को नई दिशा
एफटीए और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस से निर्यात को बढ़त
लेदर सेक्टर में रोजगार और ग्लोबल मार्केट की उम्मीद
केंद्र सरकार ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन की घोषणा की।
फुटवियर और लेदर सेक्टर में नई उम्मीद जगी।
एसएमई यूनिट्स को वित्तीय और नीतिगत समर्थन मिलेगा।
एफटीए के जरिए नए ग्लोबल मार्केट तक पहुंच बढ़ेगी।
कॉम्प्लायंस सरलीकरण से लागत और समय की बचत होगी।
उद्योग प्रतिनिधियों ने मिशन को सकारात्मक कदम बताया।
📍Agra ✍️ Rajesh Tomar
एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन से फुटवियर उद्योग को बल
एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन की घोषणा
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा घोषित एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन ने भारतीय निर्यात क्षेत्र में नई हलचल पैदा की है। इस पहल का मकसद देश के निर्यात को तेज रफ्तार देना, ग्लोबल मार्केट में हिस्सेदारी बढ़ाना और घरेलू उद्योगों को मजबूत सपोर्ट देना बताया गया है।
सरकार के मुताबिक मिशन के तहत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, ताकि भारतीय उत्पादों को इंटरनेशनल मार्केट में टैरिफ रियायत और आसान एक्सेस मिल सके। हाल के वर्षों में विभिन्न देशों के साथ हुए समझौतों को अब ज़मीनी स्तर पर लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।
एसएमई सेक्टर पर विशेष फोकस
सरकारी बयान के अनुसार, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज को मिशन का केंद्र माना गया है। देश के कुल निर्यात में एसएमई की हिस्सेदारी अहम है। वित्तीय प्रोत्साहन, डिजिटल प्रक्रिया, और डॉक्यूमेंटेशन सरलीकरण के जरिए छोटे उद्यमों को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ने की तैयारी की गई है।
उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि प्रोसेस आसान होगी तो छोटे कारोबारी भी एक्सपोर्ट में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। बैंकिंग सपोर्ट, क्रेडिट गारंटी और सब्सिडी आधारित योजनाओं से कैश फ्लो में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
कॉम्प्लायंस सरलीकरण की दिशा
मिशन के अंतर्गत कॉम्प्लायंस फ्रेमवर्क को सरल बनाने पर जोर दिया गया है। निर्यातकों को विभिन्न विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी है।
ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस सुधार के तहत सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन अप्रूवल और समयबद्ध क्लीयरेंस को बढ़ावा दिया जाएगा। उद्योग जगत का कहना है कि इससे ऑपरेशनल कॉस्ट कम होगी और उत्पादकता में वृद्धि होगी।
फुटवियर और लेदर सेक्टर की भूमिका
फुटवियर और लेदर उद्योग देश के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में गिने जाते हैं। आगरा, कानपुर और चेन्नई जैसे शहरों में हजारों यूनिट्स सक्रिय हैं। यह सेक्टर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करता है।
फुटवियर एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद के चेयरमैन पूरन डावर से बातचीत
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन की घोषणा ने भारतीय निर्यात क्षेत्र,विशेषकर एसएमई, फुटवियर और लेदर उद्योग में नई उम्मीदें जगाई हैं। हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को प्रभावी बनाने,ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस को सरल करने और कॉम्प्लायंसेज़ में सुधार के साथ सरकार ने उद्योग को स्पष्ट दिशा दी है। इसी संदर्भ में फुटवियर एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद के चेयरमैन पूरन डावर से संक्षिप्त बातचीत प्रस्तुत की है।
एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन को आप कैसे देखते हैं?
यह मिशन समय की मांग है। सरकार ने FTA को धार देने के लिए स्पष्ट रोडमैप दिया है, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और नए बाज़ार खुलेंगे।
एसएमई उद्योगों के लिए घोषित प्रोत्साहनों का क्या प्रभाव होगा?
एसएमई ही उद्योग की रीढ़ हैं। वित्तीय प्रोत्साहन, प्रक्रिया सरलीकरण और नीतिगत समर्थन से छोटे उद्यम वैश्विक स्तर पर मजबूती से खड़े होंगे।
कॉम्प्लायंसेज़ और ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस पर सरकार के कदमों को कैसे आंकते हैं?
कॉम्प्लायंसेज़ का सरलीकरण उद्योग के लिए बड़ी राहत है। इससे समय और लागत दोनों बचेंगे और उत्पादकता बढ़ेगी।
फुटवियर एवं लेदर उद्योग पर विशेष फोकस कितना महत्वपूर्ण है?
यह सेक्टर रोजगार सृजन और निर्यात दोनों में अग्रणी है। राहत पैकेज और नीतिगत फोकस से भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।
और कुछ ख़ास सन्देश जो आप उद्यमियों को देना चाहें ?
सरकार लंच भी खिला रही है, प्रोत्साहन भी दे रही है, दिशा भी दे रही है बस कर्म आपको करना है। कर्म भी सरकार कर देती, लेकिन आपका भाग्य आपके कर्म से लिखा है।
रोजगार और उत्पादन क्षमता
सरकारी आंकड़ों के अनुसार लेदर और फुटवियर सेक्टर लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार देता है। एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत उत्पादन क्षमता बढ़ाने और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
इंडस्ट्री स्रोतों के अनुसार, आधुनिक मशीनरी, स्किल डेवलपमेंट और क्वालिटी स्टैंडर्ड पर ध्यान देने से इंटरनेशनल डिमांड पूरी करने में मदद मिलेगी।
एफटीए का प्रभाव
हाल में संपन्न फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को लागू करने से निर्यातकों को टैरिफ में राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इन समझौतों से भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
निर्यातक संगठनों का मानना है कि यदि लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम होती है और डॉक्यूमेंटेशन आसान होता है तो ऑर्डर बुकिंग में तेजी आ सकती है।
डिजिटल और टेक्नोलॉजी सपोर्ट
मिशन के अंतर्गत डिजिटल एक्सपोर्ट प्लेटफॉर्म को मजबूत करने की योजना भी शामिल है। ई-कॉमर्स चैनल के जरिए छोटे उद्यम सीधे विदेशी खरीदारों तक पहुंच सकेंगे।
सरकार ने संकेत दिया है कि डेटा मॉनिटरिंग, ट्रैकिंग सिस्टम और ऑनलाइन हेल्पडेस्क जैसी सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
आगरा स्थित उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि नीति स्पष्ट होने से निवेश का माहौल बेहतर होगा। पूरन डावर ने उद्यमियों से अपील की कि वे उपलब्ध योजनाओं का लाभ उठाएं और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि सरकार दिशा और प्रोत्साहन दे रही है, जबकि उद्योग को अपनी कार्यक्षमता और गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
आगे की रणनीति
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार मिशन के क्रियान्वयन के लिए चरणबद्ध रणनीति अपनाई जाएगी। निर्यात लक्ष्यों की निगरानी, सेक्टर-वार समीक्षा और राज्यों के साथ समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नीति का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो फुटवियर और लेदर सेक्टर की वैश्विक पहचान और मजबूत हो सकती है।
एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के जरिए सरकार ने निर्यात क्षेत्र को नई दिशा देने की पहल की है। एसएमई, फुटवियर और लेदर उद्योग इस पहल से सीधे प्रभावित होंगे। आने वाले समय में इसके ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद की जा रही है।






