
प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा मामलों पर सीसीएस की अहम बैठक
अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई और ईरान हालात पर भारत की हाई लेवल सुरक्षा समीक्षा
पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात, अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत ने उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा शुरू की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की लगभग तीन घंटे लंबी बैठक हुई। बैठक में क्षेत्रीय हालात, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की गई।
📍New Delhi ✍️ Asif Khan
युद्ध हालात के दरमियान दिल्ली में सीसीएस की 3 घंटे बैठक
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार रात सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की अहम बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक करीब तीन घंटे तक चली। पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच यह समीक्षा बैठक बुलाई गई।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक बैठक का मकसद मौजूदा सिचुएशन का जायजा लेना और भारत की तैयारियों की समीक्षा करना था। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त एयर स्ट्राइक के बाद क्षेत्र में गंभीर तनाव की स्थिति बनी हुई है।
प्रधानमंत्री दो दिवसीय राज्यों के दौरे से लौटने के तुरंत बाद नई दिल्ली पहुंचे और उसके बाद यह बैठक आयोजित की गई।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद
कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी देश का सर्वोच्च सुरक्षा निर्णय लेने वाला निकाय है। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं।
बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शामिल रहे।
इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, कैबिनेट सचिव, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी बैठक में मौजूद रहे।
उच्च अधिकारियों ने क्षेत्रीय हालात पर विस्तृत ब्रीफिंग दी।
पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा
बैठक में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद बने हालात पर चर्चा हुई। ईरान के सैन्य और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि की गई है। इस घटनाक्रम के बाद पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता का माहौल है।
भारत ने इन घटनाओं के बाद तत्काल उच्च स्तरीय समीक्षा शुरू की है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता
बैठक में पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष चर्चा हुई।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक रहते हैं। इजरायल में 40,000 से अधिक भारतीय मौजूद हैं। खाड़ी और पश्चिम एशिया के अन्य देशों में करीब 90 लाख भारतीय नागरिक रह रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार स्थिति बिगड़ने की सूरत में इवैकुएशन प्लान पर भी चर्चा की गई।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि क्षेत्र में मौजूद भारतीय दूतावास अपने नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हेल्पलाइन नंबर सक्रिय कर दिए गए हैं।
हवाई सेवाओं पर असर
पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव के कारण कई हवाई मार्ग प्रभावित हुए हैं। क्षेत्र का एयर स्पेस आंशिक रूप से बंद होने की खबरें हैं।
कई भारतीय यात्री दुबई और अन्य प्रमुख एयरपोर्ट पर फंसे हुए बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर सहायता की अपीलें सामने आई हैं।
सरकारी स्तर पर एयरलाइंस और संबंधित एजेंसियों से समन्वय बनाए जाने की जानकारी दी गई है।
ऊर्जा और व्यापार पर असर की समीक्षा
बैठक में ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों पर संभावित प्रभाव की समीक्षा की गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य भारतीय तेल आयात के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। यदि वहां यातायात प्रभावित होता है तो इसका असर कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। इसलिए सिचुएशन की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
वित्त मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों ने संभावित आर्थिक प्रभावों पर भी ब्रीफिंग दी।
रणनीतिक और कूटनीतिक पहलू
बैठक में क्षेत्रीय भू-राजनीतिक परिदृश्य पर भी चर्चा हुई।
भारत ने अब तक संतुलित और सावधानीपूर्ण रुख अपनाया है। आधिकारिक बयान में संयम और शांति की अपील की गई है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत सभी संबंधित पक्षों के साथ संपर्क में है और स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।
पूर्व अनुभव और तैयारियां
भारत पहले भी संघर्ष की स्थिति में अपने नागरिकों को सुरक्षित निकाल चुका है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार संबंधित मंत्रालयों को अलर्ट मोड में रखा गया है। रक्षा और नागरिक उड्डयन से जुड़ी एजेंसियां भी स्थिति की समीक्षा कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से नियमित अपडेट देने को कहा है।
आगे की निगरानी जारी
बैठक के बाद आधिकारिक स्तर पर विस्तृत विवरण जारी नहीं किया गया।
सूत्रों का कहना है कि सरकार स्थिति पर निरंतर नजर रखे हुए है। आवश्यक होने पर आगे और बैठकें बुलाई जा सकती हैं।
पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं। भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने पर केंद्रित है।
सरकारी एजेंसियां ग्राउंड सिचुएशन का आकलन कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की तैयारी रखी गई है।




