
Shah Times coverage on Sony Pal relaunching Sankatmochan Hanuman
सोनी पल पर लौट रहा ‘संकट मोचन हनुमान’, आस्था की नई परीक्षा
हनुमान भक्ति की महागाथा फिर टीवी पर, 4 मई से सोनी पल पर
सोनी पल ने खेला बड़ा पौराणिक दांव, लौट रहा संकट मोचन हनुमान
फ्री-टू-एयर चैनल Sony Pal ने 4 मई से रात 9 बजे लोकप्रिय पौराणिक शो Sankatmochan Mahabali Hanuman के प्रसारण की घोषणा की है। यह केवल एक पुराने शो की वापसी नहीं, बल्कि भारतीय टेलीविजन में धार्मिक कंटेंट की लगातार बढ़ती मांग, फैमिली व्यूअरशिप की वापसी और टीआरपी स्ट्रेटेजी का बड़ा संकेत भी है।
📍मुंबई 🗓️ 29 अप्रैल 2026
✍️ Asif Khan
भारतीय टेलीविज़न इंडस्ट्री में कंटेंट की लड़ाई अब केवल एंटरटेनमेंट तक सीमित नहीं रही। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, शॉर्ट वीडियो ऐप्स और सोशल मीडिया रील्स के दौर में पारंपरिक टीवी चैनलों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि दर्शकों को स्क्रीन पर वापस कैसे लाया जाए। इसी चुनौती के बीच Sony Pal ने एक ऐसा कार्ड खेला है जो भावनात्मक भी है, सांस्कृतिक भी और बिजनेस की नज़र से बेहद रणनीतिक भी। चैनल ने घोषणा की है कि Sankatmochan Mahabali Hanuman 4 मई से रात 9 बजे फिर प्रसारित किया जाएगा।
पहली नज़र में यह एक सामान्य प्रोग्रामिंग अपडेट लग सकता है। टीवी चैनल अक्सर पुराने लोकप्रिय शोज़ को दोबारा प्रसारित करते हैं। लेकिन इस फैसले को थोड़ा गहराई से देखें तो यह भारतीय मनोरंजन उद्योग के बदलते समीकरणों की कहानी भी कहता है।
Sankatmochan Mahabali Hanuman जब पहली बार प्रसारित हुआ था, तब इसने बड़े स्तर पर फैमिली ऑडियंस को आकर्षित किया था। भगवान हनुमान के जीवन, उनकी शक्ति, प्रभु Hanuman की भक्ति और Rama के प्रति उनकी निष्ठा को जिस सिनेमैटिक अंदाज़ में दिखाया गया, उसने इसे छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों और धार्मिक दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया।
अब सवाल है कि इसे दोबारा क्यों लाया जा रहा है?
इसका पहला जवाब है बदलती व्यूअरशिप। भारत में फ्री-टू-एयर चैनलों का बड़ा दर्शक वर्ग अब भी मौजूद है। हर परिवार के पास महंगे ओटीटी सब्सक्रिप्शन नहीं हैं। छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में पारिवारिक धार्मिक कंटेंट आज भी मजबूत पकड़ रखता है।
रामायण और महाभारत के री-टेलीकास्ट के दौरान यह साफ देखा गया था कि धार्मिक कंटेंट पुराने दर्शकों के साथ नई पीढ़ी को भी आकर्षित कर सकता है। महामारी के दौरान Ramayan और Mahabharat की वापसी ने रिकॉर्ड व्यूअरशिप हासिल की थी। उस दौर ने ब्रॉडकास्टर्स को यह समझाया कि भारतीय दर्शक पौराणिक कंटेंट से भावनात्मक रूप से अब भी जुड़े हुए हैं।
Sony Pictures Networks India के लिए यह कदम लागत के लिहाज से भी समझदारी भरा है। नया हाई-बजट पौराणिक शो बनाना बेहद महंगा होता है। विशाल सेट, वीएफएक्स, कॉस्ट्यूम, स्टारकास्ट और लंबे प्रोडक्शन साइकल में भारी निवेश लगता है। इसके मुकाबले पहले से सफल कंटेंट को दोबारा लॉन्च करना कम जोखिम वाला विकल्प है।
शो की स्टार कास्ट भी इसकी ताकत है। Gagan Malik भगवान राम के किरदार में पहले भी सराहे गए थे। Deblina Chatterjee ने माता सीता की भूमिका निभाई थी। Nirbhay Wadhwa ने भगवान हनुमान के किरदार को ऊर्जा दी थी, जबकि Saurav Gurjar ने रावण की भूमिका निभाई थी।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सवाल भी है। क्या टीवी इंडस्ट्री पुराने धार्मिक कंटेंट पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो रही है?
आलोचकों का तर्क है कि बार-बार पुराने पौराणिक शोज़ की वापसी यह संकेत देती है कि चैनल नए प्रयोगों से बच रहे हैं। युवा दर्शक तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तरफ बढ़ चुके हैं। यदि चैनल केवल नॉस्टेल्जिया पर टिके रहे तो लंबी अवधि में यह रणनीति कमजोर साबित हो सकती है।
दूसरी तरफ समर्थकों का कहना है कि धार्मिक कंटेंट भारत में केवल मनोरंजन नहीं, सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम है। परिवार साथ बैठकर ऐसे कार्यक्रम देखते हैं। यह इंटर-जनरेशन कंटेंट है, जहां दादा-दादी से लेकर बच्चे तक एक साथ जुड़ सकते हैं।
राजनीतिक संदर्भ को भी पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। हाल के वर्षों में धार्मिक प्रतीकों और पौराणिक कथाओं की सार्वजनिक दृश्यता बढ़ी है। सिनेमा, टीवी, डिजिटल मीडिया और राजनीतिक विमर्श में धार्मिक कथाओं की मौजूदगी पहले से अधिक दिखाई दे रही है। हालांकि Sony Pal की यह घोषणा पूरी तरह एंटरटेनमेंट आधारित दिखाई देती है, लेकिन सांस्कृतिक माहौल इसका लाभ जरूर दे सकता है।
आर्थिक दृष्टि से देखें तो विज्ञापनदाता भी ऐसे कंटेंट में रुचि रखते हैं जहां पारिवारिक दर्शक मौजूद हों। एफएमसीजी ब्रांड्स, घरेलू उत्पाद कंपनियां और क्षेत्रीय विज्ञापनदाता अक्सर ऐसे स्लॉट्स में निवेश करते हैं जहां मास फैमिली ऑडियंस मिलती है।
डिजिटल प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। आज टीवी शोज़ केवल टीवी तक सीमित नहीं रहते। इनके क्लिप्स यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होते हैं। Sankatmochan Mahabali Hanuman का फायदा यह है कि इसका भावनात्मक कंटेंट सोशल मीडिया पर आसानी से रीसर्कुलेट हो सकता है।
फिर भी कुछ अनिश्चितताएं हैं। क्या नई पीढ़ी लंबे एपिसोड फॉर्मेट को अपनाएगी? क्या दोबारा प्रसारण पहली सफलता दोहरा पाएगा? क्या दर्शक नए विजुअल स्टैंडर्ड्स के बाद पुराने प्रोडक्शन को स्वीकार करेंगे?
इन सवालों के जवाब आने वाले हफ्तों में टीआरपी डेटा तय करेगा।
एक और बड़ा पहलू है भारतीय कंटेंट इंडस्ट्री का सांस्कृतिक निर्यात। भारतीय पौराणिक कंटेंट अब वैश्विक भारतीय प्रवासी दर्शकों में भी देखा जा रहा है। धार्मिक कथाओं की मांग केवल भारत तक सीमित नहीं रही।
Sony Pal का यह फैसला एक बात साफ करता है। भारतीय मीडिया इंडस्ट्री में कंटेंट सिर्फ नया होना जरूरी नहीं है, प्रासंगिक होना जरूरी है।
यदि कहानी दर्शकों की आस्था, भावना और पारिवारिक जुड़ाव को छूती है, तो पुराना कंटेंट भी नए दौर में नई सफलता लिख सकता है।
4 मई की रात 9 बजे केवल एक शो शुरू नहीं होगा। यह भारतीय टेलीविज़न की उस रणनीति की परीक्षा होगी जिसमें परंपरा, बिजनेस और भावनात्मक कनेक्शन तीनों एक साथ दांव पर लगे हैं।
अगर दर्शकों ने इसे अपनाया, तो आने वाले महीनों में और भी पौराणिक शोज़ की वापसी देखने को मिल सकती है।
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