
Shah Times report on Prayag IAS Academy's success in UKPSC PCS 2024 examination.
पीसीएस-2024 में प्रयाग आईएएस एकेडमी का बड़ा कमाल, 65+ चयन
यूकेपीएससी परिणाम में चमका प्रयाग आईएएस एकेडमी का नाम
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की संयुक्त राज्य सिविल/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा-2024 के परिणाम ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में संस्थागत मार्गदर्शन की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। देहरादून स्थित प्रयाग आईएएस एकेडमी ने दावा किया है कि उसके मार्गदर्शन से जुड़े 65 से अधिक अभ्यर्थियों ने विभिन्न चरणों में सफलता प्राप्त की है। डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी एसपी और एआरटीओ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर चयन ने इस उपलब्धि को चर्चा का विषय बना दिया है।
📍 देहरादून,
📰 7 जून 2026
✍️ शाह नज़र
पीसीएस-2024 में प्रयाग आईएएस एकेडमी का परचम, सफलता के पीछे की पूरी कहानी
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा संयुक्त राज्य सिविल एवं प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा-2024 का अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद राज्य भर में खुशी और उत्साह का माहौल है। इसी परिणाम के साथ देहरादून स्थित प्रयाग आईएएस एकेडमी भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। संस्थान का दावा है कि उसके मार्गदर्शन से जुड़े 65 से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा के विभिन्न चरणों में सफलता हासिल की है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की दुनिया में सफलता केवल परिणाम नहीं होती, बल्कि वह एक लंबे संघर्ष, रणनीति, अनुशासन और मार्गदर्शन का संयुक्त परिणाम होती है। ऐसे में प्रयाग आईएएस एकेडमी की यह उपलब्धि केवल एक संस्थान की सफलता नहीं, बल्कि उस व्यापक तैयारी संस्कृति का भी संकेत है जो आज सिविल सेवा परीक्षाओं के इर्द-गिर्द विकसित हो चुकी है।
पीसीएस-2024 में प्रयाग आईएएस एकेडमी की उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण है
उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा राज्य की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर वर्ष हजारों अभ्यर्थी इसमें शामिल होते हैं, लेकिन अंतिम चयन कुछ सौ उम्मीदवारों तक सीमित रहता है।
ऐसे प्रतिस्पर्धी माहौल में यदि किसी संस्थान से जुड़े 65 से अधिक अभ्यर्थी विभिन्न चरणों में सफलता प्राप्त करते हैं, तो यह निश्चित रूप से उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जाएगी। संस्थान के अनुसार सफल उम्मीदवारों ने प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू की तैयारी में उसके विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों का लाभ लिया।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चयनित अभ्यर्थियों ने प्रशासनिक ढांचे के कई महत्वपूर्ण पदों तक पहुंच बनाई है।
डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी जैसे पदों का महत्व
डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी जैसे पद केवल सरकारी नौकरियां नहीं हैं। ये प्रशासन और कानून व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।
डिप्टी कलेक्टर जिला प्रशासन की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करता है। वहीं डिप्टी एसपी कानून व्यवस्था, सुरक्षा और पुलिस प्रशासन में अहम भूमिका निभाता है। एआरटीओ जैसे पद परिवहन व्यवस्था के संचालन और नियमन से जुड़े होते हैं।
इन पदों पर चयन यह दर्शाता है कि अभ्यर्थियों ने परीक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व परीक्षण और प्रशासनिक समझ में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
सफलता के पीछे संस्थागत मार्गदर्शन की भूमिका
प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर यह बहस होती है कि सफलता केवल व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम होती है या कोचिंग संस्थानों का योगदान भी निर्णायक भूमिका निभाता है।
हकीकत इन दोनों के बीच कहीं दिखाई देती है। मेहनत और समर्पण के बिना कोई भी अभ्यर्थी सफलता हासिल नहीं कर सकता। दूसरी ओर सही दिशा, समयबद्ध रणनीति, टेस्ट सीरीज़, इंटरव्यू गाइडेंस और विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन तैयारी को अधिक व्यवस्थित बना देता है।
प्रयाग आईएएस एकेडमी के निदेशक आर. ए. खान ने भी सफलता का श्रेय अभ्यर्थियों की मेहनत, अनुशासन और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है। यह दृष्टिकोण प्रतियोगी परीक्षाओं की वास्तविकता के अधिक करीब दिखाई देता है।
बदलता हुआ प्रतियोगी परीक्षा नैरेटिव
एक समय था जब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी मुख्य रूप से बड़े महानगरों तक सीमित मानी जाती थी। आज डिजिटल लर्निंग, ऑनलाइन टेस्ट प्लेटफॉर्म और हाइब्रिड एजुकेशन मॉडल ने तस्वीर बदल दी है।
देहरादून जैसे शहरों में विकसित हो रहे शैक्षणिक संस्थान इस परिवर्तन की मिसाल हैं। अब अभ्यर्थियों को दिल्ली या अन्य महानगरों की ओर पलायन किए बिना भी गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध हो रहा है।
यह बदलाव केवल शिक्षा क्षेत्र का नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक अवसरों के विकेंद्रीकरण का भी संकेत है।
क्या केवल कोचिंग सफलता की गारंटी है?
इस उपलब्धि के बीच एक दूसरा नज़रिया भी सामने आता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संस्थान की सफलता का मूल्यांकन करते समय यह देखना आवश्यक है कि कुल चयनित अभ्यर्थियों में कितने उम्मीदवार वास्तव में उस संस्थान के पूर्णकालिक छात्र रहे और कितनों ने केवल किसी एक चरण में उसकी सेवाओं का उपयोग किया।
यही कारण है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामों पर रिपोर्टिंग करते समय दावों और तथ्यों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है।
यह भी सच है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी सफल होते हैं जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद स्वाध्याय के माध्यम से अपनी मंजिल हासिल की।
अभ्यर्थियों के लिए क्या संदेश?
पीसीएस-2024 का परिणाम एक स्पष्ट संदेश देता है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।
नियमित अध्ययन, उत्तर लेखन का अभ्यास, समसामयिक घटनाओं की समझ, मॉक इंटरव्यू और मानसिक संतुलन आज भी सफलता की बुनियादी शर्तें हैं।
जो अभ्यर्थी भविष्य की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह परिणाम प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। लेकिन प्रेरणा के साथ यथार्थवादी तैयारी रणनीति भी उतनी ही आवश्यक है।
समाज और प्रशासन पर व्यापक असर
जब नए अधिकारी प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश करते हैं तो उसका असर केवल उनके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव शासन व्यवस्था, नीति क्रियान्वयन और जनसेवा पर भी पड़ता है।
हर चयनित डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी एसपी या अन्य अधिकारी भविष्य में हजारों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले निर्णयों का हिस्सा बनता है। इसलिए ऐसी सफलताएं केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां नहीं बल्कि सार्वजनिक संस्थानों की क्षमता निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा भी हैं।
भविष्य की राह
प्रयाग आईएएस एकेडमी की यह सफलता आने वाले वर्षों में उसकी क्रेडिबिलिटी को मजबूत कर सकती है। साथ ही यह अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक प्रतिस्पर्धी मानक स्थापित करती है।
हालांकि किसी भी संस्थान की वास्तविक प्रतिष्ठा केवल एक परिणाम से नहीं बनती। उसे लगातार गुणवत्ता, पारदर्शिता और छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर खुद को साबित करना पड़ता है।
आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तराखंड और उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों में सिविल सेवा तैयारी का इकोसिस्टम किस दिशा में विकसित होता है।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
पीसीएस-2024 का परिणाम उन हजारों युवाओं की मेहनत का प्रतीक है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य का पीछा नहीं छोड़ा। प्रयाग आईएएस एकेडमी द्वारा दावा की गई 65 से अधिक सफलताओं ने निश्चित रूप से इस परिणाम को अतिरिक्त चर्चा दी है।
लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सफलता का केंद्र किसी संस्थान से अधिक अभ्यर्थियों की लगन, अनुशासन और निरंतर प्रयास हैं। मार्गदर्शन रास्ता दिखा सकता है, लेकिन मंजिल तक पहुंचने का सफर अंततः उम्मीदवार को स्वयं तय करना पड़ता है।




