
पूर्व में राजनीति के अपराधीकरण व अपराध के राजनीतिकरण की तरह वर्तमान में धर्म का चुनावी स्वार्थ के लिए राजनीतिकरण हो रहा है जिससे देश व जनहित प्रभावित हो रहा है और इसीलिए देश निर्माण में बी.एस.पी. की विशेष जिम्मेदारी है
लखनऊ, (Shah Times )। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद मायावती ने, उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड राज्य के समस्त वरिष्ठ पदाधिकारियों तथा जिला अध्यक्षों की आज यहाँ हुई विशेष बैठक में, पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने तथा पार्टी संगठन की मज़बूती के साथ ही आगामी लोकसभा आमचुनाव की तैयारियों आदि के सम्बंध में पार्टी की पिछली बैठकों में दिये गये निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट लेने के उपरान्त उल्लेखित ख़ास कमियों को दूर करने के साथ ही बदलते चुनावी हालात व राजनीतिक समीकरणों आदि के मद्देनजर ताज़ा दिशा-निर्देश देते हुये उन पर सही से अमल करके अच्छा रिज़ल्ट प्राप्त करने का आह्वान किया।
इससे पहले मायावती ने यू.पी. व उत्तराखण्ड स्टेट को छोड़कर आल इण्डिया स्तर पर ऐसी ही 17 व 18 जनवरी को दिल्ली में आयोजित समीक्षा बैठकों में अलग-अलग राज्यों की प्रगति रिपोर्ट ली और उन्हें लोकसभा आमचुनाव में पूरी तरह से जुट जाने का निर्देश देते हुये पुनः स्पष्ट किया कि पार्टी को दूसरी पार्टियों के साथ चुनाव गठबंधन अथवा किसी प्रकार का समझौता नहीं करना है, क्योंकि इस क्रम में बार-बार धोखा खाना होशियारी नहीं है। गठबंधन के ऐसे कड़वे अनुभवों से कर्मठ कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है और मिशन कमजोर होता है।
इसी प्रकार उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड राज्य की आज की समीक्षा बैठक में सुश्री मायावती जी ने सबसे पहले दिनांक 15 जनवरी को उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में बी.एस.पी. द्वारा देश भर में आयोजित होने वाले “जनकल्याणकारी दिवस” के आयोजनों के बारे में समीक्षा रिपोर्ट ली और कहा कि उनकी अपनी फीडबैक के मुताबिक वैसे तो देश भर में लोगों ने पूरे जोश व उत्साह के साथ यह दिवस पार्टी के निर्देशों के अनुसार मनाया है, किन्तु खासकर उत्तर प्रदेश में यह सार्वजनिक कार्यक्रम बडे जोश व गर्मजोशी के साथ मनाया गया, जिसके लिए उन्होंने सभी का तहेदिल से आभार व शुक्रिया
अदा करते हुये यह उम्मीद जाहिर की। कि उनका यह योगदान बी.एस.पी. पार्टी व इसके मानवतावादी मूवमेन्ट को आगे बढ़ाकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कारवाँ को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका जरूर निभायेगा। सेक्टर / पोलिंग बूथ स्तर पर पार्टी के जनाधार को बढ़ाने एवं संगठन की मज़बूती के लिए छोटी-छोटी कैडर मीटिंगें करने सम्बंधी दिये गये जरूरी दिशा-निर्देशों आदि को पूरी लगन व निष्ठा से पूरा करने पर पुनः ज़ोर देते हुये सुश्री मायावती जी ने कहा कि ऐसे समय में जबकि पूर्व में राजनीति के अपराधीकरण व अपराध के राजनीतिकरण की तरह वर्तमान में धर्म का चुनावी स्वार्थ के लिए राजनीतिकरण उचित नहीं है, क्योंकि इससे देश व जनहित प्रभावित हो रहा है।
साथ ही जबरदस्त महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी आदि से दुखी व पीड़ित देश के 81 करोड़ से अधिक लोग जीने के लिए सरकारी अन्न के मोहताज हैं यह कोई इनकी रोटी रोजी का स्थाई हल नहीं है।
ऐसे में लगभग सभी सरकारों की जनहित व जनकल्याण की सोच व कार्यशैली पर ऊंगली उठना स्वाभाविक है क्योंकि इन सबसे यह साबित होता है कि इनकी नीतियों व कार्यक्रमों से कुछ मुट्ठीभर लोगों का तो जरूर भला हो रहा है, किन्तु देश के करोड़ों गरीबों, मजदूरों, किसानों, बेरोजगारों आदि, इन मेहनतकश लोगों का हित बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।
सरकारें आमजन के हित का संवैधानिक धर्म निभाने के बजाय केवल अपने-अपने वोट बैंक की चिन्ता में डूबी रहेगी तो इससे देशहित कैसे संभव है, जैसाकि आँकड़ों से स्पष्ट है कि देश में पूंजीपतियों की पूंजी तो लगातार बढ़ रही किन्तु ना तो राष्ट्रीय सम्पत्ति का विकास हो रहा है तथा ना ही जनता खुश व खुशहाल हो पा रही है।
मायावती ने दोहराया कि बी.एस.पी. ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो संवैधानिक आदर्शों व मूल्यों के आधार पर चलने वाली पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष पार्टी है और सभी धर्मों व उनके धार्मिक स्थलों का पूरा-पूरा आदर-सम्मान करके सभी के साथ न्याय का व्यवहार करते हुये सभी के जान-माल व इज्ज़त आबरू की सुरक्षा की ऐसी गारण्टी सुनिश्चित करती है कि इसकी दूसरी मिसाल मिलनी मुश्किल है। ऐसा एक बार नहीं बल्कि बी.एस.पी. की चार बार यहाँ यूपी में रही सरकार में लोगों ने देखा व अनुभव किया। देश में अगर दंगामुक्त सरकार किसी ने दिया तो वह सिर्फ बी.एस.पी. की उनकी सरकार में रही है।
मायावती ने कहा कि बी.एस.पी. की तरह ही दूसरी राजनीतिक पार्टियों को संविधान व धर्म का सम्मान करते हुये इसका दुरुपयोग नही करना चाहिये, जैसाकि अपने देश में अक्सर देखने को मिलता रहा है और अब तो यह खुलेआम हो रहा है।
वैसे भी केन्द्र व राज्यों की सरकारों द्वारा जो जनहित व जनकल्याण के बड़े-बड़े दावे किये जाते हैं वे जमीनी हकीकत से बहुत दूर हैं। लोगों के सामने महंगाई, गरीबी व बेरोजगारी आदि ऐसी घातक समस्यायें हैं कि जिसकी वजय से लोग काफी दुःखी व चिन्तनीय भी है।
इसके अलावा, दुनिया के भी हालात लगातार ऐसे खराब होते जा रहे हैं कि भारत को भी हर मामले में अपनी चिन्ता खुद ही करनी होगी और जिसके लिए केन्द्र व राज्यों में जनहित की मजबूत सरकारों की जरूरत है। ना कि मजबूत सरकारों के नाम पर हवा-हवाई सरकारों की इन सब चिन्ताओं के मद्देनजर देश में शीघ्र ही होने वाले लोकसभा आमचुनाव का, पिछले चुनावों से अलग, विशेष महत्व है जिसके लिये पार्टी के लोगों को पूरी गंभीरता के साथ अच्छे व मजबूत पार्टी के उम्मीदवारों को चुनने की जिम्मेदारी है तथा जिसके लिये अब समय बहुत ही कम बचा है।
लोकसभा का आमचुनाव अकेले अपने बलबूते पर लड़ने के पार्टी के स्टैण्ड को दोहराते हुये उन्होंने कहा कि ऐसे में पार्टी के लोगों पर बेहतर रिजल्ट लाने की जबरदस्त जिम्मेदारी है और इसीलिए वे लोग मीडिया द्वारा फैलाई जाने वाली हर प्रकार की अफवाहों एवं मिथ्या प्रचार आदि के अलावा विरोधी पार्टियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों से दूर रहकर पार्टी के दिशा-निर्देशों को पूरा करने के लिए संगठित होकर पूरे तन, मन व धन से इस ध्येय के साथ लगे रहें कि ‘बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का मिशन अधूरा, बी.एस.पी करेगी पूरा’, जिसमें ही सर्वसमाज का हित सुरक्षित है। अर्थात् इन सब बातों की तरफ पार्टी के लोगों को जरूर ध्यान देना होगा तथा पार्टी के सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय की सोच व नीतियों पर आधारित कारवाँ को आगे बढ़ाना है।









