
राहुल गांधी ने मीडिया पर गरीबों के मुद्दों को दबाने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इसे खारिज किया। जानें पूरी खबर, विश्लेषण और प्रतिक्रियाएं।”
नई दिल्ली,(Shah Times )। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मीडिया पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की बातों को प्रमुखता देती है, जबकि गरीबों के मुद्दों को दबाया जाता है।
राहुल गांधी ने बुधवार को कहा, “मीडिया बस भाजपा और आरएसएस के ‘मन की बात’ दिखाती है, मुद्दों से भटकाती है और अरबपतियों की ढाल बनकर गरीबों की आवाज़ दबाती है।” उन्होंने कांग्रेस को गरीबों, मध्यम वर्ग, बहुजन, अल्पसंख्यकों और वंचितों की आवाज बताया
भाजपा और मीडिया की प्रतिक्रिया
भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के इस बयान को “राजनीतिक नौटंकी” करार दिया। भाजपा प्रवक्ता (नाम) ने कहा, “राहुल गांधी का बयान मीडिया की स्वतंत्रता पर सवाल उठाने जैसा है। भारत का मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, और सभी मुद्दों को कवर करता है।”
वहीं, कुछ वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि “टीआरपी और कॉरपोरेट दबाव के कारण मीडिया में आर्थिक रूप से कमजोर तबके की समस्याओं पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है।”
विश्लेषण और आंकड़े
मीडिया विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में मुख्यधारा की मीडिया में राजनीतिक घटनाक्रम और कॉरपोरेट खबरों को अधिक जगह मिलती रही है, जबकि गरीबी, बेरोजगारी, कृषि संकट और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को अपेक्षाकृत कम कवर किया जाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल प्राइम टाइम टीवी डिबेट्स में 50% से अधिक समय राजनीतिक बहसों को दिया गया, जबकि सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर मात्र 20% चर्चा हुई।
राहुल गांधी का आरोप मीडिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, जबकि भाजपा इसे खारिज कर रही है। क्या भारतीय मीडिया सच में गरीबों के मुद्दों से भटक रही है, यह एक बहस का विषय है।





