
India's GDP growth dips to 6.5% in FY 2024-25, but rural demand and investment offer resilience – Shah Times
धीमी पड़ी भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार, लेकिन बुनियादी ढांचा और ग्रामीण मांग ने बचाई लय
GDP Growth 6.5% पर, उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन; निवेश और महंगाई में आई राहत बनी सहारा
भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी, लेकिन 6.5% GDP ग्रोथ उम्मीद से बेहतर। महंगाई में राहत और ग्रामीण मांग ने अर्थव्यवस्था को संभाला।
भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2024-25 में अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया, हालांकि विकास दर पिछले वर्षों के मुकाबले थोड़ी धीमी रही। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा शुक्रवार, 30 मई 2025 को जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में GDP ग्रोथ 6.5% दर्ज की गई, जो विशेषज्ञों के अनुमान 6.3% से अधिक है। मार्च तिमाही में यह आंकड़ा 7.4% रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 8.4% था।
मजबूत बने रहे आर्थिक आधार स्तंभ
हालांकि समग्र विकास दर धीमी रही, लेकिन कृषि, सेवा और निर्माण क्षेत्र की ठोस परफॉर्मेंस ने भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखा। GVA (ग्रॉस वैल्यू एडेड), जो टैक्स और सब्सिडी जैसे फैक्टर को निकालकर शुद्ध आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है, जनवरी-मार्च तिमाही में 6.8% पर पहुंच गया। ये संकेत देता है कि आंतरिक मांग और उत्पादन गतिविधियां सक्रिय बनी रहीं।
ग्रामीण भारत ने दिखाई मजबूती
एक बड़ा बदलाव यह देखा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। कृषि उपकरणों जैसे ट्रैक्टर की बिक्री बढ़ने और खाद्यान्न की स्थिर कीमतों ने ग्रामीण उपभोक्ताओं की क्रयशक्ति को मजबूती दी है। Private Final Consumption Expenditure (PFCE) 7.2% की दर से बढ़ा, जो पिछले साल के 5.6% से बेहतर है।
प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन
कुछ क्षेत्रों में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली:
- निर्माण क्षेत्र में 9.4% की वार्षिक वृद्धि और मार्च तिमाही में 10.8% की जबरदस्त उछाल।
- सार्वजनिक प्रशासन और रक्षा सेवाओं में 8.9% की वृद्धि।
- फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाओं में 7.2% की ग्रोथ।
इन क्षेत्रों की मजबूती ने GDP के गिरते ग्राफ को थामे रखा।
सरकारी खर्च घटा, निवेश बढ़ा
जहाँ मार्च तिमाही में सरकारी खर्च 1.8% घटा, वहीं पूंजीगत निवेश (Capital Expenditure) में 9.4% की वृद्धि दर्ज की गई। इससे यह साफ होता है कि सरकार अल्पकालिक खर्च के बजाय दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और परियोजनाओं पर अधिक ध्यान दे रही है, जो भविष्य में ग्रोथ का इंजन बन सकते हैं।
महंगाई में राहत, ब्याज दर में कटौती संभव
अप्रैल 2025 में खुदरा महंगाई 3.16% पर आ गई, जो पिछले छह वर्षों में सबसे कम रही है। अच्छी मानसूनी वर्षा की संभावना और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता से आम लोगों को राहत मिली है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव बन सकता है, जो आगे जाकर कर्ज और निवेश को बढ़ावा दे सकता है।
निष्कर्ष: धीमी लेकिन स्थिर प्रगति
भारत की GDP ग्रोथ भले ही 6.5% पर आ गई हो, लेकिन यह दर अभी भी वैश्विक मानकों के अनुसार तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। ग्रामीण मांग का उभार, निवेश में तेजी, महंगाई पर नियंत्रण और इंफ्रास्ट्रक्चर में फोकस दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बुनियादी रूप से मजबूत बनी हुई है। आने वाले समय में यदि ग्लोबल मार्केट्स और एक्सपोर्ट में सुधार होता है, तो देश की ग्रोथ फिर से तेज हो सकती है।






