
Muzaffarnagar Cyber Crime Police briefing the media after arresting two accused involved in a ₹33.33 lakh Digital Arrest scam. (Shah Times)
TRAI, ED, CBI बनकर लोगों को फंसाने वाले ठग गिरफ्तार – पुलिस की साइबर कार्रवाई
मुज़फ्फरनगर साइबर पुलिस ने 46 करोड़ के डिजिटल फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया
मुज़फ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस ने डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर 33.33 लाख की ठगी करने वाले गिरोह के 2 शातिर अभियुक्त गिरफ्तार किए। बरामदगी और पूछताछ ने खोली बड़े नेटवर्क की पोल। Shah Times की पूरी रिपोर्ट।
डिजिटल ठगों की गिरफ्तारी – पुलिस की बड़ी कामयाबी
Muzaffarnagar,(Shah Times)। मुज़फ्फरनगर की साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसा आपराधिक नेटवर्क ध्वस्त किया है जो Digital Arrest के नाम पर लोगों को भयभीत कर करोड़ों रुपये हड़प रहा था। पुलिस टीम ने दो शातिर अपराधियों – निखिल गोयल और हरप्रीत सिंह उर्फ हर्ष – को गिरफ्तार कर न सिर्फ़ 33.33 लाख की ठगी का पर्दाफाश किया, बल्कि उनके पास से भारी मात्रा में आपराधिक सामग्री भी बरामद की।
इस कार्रवाई के पीछे पुलिस की तेज़ी, सतर्कता और तकनीकी समझ ने एक मिसाल कायम की है।
वादी के साथ डिजिटल ठगी का पूरा घटनाक्रम
11 सितंबर 2025 को वादी को एक फ़ोन कॉल आया। कॉलर ने ख़ुद को TRAI/ED अधिकारी बताकर कहा कि उसके बैंक खाते में मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियाँ हो रही हैं और उस पर Digital Arrest लागू किया जा रहा है।
इसके बाद –
WhatsApp कॉल पर दरियागंज थाना दिल्ली का लोगो दिखाया गया।
कॉलर ने ख़ुद को IPS अफ़सर बताया और लिखित में सफाई दिलवाई।
फिर CBI अधिकारी बनकर कॉल आया।
अंततः माननीय न्यायालय के नाम और लोगो का दुरुपयोग करते हुए नकली आदेश PDF के रूप में भेजा गया।
इस पूरी साजिश के दौरान वादी को डराकर और धमकाकर 33.33 लाख रुपये ट्रांसफ़र करवा लिए गए।
पुलिस की त्वरित कार्यवाही
वादी की तहरीर मिलते ही थाना साइबर क्राइम मुज़फ्फरनगर में मुक़दमा पंजीकृत हुआ –
धारा 318(4), 351 BNS
66C, 66D IT Act
अपर पुलिस महानिदेशक “मेरठ जोन मेरठ” एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक “सहारनपुर परिक्षेत्र सहारनपुर” के निर्देशन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक , जनपद मुजफ्फनगर संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण, पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ, क्षेत्राधिकारी अपराध ऋषिका सिंह एवं थाना प्रभारी साइबर क्राइम सुल्तान सिंह के कुशल नेतृत्व में थाना साइबर क्राइम द्वारा विशेष टीम गठित की गई।
18 सितंबर 2025 को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर पुरकाज़ी बाइपास से भैंसानी मार्ग पर दोनों अभियुक्तों को दबोच लिया।
बरामदगी की सूची
39 सिमकार्ड
21 ATM/डेबिट कार्ड
15 बैंक पासबुक
13 मोबाइल फ़ोन
03 चैकबुक
02 नोटबुक
01 Wi-Fi राऊटर
01 LAN Cable
01 स्कूटी
₹99,500 नगद
यह बरामदगी बताती है कि यह गिरोह लंबे समय से साइबर फ्रॉड का संगठित नेटवर्क चला रहा था।
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सरगना और बड़ा नेटवर्क
गिरफ्तार अभियुक्तों ने पूछताछ में खुलासा किया कि राजू निवासी भिलाई (छत्तीसगढ़) इस गैंग का सरगना है। वह भोले-भाले लोगों से लालच देकर बैंक अकाउंट, ATM कार्ड और पासबुक हासिल करता था और फिर उन्हें विदेशी साइबर ठगों के साथ मिलकर इस्तेमाल करता।
धनराशि को नकदी में बदलकर USDT क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए विदेश भेज दी जाती थी। यह एक ग्लोबल साइबर क्राइम चैनल का हिस्सा है।
करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा
बरामद खातों की जांच से पता चला कि इस नेटवर्क ने अब तक लगभग ₹46.55 करोड़ की धोखाधड़ी की है।
खाते नंबर 8111763425 – ₹26.29 करोड़ (7 शिकायतें)
खाते नंबर 8110679816 – ₹5.41 करोड़ (2 शिकायतें)
खाते नंबर 60494332366 – ₹3.43 करोड़ (3 शिकायतें)
खाते नंबर 8095146054 – ₹3.36 करोड़ (1 शिकायत)
खाते नंबर 5792695072 – ₹2.95 करोड़ (9 शिकायतें)
… और कई अन्य खातों में करोड़ों का लेन-देन।
पुलिस की टीम जिसने गिराया डिजिटल साम्राज्य
प्रभारी निरीक्षक सुल्तान सिंह
उ.नि. गौरव चौहान
उ.नि. धर्मराज सिंह
उ.नि. जय शर्मा
हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार
हेड कांस्टेबल सुनील कुमार
कांस्टेबल रोबिन कसाना
कांस्टेबल अंकुर शर्मा
कांस्टेबल राहुल कुमार
इन सबकी मेहनत ने एक बार फिर साबित किया कि अपराध चाहे कितना भी डिजिटल क्यों न हो, पुलिस की ईमानदार कोशिश से कानून का शिकंजा कस ही जाता है।
यह घटना केवल एक पुलिस सफलता की कहानी नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया की नई चुनौती भी है।
फर्जी Digital Arrest का डर – जनता को न्यायालय, CBI, ED, TRAI जैसे प्रतिष्ठानों के नाम पर आसानी से डराया जा रहा है।
तकनीकी दुरुपयोग – WhatsApp, लोगो, PDF, क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल अपराधियों को और खतरनाक बना रहा है।
जनता की जागरूकता की कमी – लोग ऐसे कॉल्स पर तुरंत विश्वास कर लेते हैं।
पुलिस की जिम्मेदारी – हर ज़िले में साइबर क्राइम यूनिट को और मज़बूत करने की आवश्यकता है।
भविष्य की दिशा
डिजिटल साक्षरता अभियान – आम जनता को सिखाना होगा कि ED/CBI/Police कभी फोन या WhatsApp पर Digital Arrest नहीं करती।
साइबर फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर – राज्यों में आधुनिक जांच प्रयोगशालाएं चाहिए।
क्रॉस-बॉर्डर कोऑपरेशन – क्योंकि पैसे विदेश भेजे जाते हैं, इंटरपोल और विदेशी एजेंसियों के साथ साझेदारी मज़बूत होनी चाहिए।
क्रिप्टोकरेंसी रेग्युलेशन – ठगी का बड़ा हिस्सा डिजिटल करेंसी के जरिए बाहर भेजा जाता है।
नतीजा
मुज़फ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस की यह कार्रवाई देशभर के लिए Role Model है।
यह संदेश साफ़ है – चाहे अपराध कितना भी तकनीकी क्यों न हो, क़ानून से तेज़ कोई नहीं।





