
Canada declares Lawrence Bishnoi gang terrorist organization – Shah Times_20250929_200230_0000
अब लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कनेक्शन भी क्राइम
भारत–कनाडा रिश्तों पर असर डाल सकती है बिश्नोई गैंग की आतंकी लिस्टिंग
📍नई दिल्ली
🗓️ 29 सितम्बर 2025
✍️ आसिफ़ ख़ान
कनाडा सरकार ने लॉरेंस बिश्नोई के नेतृत्व वाले गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। यह कदम न सिर्फ़ कनाडा की इंटरनल सिक्योरिटी के लिहाज़ से अहम है बल्कि भारत–कनाडा रिश्तों और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर भी गहरा असर डाल सकता है।
एक गैंग, जो क्राइम से टेररिज़्म तक पहुँचा
लॉरेंस बिश्नोई का नाम भारत में क़त्ल, रंगदारी, शूटआउट और बॉलीवुड हस्तियों को धमकाने जैसी खबरों में बार–बार सामने आया। पर अब मामला सिर्फ़ इंडिया तक सीमित नहीं रहा। कनाडा सरकार ने इस गैंग को आधिकारिक तौर पर Terrorist Organization घोषित कर दिया है। यह कोई मामूली फैसला नहीं, बल्कि उन प्रवासी इलाक़ों में एक बड़ा सिग्नल है जहाँ यह गैंग अपनी पकड़ मज़बूत कर चुका है।
कनाडा के Public Safety Minister गैरी अनंदसंगरी ने कहा कि “हिंसा और आतंक का कनाडा में कोई स्थान नहीं है, ख़ासकर जब किसी ख़ास community को डर और धमकी में जीने पर मजबूर किया जाए।” यह बयान साफ़ करता है कि सरकार इस नेटवर्क को सिर्फ़ क्रिमिनल गैंग नहीं बल्कि टेरर ग्रुप की तरह ट्रीट कर रही है।
कानूनी प्रभाव: अब मदद भी अपराध
इस फैसले के बाद कनाडा के क्रिमिनल कोड के तहत लॉरेंस गैंग को आतंकवादी संगठन मान लिया गया है। इसके तीन बड़े असर होंगे:
संपत्ति जब्ती और बैंक अकाउंट फ्रीज़:
कनाडा में मौजूद इस गैंग से जुड़ी कोई भी संपत्ति, धन या वाहन अब सीधा फ्रीज़ या जब्त किया जा सकता है।
फाइनेंशियल सपोर्ट अपराध:
अगर कोई कनाडाई नागरिक, चाहे सीधे या परोक्ष रूप से, इस गैंग को आर्थिक मदद करता है तो वह अपराधी माना जाएगा। यह क़ानून इतना सख़्त है कि एक छोटी–सी transaction भी अपराध की श्रेणी में आएगी।
एंट्री और इमिग्रेशन पर रोक:
कनाडाई इमिग्रेशन ऐक्ट के तहत अब इस गैंग से जुड़े लोग कनाडा में दाख़िल नहीं हो पाएंगे। Officials वीज़ा या रेज़िडेंसी तय करते वक्त इस लिस्टिंग को ध्यान में रखेंगे।
यह क़दम symbolic नहीं बल्कि real impact वाला है। क्योंकि अब सिर्फ़ गैंग लीडर ही नहीं बल्कि उनके networks और sympathizers पर भी क़ानूनी शिकंजा कसा जा सकेगा।
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बिश्नोई गैंग का नेटवर्क: इंडिया से कनाडा तक
लॉरेंस बिश्नोई इस वक्त भारत की जेल में बंद है, लेकिन माना जाता है कि वह वहीं से गैंग को operate करता है। WhatsApp, VOIP कॉल्स और encrypted एप्स के जरिए वह कनाडा समेत कई देशों में अपने associates से जुड़ा रहता है।
कनाडा की RCMP (Royal Canadian Mounted Police) ने पिछले साल रिपोर्ट दी थी कि यह गैंग कनाडा में हत्याएं, रंगदारी और cultural personalities पर हमले की प्लानिंग करता है। खासकर पंजाबी community और खालिस्तान सपोर्ट करने वाले लोगों को target करने के आरोप लगे।
भारत ने हालांकि इन आरोपों को खारिज किया था, लेकिन कनाडा का यह फैसला दिखाता है कि दोनों देशों के बीच intelligence और law enforcement cooperation कहीं न कहीं दबाव में है।
प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा: डर और उम्मीद दोनों
कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय diaspora रहता है। पंजाबी community तो वहां की राजनीति और economy में अहम रोल निभाती है। ऐसे में इस गैंग की मौजूदगी वहां एक डर का माहौल बना रही थी।
डर इसलिए: क्योंकि हत्या, गोलीबारी और उगाही जैसी वारदातें सीधे उन्हीं इलाक़ों में हो रही थीं जहाँ भारतीय मूल के लोग बसे हुए हैं।
उम्मीद इसलिए: क्योंकि अब इस कदम से diaspora को यह मैसेज जाएगा कि सरकार उनकी सुरक्षा के लिए कठोर action लेने को तैयार है।
कई प्रवासी नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे उन्हें “सांस लेने का मौका” मिलेगा।
इंटरनेशनल पॉलिटिक्स: इंडिया–कनाडा रिश्तों का नया मोड़
यह फैसला एक sensitive वक़्त पर आया है। पिछले कुछ सालों से इंडिया–कनाडा रिश्ते खालिस्तान issue और कूटनीतिक आरोप–प्रत्यारोप की वजह से तनावपूर्ण रहे हैं।
भारत कहता है कि कनाडा खालिस्तानी तत्वों को पनाह देता है।
कनाडा का आरोप है कि भारत extrajudicial killings और गैंगस्टर groups को political influence के लिए इस्तेमाल करता है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित करना एक तरह से कनाडा की तरफ़ से मैसेज है कि “हम organized crime और terror को लेकर सख़्त हैं।” लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह step India–Canada के बीच mutual trust को बढ़ाएगा या नया विवाद खड़ा करेगा।
क्राइम और टेरर के बीच पतली लकीर
यहाँ एक अहम सवाल उठता है – क्या हर organized crime group को terrorist group की category में डाल देना सही है?
लॉरेंस बिश्नोई गैंग undeniably ख़तरनाक है, पर इसका core nature mafia-style organized crime रहा है – extortion, murder, threats। इसे आतंकवाद से जोड़ने का मतलब है कि अब इसे सिर्फ़ क़ानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि National Security का मसला माना जाएगा।
कुछ experts मानते हैं कि यह कदम सही है क्योंकि गैंग की cross-border activities और specific communities को target करना “terror-style intimidation” है। जबकि कुछ कहते हैं कि इससे “terrorism” शब्द का misuse होगा और असली terror outfits (जैसे अल-क़ायदा या ISIS) और mafia gangs के बीच फर्क धुंधला हो जाएगा।
भारतीय संदर्भ: बॉलीवुड, राजनीति और जनता
भारत में लॉरेंस बिश्नोई का नाम सबसे ज़्यादा तब चर्चा में आया जब उसने बॉलीवुड स्टार सलमान ख़ान को धमकी दी। कहा गया कि ब्लैकबक शिकार केस की वजह से उसका ग़ुस्सा है।
इसके अलावा पंजाब और हरियाणा में दर्जनों शूटआउट और हत्या के मामलों में इस गैंग का नाम जुड़ा। किसान नेताओं, व्यापारी संघों और पत्रकारों तक को धमकाने के आरोप लगे।
यानी यह गैंग इंडिया में पहले ही “terror-like fear” फैला चुका है। अब कनाडा की लिस्टिंग इसे global terrorist narrative में डाल रही है।
नतीजा और आगे का रास्ता
कनाडा का यह फैसला symbolic भी है और practical भी। Symbolic इसलिए कि यह diaspora को confidence देता है। Practical इसलिए कि अब कनाडाई एजेंसियां सीधे financial crackdown कर सकती हैं।
मगर broader सवाल यह है कि क्या इससे भारत–कनाडा रिश्तों की ice melt होगी या और tensions पैदा होंगी। साथ ही यह precedent भी बनेगा कि organized crime को global level पर terror के साथ club किया जा सकता है।
नज़रिया
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का terrorist organization के रूप में लिस्ट होना सिर्फ़ एक कानूनी कदम नहीं है, बल्कि यह international politics, diaspora security और organized crime पर global narrative को shape करने वाला development है।
यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आज का gangster कल का terrorist कैसे बन जाता है – और इस thin line को nations किस तरह define करते हैं।




