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Middle East का नया मोड़: गाज़ा शांति प्रस्ताव और उसके भू-राजनीतिक निहितार्थ
गाज़ा शांति प्रस्ताव 2025: क्षेत्रीय संतुलन और वैश्विक राजनीति
📍 व्हाइट हाउस, वॉशिंगटन
📅 30 सितम्बर 2025
✍️ Asif Khan
मध्य पूर्व शांति की व्यापक तस्वीर: ट्रंप-नेतन्याहू गाज़ा शांति योजना का भू-राजनीतिक विश्लेषण
सितंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़रायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने गाज़ा युद्ध को समाप्त करने के लिए 20-सूत्रीय शांति योजना पेश की। इस प्रस्ताव में युद्धविराम, विसैन्यीकरण, बंधकों की वापसी और गाज़ा में अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण जैसे अहम कदम शामिल हैं। लेकिन योजना के राजनीतिक, कूटनीतिक और क्षेत्रीय पहलुओं ने मध्य पूर्व में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
30 सितम्बर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस में गाज़ा युद्ध को समाप्त करने के लिए 20-सूत्रीय शांति योजना पेश की। इस प्रस्ताव ने न सिर्फ़ मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया में बहस छेड़ दी है।
इस शांति योजना में युद्धविराम (ceasefire), गाज़ा का विसैन्यीकरण (demilitarization), बंधकों की रिहाई और गाज़ा में अंतरराष्ट्रीय प्रशासन (international authority) जैसी अहम शर्तें रखी गई हैं। सवाल यह है कि क्या यह प्रस्ताव स्थायी शांति लाएगा या यह सिर्फ़ एक और राजनीतिक चाल है?
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प्रस्ताव के मुख्य बिंदु
गाज़ा में तत्काल युद्धविराम
हमास का विसैन्यीकरण और हथियारों का नियंत्रण
सभी बंधकों की रिहाई
गाज़ा का प्रशासन अंतरराष्ट्रीय निगरानी में
आर्थिक पैकेज और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया
इज़राइल की सुरक्षा की गारंटी
यहां साफ है कि प्रस्ताव का ढांचा इज़राइल की सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता देता है, जबकि फ़िलिस्तीनी आकांक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण के हवाले करता है।
अमेरिका की रणनीति
ट्रंप प्रशासन की इस पहल को अमेरिकी चुनावी राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। गाज़ा शांति योजना को व्हाइट हाउस ने “ऐतिहासिक उपलब्धि” बताया है। लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह एक राजनीतिक स्टंट है, जो अमेरिकी यहूदी लॉबी और अरब साझेदारों दोनों को साधने का प्रयास है।
इज़राइल का दृष्टिकोण
नेतन्याहू ने इस योजना को इज़राइल की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक बताया। उनके अनुसार गाज़ा का विसैन्यीकरण और अंतरराष्ट्रीय प्रशासन से हमास और अन्य उग्रवादी समूहों की ताकत कम होगी। हालांकि इज़राइल के भीतर भी यह बहस है कि क्या गाज़ा पर बाहरी प्रशासन इज़राइल की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएगा।
फ़िलिस्तीन की प्रतिक्रिया
फ़िलिस्तीनी पक्ष ने इस प्रस्ताव को “अधूरा” और “पक्षपाती” बताया है। उनका कहना है कि इसमें फ़िलिस्तीनी जनता की आकांक्षाओं, आत्मनिर्णय (self-determination) और स्वतंत्र राज्य के मुद्दे को दरकिनार कर दिया गया है। हमास ने इसे “सफ़ेद झूठ” करार दिया और कहा कि यह फ़िलिस्तीनियों के अधिकार छीनने की साज़िश है।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
अरब देश: सऊदी अरब और मिस्र ने सतर्क समर्थन जताया, जबकि क़तर और तुर्की ने विरोध किया।
यूरोप: यूरोपीय यूनियन ने शांति प्रयासों का स्वागत किया लेकिन मानवाधिकारों की चिंता जताई।
संयुक्त राष्ट्र: UN ने कहा कि यह कदम तभी सफल होगा जब फ़िलिस्तीनी जनता इसमें शामिल होगी।
विश्लेषण
यह शांति योजना असल में मध्य पूर्व के शक्ति संतुलन को फिर से परिभाषित करती है।
यह इज़राइल को सुरक्षा की गारंटी देती है।
अमेरिका को चुनावी और रणनीतिक लाभ पहुँचाती है।
अरब देशों को “शांति साझेदार” के रूप में पेश करती है।
लेकिन फ़िलिस्तीनियों को उनके मूल मुद्दों – स्वतंत्रता और संप्रभुता – से दूर कर देती है।
नज़रिया
गाज़ा शांति योजना को ऐतिहासिक बताया जा रहा है, लेकिन यह असल में अधूरी तस्वीर पेश करती है। यह शांति का रोडमैप है या राजनीतिक खेल, यह आने वाला वक्त तय करेगा।




