
अमेरिका ने चीन से आयातित सॉफ़्टवेयर पर 100% टैरिफ का एलान
व्यापार युद्ध तेज़, क्रिप्टो – शेयर बाजारों में भारी गिरावट
📍 नई दिल्ली
🗓️ 11 अक्टूबर 2025
✍️: Asif Khan
अमेरिका ने चीन से आयातित “सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर” पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद क्रिप्टोकरेंसी बाजारों में भारी गिरावट आई है — बिटकॉइन, इथेरियम सहित कई टोकन 8-15% तक लोट गए। इस कदम को व्यापार संघर्ष की नई आवाज़ माना जा रहा है।
क्रिप्टो को झटका: अमेरिका ने चीन से आयातित सॉफ्टवेयर पर 100% टैरिफ का किया ऐलान
आज की यह खबर जितनी गंभीर है, उतनी ही जटिल। मैं आपको सीधी भाषा में, लेकिन गहराई के साथ समझाने की कोशिश करूँगा — जैसे हम दोनों किसी कैफ़े में बैठे हों और चाय की चुस्की के साथ चर्चा कर रहे हों।
गिरावट का लगाया झटका
सबसे पहले ये तथ्य देखें: ट्रम्प ने चीन से आयातित महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर 100% टैरिफ लगाने का एलान किया है। इस फैसले की खबर जैसे ही बाजारों में फैली, बिटकॉइन 8.4% गिर गया और इथेरियम में भी भारी दबाव देखा गया।
मैं अक्सर कहता हूँ — बाज़ार भावनाओं से चलता है। इस तरह की अचानक नीति चालों से निवेशकों में डर बैठ जाता है, और वह Assets को बेचने लगते हैं।
क्या वजह है यह अचानक कदम?
ट्रम्प का आरोप है कि चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ पृथ्वी खनिज) के निर्यात पर नियंत्रण लगाकर टेक्नोलॉजी और विनिर्माण क्षेत्रों को दबाव में डाल दिया।
यह रणनीति कई अर्थशास्त्रियों के लिए आश्चर्य की बात है — क्या इस तरह का कदम ठीक समय पर उठाया गया, या राजनीतिक रूप से सोचा समझा धमाका?
एक और बात — ट्रम्प ने यह घोषणा सोशल मीडिया (Truth Social) पर की। नीति-निर्माण ऐसी भी हो सकती है कि पहले ट्वीट हो, फिर दिलचस्पी बढ़े। यह तरीका कुछ लोगों को रणनीति, कुछ को सिर्फ शोरपालिका जैसा लगता है।
क्रिप्टो मार्केट पर असर
कह सकते हैं कि क्रिप्टो ऐसे ही Assets नहीं हैं जो केवल तकनीकी कारणों से हिलते हैं — ये मनोवृत्ति, विश्वास, और राजनीतिक फैसलों के प्रति संवेदनशील हैं।
जैसा कि The Block ने रिपोर्ट किया — इस घोषणा के बाद कुल क्रिप्टो मार्केट कैप 9% से अधिक गिर गया। Yahoo Finance के अनुसार लगभग 200 अरब डॉलर का विलोपन हुआ। एक आम उदाहरण ले लीजिए — आपने यदि कल कोई ट्रांज़ैक्शन तय कर लिया हो और आज वही संपत्ति 10-15% सस्ती हो जाए, तो आपके मन में क्या जाएगा? डर, शंका, बेचने का मन।
सवाल उठते हैं
क्या यह घोषणा अचानक की गई और बाजारों को चेतने का मौका नहीं दिया गया?
अगर चीन पलटी तो अमेरिका की यह नीति कितनी टिक पाएगी?
क्या यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुरूप है, या इससे सुरक्षा द्वंद्व बढ़ेगा?
क्रिप्टो तो सिर्फ शुरुआत है — स्टॉक मार्केट, टेक्नोलॉजी शेयर, सेंसेक्स-निफ्टी सब प्रभावित होंगे।
वैकल्पिक नजरियानिष्कर्ष यह नहीं होना चाहिए कि “यह कदम गलत है” या “मंज़ूर है” — बल्कि हमें इसे रणनीतिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए।
हो सकता है कि ट्रम्प का मकसद चीन को निहत्था करना हो, या घरेलू उद्योगों को समर्थन देना हो। लेकिन बाधाएं ये हैं: वैश्विक प्रतिक्रियाएं, नियम-कानून, प्रतिशोध।
क्रिप्टो निवेशक के दृष्टिकोण से, यह समय “शांत रहने और फेरबदल को देख लेने” का है, न कि भावनात्मक बिकवाली का।




