
प्रियंका गांधी ने वीबी-जीरामजी बिल का किया विरोध
लोकसभा में मनरेगा का नाम बदलकर वीबी-जीरामजी करने के प्रस्ताव पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। प्रियंका गांधी वाड्रा और राम गोपाल यादव ने विधेयक का विरोध दर्ज कराया।
📍New Delhi ✍️ Asif Khan
संसद में पेश हुआ नया विधेयक
लोकसभा में केंद्र सरकार की ओर से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलने से जुड़ा विधेयक पेश किया गया। प्रस्ताव के अनुसार इस योजना को अब ‘विकसित भारत जी राम जी’, यानी वीबी-जीरामजी योजना कहा जाएगा। विधेयक के सामने आते ही सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक हलचल तेज हो गई। विपक्षी दलों ने इसे केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि योजना की मूल संरचना से जुड़ा मामला बताया।
मनरेगा की पृष्ठभूमि
मनरेगा देश की प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजनाओं में शामिल है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को साल में सौ दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती है। इस अधिनियम को अधिकार आधारित कानून के रूप में लागू किया गया था, ताकि ग्रामीण स्तर पर आजीविका का सहारा मिल सके। पंचायती राज संस्थाओं को इसमें अहम भूमिका दी गई, जिससे फैसले स्थानीय स्तर पर लिए जा सकें।
प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए इस विधेयक पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार यह तर्क देती रही है कि केंद्र से भेजा गया धन सही जगह तक नहीं पहुंचता। इसी सोच के चलते पहले पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत किया गया था, ताकि गांवों तक सीधे संसाधन पहुंचें। प्रियंका गांधी ने कहा कि पंचायतों को अधिकार देने का मकसद ही यह था कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार फैसले हों।
विकेंद्रीकरण पर सवाल
प्रियंका गांधी ने कहा कि नए विधेयक से विकेंद्रीकरण की भावना कमजोर होने की आशंका है। उनके अनुसार मनरेगा के तहत गरीब से गरीब व्यक्ति को रोजगार का अधिकार दिया गया था। यह अधिकार केवल नाम बदलने से जुड़ा नहीं, बल्कि उसकी संरचना और जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार अब उसी व्यवस्था के उलट कदम उठा रही है, तो भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कैसे कही जा सकती है।
खर्च और प्रशासनिक पहलू
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि योजनाओं के नाम बदलने में सरकारी संसाधनों का उपयोग होता है। इसमें प्रशासनिक खर्च और प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। उन्होंने कहा कि हर योजना का नाम बदलने की प्रवृत्ति समझ से परे है। उनके मुताबिक नए नाम से योजना की मूल भावना और अधिकार आधारित ढांचे पर असर पड़ सकता है।
‘जिम्मेदारी से बचने’ का आरोप
प्रियंका गांधी ने विधेयक को लेकर यह भी कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में जवाबदेही तय करना जरूरी है। अगर जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होगी, तो योजना का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचने में दिक्कतें आ सकती हैं।
समाजवादी पार्टी का रुख
समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनके विचार में इस तरह के नए विधेयक की कोई आवश्यकता नहीं है। राम गोपाल यादव ने कहा कि मनरेगा पहले से ही एक स्थापित योजना है और उसमें नाम परिवर्तन से कोई नया लाभ नहीं जुड़ता।
गांधी से जुड़ा संदर्भ
राम गोपाल यादव ने अपने बयान में कहा कि इस विधेयक में नया कुछ नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर गांधी के नाम से इतनी असहमति है, तो फिर इस योजना का नाम बदलने की जरूरत क्यों महसूस की गई। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भले ही बहुमत के आधार पर विधेयक को पारित करा ले, लेकिन इससे योजना की वास्तविक जरूरतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
राजनीतिक बहस तेज
विधेयक के सामने आने के बाद से संसद और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज है। विपक्ष का कहना है कि यह कदम ग्रामीण रोजगार योजना की मूल भावना से जुड़ा है, जबकि सरकार का पक्ष विधेयक पर चर्चा के दौरान सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल इस मुद्दे पर सदन में आगे की कार्यवाही पर सभी की नजर बनी हुई है।




