
Renowned qawwal Akram Sabri from Muzaffarnagar – Shah Times
कव्वाली की दुनिया का बड़ा नाम मुजफ्फरनगर के प्रसिद्ध कव्वाल अकरम साबरी नहीं रहे
मुजफ्फरनगर के प्रसिद्ध कव्वाल अकरम साबरी का सोमवार रात निधन हो गया। दिल में तेज दर्द के बाद अस्पताल ले जाते समय उन्होंने दम तोड़ा।
📍 Muzaffarnagar ✍️ Israr Khan
अचानक तबीयत बिगड़ने की सूचना
मुजफ्फरनगर के मशहूर कव्वाल अकरम साबरी का सोमवार की रात अचानक निधन हो गया। परिजनों के अनुसार, रात के समय उनके सीने में तेज दर्द उठा, जिसके बाद घर में अफरा-तफरी मच गई। उन्हें तुरंत मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद हालत को गंभीर बताया और बेहतर इलाज के लिए बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
अस्पताल पहुंचने से पहले इंतकाल
परिजन उन्हें एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी तबीयत और बिगड़ गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही अकरम साबरी का इंतकाल हो गया। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर के मिलते ही परिवार में मातम छा गया और उनके चाहने वालों में शोक की लहर फैल गई।
मंगलवार को सुपुर्द-ए-ख़ाक
मंगलवार शाम करीब पांच बजे अकरम साबरी को लद्धावाला कब्रिस्तान में गमगीन माहौल के बीच सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। जनाज़े में बड़ी संख्या में परिजन, रिश्तेदार, पड़ोसी, कला प्रेमी और शागिर्द शामिल हुए। नम आंखों से लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे इलाके में सन्नाटा और उदासी का माहौल रहा।
अकरम–असलम साबरी ब्रदर्स से पहचान
अकरम साबरी मशहूर कव्वाल जोड़ी “अकरम–असलम साबरी ब्रदर्स” का अहम हिस्सा रहे हैं। उनके बड़े भाई असलम साबरी का निधन कई वर्ष पहले हो चुका था। इसके बावजूद अकरम साबरी ने कव्वाली की परंपरा को आगे बढ़ाया और अपनी बुलंद आवाज़ व खास अंदाज़ से अलग पहचान बनाई।
लंबा और सक्रिय संगीत सफर
अकरम साबरी का संगीत सफर कई दशकों में फैला रहा। उन्होंने देश के अलग-अलग शहरों के साथ-साथ विदेशों में भी कव्वाली पेश की। उनके कार्यक्रमों में सूफियाना कलाम, मोहब्बत, भाईचारा और इंसानियत का पैग़ाम प्रमुख रूप से सुनाई देता था। मंच पर उनकी मौजूदगी और गायकी श्रोताओं को बांधे रखती थी।
मुजफ्फरनगर को दिलाई पहचान
कव्वाली के ज़रिए अकरम साबरी ने मुजफ्फरनगर का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने शहर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया। कई युवा कलाकारों को उन्होंने मंच दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कला जगत में शोक की लहर
अकरम साबरी के निधन की खबर फैलते ही संगीत और कला जगत से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया। स्थानीय कलाकारों, आयोजकों और प्रशंसकों ने उनके योगदान को याद किया। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें श्रद्धांजलि देते नजर आए और उनके पुराने कार्यक्रमों की यादें साझा की गईं।
परिवार और चाहने वालों का बयान
परिवार के सदस्यों ने बताया कि अकरम साबरी आखिरी समय तक संगीत से जुड़े रहे। वे आने वाले कार्यक्रमों की तैयारी में भी लगे थे। उनके अचानक चले जाने से परिवार को गहरा सदमा पहुंचा है। चाहने वालों ने कहा कि उनकी आवाज़ और उनका फन हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।
विरासत और यादें
अकरम साबरी की कव्वालियां आज भी महफिलों और रिकॉर्डिंग्स के ज़रिए सुनी जाती रहेंगी। उनकी गायकी में सूफियाना रंग और सादगी का मेल था, जिसने हर उम्र के श्रोताओं को जोड़ा। मुजफ्फरनगर ने एक ऐसी आवाज़ खो दी है, जिसने शहर की पहचान को नई ऊंचाई दी।





