
न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में ऐतिहासिक बदलाव, निजी भागीदारी का रास्ता साफ
लोकसभा ने SHANTI बिल को ध्वनिमत से मंजूरी दी।
इस कानून से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी का मार्ग खुला।
📍New Delhi ✍️ Asif Khan
लोकसभा में अहम विधेयक पारित
भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव सामने आया है। लोकसभा में बुधवार को नागरिक न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिया गया। ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’, जिसे संक्षेप में SHANTI बिल कहा गया है, को ध्वनिमत से मंजूरी मिली। सदन में विपक्षी दलों के वॉकआउट के बीच यह विधेयक पारित हुआ।
63 साल पुराने ढांचे में बदलाव
इस कानून के जरिए देश में करीब 63 साल से चले आ रहे परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के राज्य एकाधिकार को बदला गया है। अब इस सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी का रास्ता खुल गया है। अब तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन और उससे जुड़ी गतिविधियां मुख्य रूप से सरकारी नियंत्रण में रही हैं। नए कानून के तहत प्राइवेट सेक्टर को निर्धारित शर्तों के साथ हिस्सेदारी की अनुमति दी जाएगी।
सरकार का पक्ष और लक्ष्य
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह कानून भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने सदन में कहा कि सरकार का उद्देश्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता हासिल करना है। उनके अनुसार यह लक्ष्य देश की बढ़ती ऊर्जा मांग और क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन को ध्यान में रखकर तय किया गया है।
वैश्विक मानकों की बात
सरकार ने बताया कि पूरी दुनिया स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है। भारत भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। मंत्री ने कहा कि यदि देश को एक प्रभावी वैश्विक शक्ति के रूप में आगे बढ़ना है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों और रणनीतियों के अनुरूप अपनी ऊर्जा नीतियों को विकसित करना होगा। SHANTI बिल को इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया।
SHANTI बिल का मकसद
सरकार के अनुसार, SHANTI बिल का अहम मकसद परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना भी इसका अहम लक्ष्य है। अब तक सीमित निवेश और लंबी प्रक्रियाओं के कारण कई परियोजनाओं की गति धीमी रही। नए कानून से प्रोजेक्ट्स के कार्यान्वयन में तेजी आने की उम्मीद जताई गई है।
निवेश और तकनीक पर जोर
सरकारी पक्ष का कहना है कि प्राइवेट प्लेयर्स की एंट्री से तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। नई टेक्नोलॉजी, आधुनिक सुरक्षा सिस्टम और बेहतर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के जरिए परमाणु ऊर्जा उत्पादन की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। सरकार ने यह भी कहा कि इससे देश को क्लीन एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
विपक्ष का कड़ा विरोध
हालांकि इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने सदन में कड़ा विरोध दर्ज कराया। विपक्षी दलों का कहना है कि SHANTI बिल से न्यूक्लियर डैमेज के लिए सिविल दायित्व अधिनियम 2010 के प्रावधान कमजोर हो सकते हैं। उनका आरोप है कि मौजूदा कानून के तहत परमाणु दुर्घटना की स्थिति में उपकरण आपूर्तिकर्ताओं पर जिम्मेदारी तय की जाती है, लेकिन नए ढांचे में यह जिम्मेदारी कम हो सकती है।
सुरक्षा और जवाबदेही पर सवाल
विपक्ष ने यह आशंका भी जताई कि प्राइवेट कंपनियों को परमाणु क्षेत्र में प्रवेश देने से सुरक्षा मानकों और जवाबदेही पर असर पड़ सकता है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि किसी भी परमाणु दुर्घटना की स्थिति में आम नागरिकों की सुरक्षा और मुआवजे के अधिकार सर्वोपरि होने चाहिए। इसी मुद्दे पर विरोध जताते हुए विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया।
सरकार का जवाब
सरकार ने विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज किया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और जवाबदेही से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी परमाणु परियोजनाएं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित होंगी और रेगुलेटरी व्यवस्था पहले की तरह प्रभावी बनी रहेगी।
ऊर्जा जरूरतों पर फोकस
सरकार का कहना है कि SHANTI बिल भारत की ऊर्जा जरूरतों, जलवायु प्रतिबद्धताओं और आर्थिक विकास के लिए जरूरी है। बढ़ती आबादी, औद्योगिक विस्तार और शहरीकरण के चलते ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। परमाणु ऊर्जा को सरकार एक स्थिर और स्वच्छ विकल्प के रूप में देख रही है।
आगे की प्रक्रिया
बिल के पारित होने के बाद अब इसके नियम और दिशानिर्देश तय किए जाएंगे। संबंधित मंत्रालय और नियामक संस्थाएं प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी से जुड़े मानक, सुरक्षा शर्तें और जवाबदेही के प्रावधान तय करेंगी। सरकार ने कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।







