
Sonia Gandhi addressing media on MGNREGA issue | Shah Times
सोनिया गांधी बोलीं, मनरेगा से ग्रामीण गरीबों को मिला था हक़
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि यह कानून आम सहमति से बना था और इससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों को कानूनी रोजगार मिला।
📍New Delhi ✍️ Asif Khan
मनरेगा को लेकर संसद के बाहर बयान
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह कानून बीस वर्ष पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में संसद की आम सहमति से पारित हुआ था। उनके अनुसार यह कानून ग्रामीण गरीबों, मज़दूरों और वंचित तबकों के लिए एक ऐतिहासिक कदम था, जिसने रोजगार को कानूनी अधिकार का रूप दिया।
ग्रामीण परिवारों को मिला रोज़गार का अधिकार
सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा ने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को रोज़गार उपलब्ध कराया। उन्होंने बताया कि इस योजना से गरीब, अतिगरीब और हाशिये पर रहने वाले लोगों को नियमित काम मिला। उनके अनुसार यह कानून सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं था, बल्कि यह ग्रामीण जनता के लिए सम्मान और अधिकार का प्रतीक बना।
पलायन रोकने में योजना की भूमिका
अपने बयान में सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा की वजह से गांवों से शहरों की ओर होने वाला पलायन कम हुआ। उन्होंने कहा कि जब लोगों को अपने गांव में काम मिला, तो उन्हें मजबूरी में शहरों की तरफ जाने की जरूरत नहीं पड़ी। इससे परिवार एक साथ रहे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिला।
ग्राम पंचायतों को मिली मजबूती
सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा ने ग्राम पंचायतों को मजबूत किया। उनके अनुसार स्थानीय स्तर पर काम की योजना बनाना, निगरानी करना और रोजगार उपलब्ध कराना पंचायतों की भूमिका को बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि इससे महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के विचार को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
पिछले 11 वर्षों में योजना कमजोर करने का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने मनरेगा को लगातार कमजोर किया। उन्होंने कहा कि बजट आवंटन, भुगतान में देरी और नियमों में बदलाव से योजना का प्रभाव कम हुआ। उनके अनुसार यह बदलाव बिना व्यापक चर्चा और सहमति के किए गए।
कोविड समय में मनरेगा की अहमियत
सोनिया गांधी ने कहा कि कोविड महामारी के कठिन दौर में मनरेगा गरीबों के लिए संजीवनी साबित हुई। उन्होंने बताया कि जब बड़े पैमाने पर रोजगार छिन गया था, तब इस योजना ने ग्रामीण इलाकों में लोगों को काम और आय दी। उन्होंने कहा कि उस समय इस योजना की जरूरत और भी बढ़ गई थी।
हालिया बदलावों पर सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के समय में मनरेगा के स्वरूप में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिन पर न तो संसद में पर्याप्त चर्चा हुई और न ही विपक्ष को विश्वास में लिया गया। उन्होंने कहा कि योजना के नाम और संरचना में बदलाव ने इसके मूल उद्देश्य को कमजोर किया है।
केंद्र से तय होगा रोजगार, जमीन से दूरी का आरोप
सोनिया गांधी ने कहा कि अब रोजगार से जुड़े फैसले दिल्ली में बैठकर तय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे जमीनी हकीकत की अनदेखी होगी। उनके अनुसार गांव की जरूरतें और परिस्थितियां स्थानीय स्तर पर बेहतर समझी जा सकती हैं, न कि केंद्रीय दफ्तरों से।
किसानों और मजदूरों पर असर
उन्होंने कहा कि मनरेगा को कमजोर करने से किसानों, मजदूरों और भूमिहीन ग्रामीण गरीबों पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि देश के हित में बनाई गई थी। उनके अनुसार इसे कमजोर करना करोड़ों लोगों के अधिकारों पर असर डालता है।
कांग्रेस की प्रतिबद्धता का बयान
सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे बीस साल पहले रोजगार के अधिकार के लिए संघर्ष किया गया था, वैसे ही आज भी मनरेगा को बचाने के लिए पार्टी प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता इस मुद्दे पर जनता के साथ खड़े हैं।
राजनीतिक बयान के बाद प्रतिक्रिया का इंतजार
सोनिया गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।





