
2026 में Sensex-Nifty का रुख, निवेशकों की नजर आगे
साल 2026 से पहले भारतीय शेयर बाजार एक अहम पड़ाव पर है। निफ्टी और सेंसेक्स के आंकड़े, महंगाई, RBI नीति और GDP ग्रोथ निवेशकों के लिए प्रमुख संकेत बने हुए हैं।
📍Mumbai ✍️ Asif Khan
साल 2026 नजदीक आते ही भारतीय शेयर बाजार एक अहम मोड़ पर खड़ा है। बीते साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में मार्केट परफॉर्मेंस मिला-जुला रहा है। निफ्टी 50 ने एक दिसंबर को 26,326 का रिकॉर्ड हाई छुआ। सालाना आधार पर निफ्टी में करीब 10.2 फीसद की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, सेंसेक्स ने पिछले एक साल में लगभग 8 फीसद का गेन दिखाया।
मार्केट में ये मूवमेंट घरेलू और ग्लोबल फैक्टर्स के मेल का नतीजा रहा। ट्रेडिंग सेशन के दौरान volatility बनी रही, लेकिन लंबी अवधि में इंडेक्स ने अपनी पकड़ बनाए रखी।
महंगाई का ट्रेंड और मौद्रिक नीति
अक्टूबर 2025 में महंगाई रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद नवंबर में इसमें हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके बावजूद inflation भारतीय रिजर्व बैंक के 4 फीसद के टारगेट से नीचे बनी हुई है। यही वजह है कि आने वाले महीनों में monetary policy को लेकर नरमी की गुंजाइश बनी हुई है।
RBI ने पिछले हफ्ते repo rate में 25 basis point की कटौती की। साथ ही संकेत दिया कि महंगाई के कंट्रोल में रहने की स्थिति में policy stance को और supportive बनाया जा सकता है। अनुमान है कि जनवरी से inflation में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। मार्च में खत्म होने वाली तिमाही के दौरान CPI औसतन 2.9 फीसद रहने का अनुमान सामने आया है।
कॉरपोरेट कमाई और अर्निंग आउटलुक
ब्रोकरेज फर्म के analyst के मुताबिक, corporate earnings इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। आंकड़ों से growth में संभावित उछाल के संकेत मिलते हैं। अनुमान है कि FY26-27 के दौरान कमाई सालाना आधार पर 12 से 15 फीसद तक बढ़ सकती है।
कई sectors में demand recovery और cost pressure में कमी के चलते earnings visibility बेहतर हुई है। इससे market sentiment को सपोर्ट मिलता दिख रहा है।
GDP ग्रोथ का अनुमान
GDP growth को लेकर भी outlook मजबूत बना हुआ है। फर्म के अनुसार, 2026 में भारत की विकास गति स्थिर और मजबूत रहने की संभावना है। H1FY27 के लिए GDP growth forecast को पहले के 6.4 फीसद से बढ़ाकर 6.7 से 6.8 फीसद किया गया है।
RBI ने भी दूसरी तिमाही के मजबूत प्रदर्शन के बाद FY25-26 के लिए अपने GDP growth estimate को 6.8 फीसद से बढ़ाकर 7.3 फीसद कर दिया है। ये बढ़ोतरी लगातार घरेलू मांग, policy reforms और supportive macroeconomic conditions को दर्शाती है।
करेंसी में उतार-चढ़ाव
FII flows और भारत-अमेरिका व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच रुपये में तेज गिरावट देखी गई। हाल के सत्रों में रुपया अहम 90 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे फिसलता नजर आया।
Currency volatility का सीधा असर import cost, inflation outlook और विदेशी निवेशकों की रणनीति पर पड़ता है। बाजार के लिए ये एक अहम factor बना हुआ है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता
भारतीय exports पर अमेरिका की ओर से लगाए गए बढ़े हुए tariff निवेशकों की भावना को प्रभावित कर रहे हैं। Export-based sectors के future outlook पर भी इसका असर दिख रहा है।
Market participants का मानना है कि इन duties में किसी भी तरह की कमी या आंशिक छूट एक मजबूत positive trigger साबित हो सकती है। इससे FII confidence बढ़ेगा और export-oriented industries को support मिलेगा।
2026 में शेयर बाजार का आउटलुक
InCred Wealth के CEO नितिन राव के अनुसार, market narrative अब cautious रहने से धीरे-धीरे cautiously positive होने की ओर बढ़ रही है। उनका कहना है कि आने वाले साल में valuation-based investment returns से हटकर earnings growth-driven returns की ओर शिफ्ट देखने को मिल सकता है।
2026 में investors का फोकस macro stability, earnings visibility और policy support पर बना रह सकता है। Market का overall outlook इन फैक्टर्स के संतुलन पर निर्भर करेगा।
निवेशकों की नजर आगे
साल 2026 की ओर बढ़ते हुए निवेशक data-driven approach अपनाते नजर आ रहे हैं। Sensex और Nifty के हालिया ट्रेंड, RBI की नीति, inflation path और global cues मिलकर आने वाले समय की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल बाजार में सतर्कता के साथ स्थिरता देखने को मिल रही है, जो नए साल में भी जारी रहने की संभावना है।




