
Israel recognizes Somaliland amid global reactions, Shah Times
हॉर्न ऑफ अफ्रीका में नया विवाद, इजराइल के कदम पर हंगामा
इजराइल ने 26 दिसंबर को सोमालीलैंड को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी।इस कदम के खिलाफ 21 देशों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने साझा बयान जारी किया।
📍New Delhi ✍️ Asif Khan
इजराइल ने 26 दिसंबर को सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश के रूप में आधिकारिक मान्यता देने की घोषणा की। यह फैसला इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही के बीच हुई संयुक्त घोषणा के बाद सार्वजनिक किया गया। इस घोषणा के साथ ही इजराइल ऐसा करने वाला पहला देश बन गया है, जिसने सोमालीलैंड को औपचारिक मान्यता दी है।
इजराइली सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह कदम द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने की दिशा में उठाया गया है। बयान में यह भी कहा गया कि इजराइल हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहित करना चाहता है।
सोमालीलैंड की प्रतिक्रिया
सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह मान्यता लंबे समय से चल रही अंतरराष्ट्रीय मान्यता की कोशिशों में एक अहम उपलब्धि है। राष्ट्रपति के अनुसार, यह फैसला मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में पीस, डेवलपमेंट और प्रॉस्पेरिटी को बढ़ावा दे सकता है।
सोमालीलैंड की राजधानी और अन्य शहरों में इस घोषणा के बाद लोग सड़कों पर उतरे। सार्वजनिक स्थानों पर सोमालीलैंड के झंडे लहराए गए और जश्न के दृश्य देखे गए। स्थानीय प्रशासन ने कहा कि यह उत्सव शांतिपूर्ण रहा।
21 देशों का साझा विरोध
इजराइल के इस फैसले के बाद मुस्लिम देशों में नाराजगी बढ़ती दिखी। जॉर्डन, मिस्र, अल्जीरिया, कोमोरोस, जिबूती, गाम्बिया, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया, मालदीव, नाइजीरिया, ओमान, पाकिस्तान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, सूडान, तुर्किये और यमन सहित कुल 21 देशों ने साझा बयान जारी कर विरोध दर्ज कराया।
साझा बयान में कहा गया कि सोमालिया रिपब्लिक के सोमालीलैंड क्षेत्र को किसी भी तरह की मान्यता देना अस्वीकार्य है। बयान में यह भी कहा गया कि इस तरह का कदम हॉर्न ऑफ अफ्रीका, रेड सी और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
पांच प्वाइंट में आपत्ति
ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन की ओर से जारी बयान में पांच प्वाइंट में आपत्तियां दर्ज कराई गईं।
पहले प्वाइंट में कहा गया कि सोमालीलैंड को मान्यता देना इंटरनेशनल लॉ की अवहेलना है।
दूसरे प्वाइंट में इसे यूनाइटेड नेशंस चार्टर के उसूलों का उल्लंघन बताया गया, जिसमें राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।
तीसरे प्वाइंट में सोमालिया रिपब्लिक की संप्रभुता और एकता के प्रति पूरा समर्थन जताया गया।
चौथे प्वाइंट में कहा गया कि किसी देश के हिस्से को अलग मान्यता देना इंटरनेशनल पीस और सिक्योरिटी के लिए गंभीर खतरा है।
पांचवें प्वाइंट में इजराइल के अन्य कदमों और फिलिस्तीनी लोगों से जुड़ी कार्रवाइयों का भी उल्लेख करते हुए आपत्ति जताई गई।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों की प्रतिक्रिया
इजराइल के फैसले पर अरब लीग, खाड़ी सहयोग परिषद, अफ्रीकी संघ और इस्लामिक सहयोग संगठन ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष महमूद अली यूसुफ ने कहा कि सोमालीलैंड सोमालिया का अभिन्न हिस्सा है और किसी भी तरह की मान्यता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हो सकती है।
अरब लीग के महासचिव अहमद अबूल गीत ने इसे राज्यों की एकता के सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन बताया। खाड़ी सहयोग परिषद ने कहा कि यह कदम रीजनल स्टेबिलिटी को कमजोर कर सकता है। ओआईसी ने मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों के साथ संयुक्त बयान जारी कर सोमालिया की संप्रभुता का समर्थन दोहराया।
सोमालिया सरकार का रुख
सोमालिया की संघीय सरकार ने इजराइल के फैसले को अपनी संप्रभुता पर जानबूझकर किया गया हमला बताया। सरकार की ओर से कहा गया कि यह कदम क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है और इससे हॉर्न ऑफ अफ्रीका में अस्थिरता बढ़ सकती है।
सोमालिया ने इजराइल से मांग की है कि वह इस मान्यता को तुरंत वापस ले। मोगादिशु से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि सोमालिया अपनी क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।
यूरोपीय संघ और अन्य प्रतिक्रियाएं
यूरोपीय संघ ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। ईयू की ओर से कहा गया कि वह सोमालिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करता है। बयान में सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समाधान तलाशने की अपील की गई।
सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय संदर्भ
इस घटनाक्रम के बीच सोमालिया में सुरक्षा स्थिति को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। मोगादिशु से करीब 18 किलोमीटर दूर लाफोफे क्षेत्र में अल-शबाब के सैकड़ों लड़ाकों के सैन्य अभ्यास की खबरें सामने आई हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, क्षेत्र में पहले से मौजूद अस्थिरता के बीच यह घटनाक्रम नई चुनौतियां पैदा कर सकता है।
अमेरिका की टिप्पणी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस मुद्दे पर संक्षिप्त टिप्पणी की। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, जब उनसे सोमालीलैंड को मान्यता देने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से लोग अभी भी यह नहीं जानते कि सोमालीलैंड क्या है।
सोमालीलैंड और सोमालिया का पुराना विवाद
सोमालीलैंड और सोमालिया के बीच विवाद नया नहीं है। सोमालीलैंड, जो सोमालिया के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित है, ने 1991 में खुद को स्वतंत्र गणराज्य घोषित किया था। तब से यह क्षेत्र अलग प्रशासन, अपनी सरकार और सुरक्षा व्यवस्था के साथ काम कर रहा है।
हालांकि, सोमालिया इसे अपना अभिन्न अंग मानता है और किसी भी तरह के अलगाव को स्वीकार नहीं करता। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के अधिकांश देशों ने अब तक सोमालीलैंड को मान्यता नहीं दी थी, हालांकि इसे क्षेत्र में अपेक्षाकृत स्थिर माना जाता रहा है।
आगे की स्थिति
इजराइल की मान्यता के बाद यह मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बन गया है। कई देशों और संगठनों की प्रतिक्रियाओं से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में इस फैसले पर कूटनीतिक बातचीत और बयानबाजी जारी रह सकती है।





