
ईडी बनाम ममता बनर्जी: आई-पैक रेड पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, बंगाल सरकार तलब
कोलकाता स्थित आई-पैक दफ्तर पर ईडी की रेड के बाद दर्ज एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।
शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
📍 Kolkata ✍️ Asif Khan
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित राजनीतिक रणनीतिकार संस्था आई-पैक के कार्यालय पर हुई प्रवर्तन निदेशालय की रेड अब सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंच गई है। यह मामला उस समय विवाद में बदल गया जब रेड के बाद ईडी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर ली गई। ईडी का कहना है कि राज्य पुलिस और प्रशासन ने जांच में दखल दिया, जबकि राज्य सरकार इन आरोपों को खारिज कर रही है।
यह केस अब एक हाई प्रोफाइल कानूनी टकराव का रूप ले चुका है, जिसमें एक तरफ केंद्रीय जांच एजेंसी है और दूसरी ओर राज्य सरकार तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी।
सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस पीके मिश्रा कर रहे हैं, ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि किसी भी केंद्रीय एजेंसी की वैधानिक जांच में बाधा नहीं डाली जा सकती।
कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि एफआईआर किस आधार पर दर्ज की गई और रेड के दौरान किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया गया।
इसके साथ ही अदालत ने निर्देश दिया है कि रेड से जुड़ी सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल स्टोरेज डिवाइस सुरक्षित रखे जाएं ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी जांच की जा सके।
ईडी का पक्ष अदालत में
ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अन्य वरिष्ठ कानून अधिकारी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। ईडी का कहना है कि आई-पैक के दफ्तर पर की गई तलाशी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत हो रही थी।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंचीं और राज्य पुलिस की मौजूदगी में ईडी अधिकारियों के लैपटॉप, मोबाइल फोन और कुछ दस्तावेज अपने साथ ले गईं। ईडी ने इसे जांच में बाधा और सबूतों से छेड़छाड़ बताया।
ईडी ने यह भी दावा किया कि कोलकाता के पुलिस कमिश्नर और राज्य के डीजीपी मौके पर मौजूद थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि राज्य मशीनरी जांच में हस्तक्षेप कर रही थी।
निलंबन और सीबीआई जांच की मांग
ईडी ने अपनी याचिका में पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर सहित तीन वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की है। एजेंसी ने कहा कि जब तक ये अधिकारी अपने पद पर हैं, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
ईडी ने यह भी आग्रह किया कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए ताकि किसी भी प्रकार की स्थानीय दबाव या हस्तक्षेप से बचा जा सके।
ममता सरकार की दलील
पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने ईडी के आरोपों को खारिज किया।
उन्होंने अदालत को बताया कि आई-पैक दफ्तर में केवल चुनाव से जुड़ा गोपनीय डेटा मौजूद था, जिसका मनी लॉन्ड्रिंग या किसी वित्तीय जांच से कोई संबंध नहीं है।
सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री जेड-कैटेगरी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति हैं, इसलिए उनके साथ पुलिस अधिकारियों का होना स्वाभाविक है। उनके अनुसार ममता बनर्जी कुछ ही मिनटों के लिए वहां गई थीं और कोई भी आधिकारिक दस्तावेज या सबूत जब्त नहीं किया गया।
पंचनामा और जब्ती का सवाल
राज्य सरकार के वकीलों ने यह भी कहा कि ईडी के पंचनामा में किसी भी जब्ती का उल्लेख नहीं है। उनका तर्क है कि यदि कोई फाइल या डिवाइस ली गई होती, तो उसका रिकॉर्ड आधिकारिक दस्तावेजों में जरूर होता।
इस आधार पर सरकार ने कहा कि ईडी के आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाते।
हाई कोर्ट में हुई सुनवाई का जिक्र
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि कलकत्ता हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान अव्यवस्था पैदा हुई। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि बड़ी संख्या में वकील अदालत कक्ष में एकत्र हो गए और सुनवाई प्रभावित हुई।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मुद्दे पर भी नोटिस जारी करेगा और हाई कोर्ट में हुए घटनाक्रम की समीक्षा करेगा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा की पीठ ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है क्योंकि इसमें केंद्रीय एजेंसी की कार्यवाही और राज्य सरकार की भूमिका दोनों सवालों के घेरे में हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी पक्ष के दावों पर अंतिम निष्कर्ष बाद में निकालेगी, लेकिन फिलहाल स्थिति को यथास्थिति में बनाए रखना जरूरी है।
डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से यह निर्देश दिया कि रेड के दौरान रिकॉर्ड की गई सभी वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखा जाए। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में तथ्यों की जांच निष्पक्ष रूप से की जा सके।
मामले की अगली सुनवाई
इस केस की अगली सुनवाई की तारीख बाद में तय की जाएगी। तब तक ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर पर रोक जारी रहेगी और राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा।






