
मुफ़्ती शमून क़ासमी का मुज़फ्फरनगर दौरा,सामाजिक सद्भाव और मदरसा आधुनिकीकरण पर बातचीत
उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ़्ती शमून क़ासमी मुज़फ्फरनगर पहुंचे। शिक्षा, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता पर विस्तृत चर्चा हुई।
📍 Muzaffarnagar ✍️ Israr Khan
मुज़फ्फरनगर जनपद के मिमलाना रोड क्षेत्र में उस समय विशेष गतिविधि देखी गई, जब गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष और राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त मुफ़्ती शमून क़ासमी का आगमन हुआ। वह समाजसेवी मास्टर इसरार ख़ान के अमन जुनियर हाई स्कूल पर पहुंचे, जहां स्थानीय गणमान्य नागरिकों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। यह भेंट औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि शिक्षा, समाज और राष्ट्र से जुड़े कई अहम विषयों पर केंद्रित रही।
शिक्षा को लेकर विस्तृत बातचीत
बैठक के दौरान मुफ़्ती शमून क़ासमी ने तालीम को समाज की बुनियाद बताते हुए कहा कि किसी भी समुदाय की तरक्क़ी शिक्षा से जुड़ी होती है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि सोच, समझ और सामाजिक जिम्मेदारी का माध्यम भी है। उनके अनुसार, वर्तमान समय में शिक्षा का दायरा बढ़ा है और इसे आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढालना आवश्यक है।
मदरसा शिक्षा के आधुनिकीकरण पर ज़ोर
मुफ़्ती शमून क़ासमी ने उत्तराखंड सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए बताया कि मदरसा शिक्षा को मेनस्ट्रीम एजुकेशन से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक विषयों, टेक्नोलॉजी और स्किल डेवलपमेंट को मदरसों से जोड़ने का उद्देश्य छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना है।


उन्होंने यह भी बताया कि बोर्ड स्तर पर सिलेबस रिव्यू, टीचर ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार जैसे कदम उठाए गए हैं, ताकि मदरसा शिक्षा समय के अनुरूप बने।
अल्पसंख्यक समाज और शैक्षिक उन्नति
संवाद के दौरान अल्पसंख्यक समाज की शिक्षा पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुफ़्ती शमून क़ासमी ने कहा कि बीते वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने इसे स्कॉलरशिप योजनाओं, स्किल प्रोग्राम और स्वरोज़गार पहलों से जोड़ा।
उनका कहना था कि शिक्षा के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण भी समाज को मज़बूत करता है। पढ़ाई के बाद मिलने वाले अवसर, ट्रेनिंग और रोजगार योजनाएं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती हैं।
अख़लाक़ और सामाजिक जिम्मेदारी
बैठक में अख़लाक़ का विषय भी प्रमुख रहा। मुफ़्ती शमून क़ासमी ने कहा कि शिक्षा के साथ अच्छे आचरण की अहमियत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, समाज की पहचान उसके व्यवहार से होती है और वही राष्ट्र की छवि को भी मज़बूत बनाती है।
उन्होंने कहा कि आपसी सम्मान, ईमानदारी और जिम्मेदारी ऐसे मूल्य हैं, जो किसी भी समाज को स्थिरता देते हैं।
राष्ट्रीय एकता और सद्भाव पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान देश की साझा संस्कृति और सामाजिक सद्भाव पर भी बातचीत हुई। मुफ़्ती शमून क़ासमी ने कहा कि भारत एक ऐसा मुल्क है, जहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग साथ रहते हैं। उन्होंने आपसी भाईचारे और शांति को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
उनका कहना था कि संवाद और समझदारी से ही समाज में सकारात्मक माहौल बनता है और किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर किया जा सकता है।
सरकारी योजनाओं की जानकारी
बैठक में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का भी उल्लेख हुआ। इसमें शैक्षिक स्कॉलरशिप, स्किल डेवलपमेंट, स्वरोज़गार और मदरसा आधुनिकीकरण से जुड़ी योजनाएं शामिल रहीं। मुफ़्ती शमून क़ासमी ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक अवसर पहुंचाना है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे उपलब्ध योजनाओं की जानकारी लें और पात्रता के अनुसार लाभ प्राप्त करें।
स्थानीय समाजसेवियों की उपस्थिति
इस अवसर पर मुज़फ्फरनगर से कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। इनमें सद्भावना मंच सेक्युलर फ्रंट के संयोजक गौहर सिद्दीकी, डॉ. शाहवेज़ राव, हाजी अरशद, डॉ. फुरक़ान मलिक, डॉ. आसिफ, मास्टर इमरान, मास्टर इसरार ख़ान और डॉ. वसीम शामिल रहे।
सभी ने शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के विषयों पर अपने विचार साझा किए।
संवाद का समापन और सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने शिक्षा और सद्भाव के लिए मिलकर काम करने की बात कही। यह सहमति बनी कि समाज के विकास के लिए शिक्षा, अख़लाक़ और आपसी सहयोग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बैठक शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई और इसे स्थानीय स्तर पर एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा गया।
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