
यूनियन बजट 2026: 1 फरवरी को संसद में 9वीं बार पेश करेंगी वित्त मंत्री
संसद में यूनियन बजट 2026, आम आदमी से इंडस्ट्री तक उम्मीदें
केंद्रीय बजट 2026 एक फरवरी को संसद में पेश होगा। टैक्स, हेल्थ, हाउसिंग, एविएशन और ट्रैवल जैसे सेक्टरों से जुड़ी मांगें सामने हैं। बजट से जुड़ी जानकारी मोबाइल ऐप पर उपलब्ध होगी।
📍 New Delhi ✍️ Asif Khan
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रिकॉर्ड 9वीं बार बजट पेश करेंगी। विभिन्न सेक्टरों ने राहत और सुधार की उम्मीदें जताई हैं। आर्थिक सर्वेक्षण में वृद्धि दर और राजस्व आंकड़े सामने आए हैं।
संसद में बजट पेशी की तैयारी
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को सुबह 11 बजे संसद में यूनियन बजट 2026 पेश करेंगी। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा। बजट पेशी से पहले संसद और मंत्रालयों में तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। बजट दस्तावेज आम लोगों तक यूनियन बजट मोबाइल ऐप के ज़रिये उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे नागरिक सीधे जानकारी हासिल कर सकेंगे।
टैक्स को लेकर सैलरीड क्लास की तवक़्क़ो
सैलरीड क्लास इस बजट से इनकम टैक्स में राहत की उम्मीद लगाए बैठा है। बीते वर्षों में टैक्स स्लैब और छूट से जुड़े कुछ बदलाव हुए थे। अब फिर से टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाने और टैक्स बोझ कम करने की मांग सामने है। टैक्स नियमों में साफ़गुई और कंप्लायंस आसान करने की बात भी उठाई जा रही है।
हेल्थ सेक्टर की मांगें
हेल्थ सेक्टर से जुड़े इदारों ने बजट 2026 में इलाज सस्ता करने के कदमों की मांग की है। डिजिटल टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने, मेडिकल इक्विपमेंट पर टैक्स कम करने और हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने की अपील की गई है। GEM हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. पी. सेंथिलनाथन के मुताबिक लंबी अवधि की योजना से आम लोगों को राहत मिल सकती है।
सस्ते इलाज पर फोकस की उम्मीद
सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि मेडिकल खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार से उम्मीद है कि दवाओं, डायग्नोस्टिक और इलाज से जुड़े खर्च पर राहत दी जाए। हेल्थकेयर को मज़बूत बनाने के लिए पब्लिक और प्राइवेट दोनों स्तर पर सहयोग की ज़रूरत बताई जा रही है।
ट्रैवल इंडस्ट्री और विदेशी यात्रा
ट्रैवल इंडस्ट्री ने बजट में टैक्स कलेक्शन एट सोर्स यानी टीसीएस नियमों को आसान बनाने की मांग की है। खासकर विदेशी यात्रा और क्रूज बुकिंग से जुड़े टैक्स नियमों में राहत की बात कही जा रही है। इंडस्ट्री का मानना है कि इससे यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा और बुकिंग में इज़ाफ़ा होगा।
एविएशन सेक्टर की प्रमुख मांग
एविएशन इंडस्ट्री लंबे समय से एविएशन टर्बाइन फ्यूल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग कर रही है। अभी एटीएफ पर एक्साइज ड्यूटी और स्टेट वैट लगता है, जिससे एयरलाइंस को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाता। इंडस्ट्री का कहना है कि जीएसटी में शामिल होने से ऑपरेटिंग कॉस्ट कम होगी और हवाई सफर सस्ता हो सकता है।
हवाई किराये और नेटवर्क विस्तार
एयरलाइंस का कहना है कि टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव से उनकी बैलेंस शीट मज़बूत होगी। इससे फ्लीट और नेटवर्क विस्तार में मदद मिलेगी। यात्रियों के लिए टिकट दाम में राहत की संभावना भी जताई जा रही है।
क्रिप्टोकरेंसी टैक्स को लेकर चर्चा
देश में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स में दिलचस्पी बढ़ रही है। मौजूदा नियमों के तहत क्रिप्टो ट्रांज़ैक्शन पर 30 प्रतिशत फ्लैट टैक्स लागू है। बजट 2026 को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि टैक्स ढांचे को और स्पष्ट बनाया जा सकता है। सेक्टर का कहना है कि नियम साफ़ होने से निवेशकों को सहूलियत मिलेगी।
कॉस्मेस्युटिकल्स इंडस्ट्री की उम्मीदें
कॉस्मेटिक और फार्मास्युटिकल के मिले-जुले बाज़ार को कॉस्मेस्युटिकल्स कहा जाता है। यह सेक्टर चाहता है कि सरकार इसे हेल्थकेयर से जोड़कर देखे। साइंस-बेस्ड स्किनकेयर प्रोडक्ट्स पर जीएसटी कम करने और नियमों को साफ़ करने की मांग की गई है।
सस्ता घर और रियल एस्टेट
रियल एस्टेट सेक्टर में सस्ते घरों की उपलब्धता एक अहम मुद्दा बना हुआ है। बजट 2026 से उम्मीद है कि अफ़ोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक कदम उठाए जाएंगे। इंडस्ट्री का कहना है कि छोटे समय की राहत की बजाय स्थायी समाधान ज़रूरी हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण के संकेत
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी मुअश्शत बना हुआ है। साल 2026 में ग्रोथ रेट 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। निवेश में बढ़ोतरी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उछाल को इसकी वजह बताया गया है।
एफएमसीजी सेक्टर की मांगें
एफएमसीजी सेक्टर के बड़े प्लेयर्स कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। वे ऐसी नीतियों की उम्मीद कर रहे हैं जो घरेलू कंपनियों को स्थिरता दें और ग्लोबल मार्केट तक पहुंच आसान करें।
प्रधानमंत्री का बयान
आर्थिक सर्वेक्षण से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद को संबोधित किया। उन्होंने रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म की बात दोहराई। उनका कहना था कि देश 2047 तक आत्मनिर्भर और विकसित बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
राजस्व और टैक्स कलेक्शन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार रेवेन्यू परफॉर्मेंस मज़बूत रही है। महामारी के बाद सकल कर राजस्व जीडीपी के अनुपात में बढ़ा है। पर्सनल इनकम टैक्स कलेक्शन में भी इज़ाफ़ा दर्ज किया गया है।
टैक्सपेयर्स की संख्या में बढ़ोतरी
इनकम टैक्स भरने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2022 में जहां करदाताओं की संख्या 6.9 करोड़ थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 9.2 करोड़ हो गई। इसे बेहतर अनुपालन और इकोनॉमी के फॉर्मलाइजेशन से जोड़ा जा रहा है।
आम आदमी की उम्मीदें
आम लोगों को बजट से सस्ता घर, सस्ता हवाई सफर और सस्ता इलाज मिलने की उम्मीद है। बजट घोषणाओं पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं, जो एक फरवरी को संसद में सामने आएंगी।




