
बजट चर्चा में अखिलेश यादव ने सरकार से पूछे कई सवाल
लोकसभा बजट बहस: अखिलेश यादव ने उठाए विकास और अर्थव्यवस्था के मुद्दे
बजट सत्र में अखिलेश यादव का सरकार पर सीधा हमला
लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार के बजट और नीतियों को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने किसानों, मध्यम वर्ग, रोजगार, निवेश, स्वास्थ्य और राज्यों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया।बजट बहस में अखिलेश यादव ने सरकार के आर्थिक आंकड़ों, निवेश स्थिति, किसानों की आय, महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं और राज्यों को मिलने वाले संसाधनों पर सवाल रखे। उन्होंने उत्तर प्रदेश से जुड़े विकास कार्यों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का भी जिक्र किया।
📍 New Delhi ✍️ Asif Khan
लोकसभा में बजट पर चर्चा
लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सदन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में दीर्घकालिक दिशा स्पष्ट नहीं दिखाई देती। उनके अनुसार बजट में वर्ष 2047 तक देश को विकसित बनाने से जुड़े लक्ष्य पर ठोस विवरण नहीं है।
अखिलेश यादव ने कहा कि बजट में अवाम, किसान, मजदूर, नौजवान और मध्यम वर्ग के लिए कोई नई राहत नहीं दिखती। उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन टैक्स से जुड़ी राहत सीमित है, जिससे लोगों की जेब पर दबाव बना हुआ है।
आर्थिक वृद्धि और निवेश
बजट बहस में अखिलेश यादव ने आर्थिक वृद्धि दर का उल्लेख करते हुए कहा कि जीडीपी ग्रोथ लगभग 7 प्रतिशत बताई जा रही है, जबकि नॉमिनल ग्रोथ करीब 8 प्रतिशत है। उनके अनुसार निजी निवेश अपेक्षित स्तर पर नहीं आ रहा है, जिसका असर रोजगार और आमदनी पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत की वैश्विक रैंकिंग 144वें स्थान पर बताई जाती है। उनका कहना था कि सरकार पिछले 11 वर्षों से बजट पेश कर रही है, लेकिन पर कैपिटा इनकम में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पाई है।
कर, महंगाई और मध्यम वर्ग
अखिलेश यादव ने कहा कि महंगाई बेतहाशा बढ़ रही है और खाद्य पदार्थों, ईंधन तथा रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बजट में टैक्स राहत सीमित रहने से मध्यम वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि बजट का लाभ सीमित वर्ग तक सिमटा हुआ प्रतीत होता है और व्यापक आबादी तक उसका असर नहीं पहुंच रहा है।
राज्यों और उत्तर प्रदेश का मुद्दा
बजट चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि जब बजट पेश होता है तो सांसद अपने-अपने राज्यों के लिए घोषणाओं की तलाश करते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के लिए बजट में कोई बड़ी नई योजना सामने नहीं आई।
उन्होंने एक्सप्रेस-वे और सड़कों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में बन रही परियोजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं। उनका कहना था कि केंद्र और राज्य सरकारों को बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर ध्यान देना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और डॉलर-रुपया
अखिलेश यादव ने अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील का जिक्र करते हुए कहा कि इस विषय पर लंबे समय से चर्चा चल रही थी। उन्होंने सवाल किया कि अगर कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो चुके हैं, तो रुपये की स्थिति कमजोर क्यों बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि व्यापारियों और कारोबारियों को लंबे समय तक अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। उनका कहना था कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों का घरेलू उद्योग और किसानों पर क्या असर पड़ेगा।
किसान और कृषि
बजट बहस में अखिलेश यादव ने किसानों की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि धान, गन्ना, गेहूं और आलू जैसी फसलों के दाम किसानों को संतोषजनक नहीं मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को महंगाई और लागत बढ़ने का सामना करना पड़ रहा है। खाद, बीज और कीटनाशकों की कीमतें बढ़ने से खेती महंगी हो गई है।
उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी का इंतजार है।
रोजगार और नौजवान
अखिलेश यादव ने कहा कि बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं के लिए बजट में कोई ठोस घोषणा नहीं दिखती। उनका कहना था कि रोजगार सृजन के लिए निजी और सार्वजनिक निवेश दोनों की जरूरत है।
उन्होंने मनरेगा का जिक्र करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने की इस योजना की भूमिका पहले अहम रही है, लेकिन वर्तमान में इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाएं और बजट आवंटन
स्वास्थ्य क्षेत्र पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं की कमी बनी हुई है। उन्होंने बजट आवंटन का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ओर दिल्ली एम्स के लिए 5600 करोड़ रुपये का प्रावधान है, वहीं पूरे देश की आयुष्मान भारत योजना के लिए 4700 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
उन्होंने कहा कि जिला स्तर के अस्पतालों में इलाज, ऑपरेशन और जरूरी सुविधाओं की स्थिति पर ध्यान देने की जरूरत है।
पर्यावरण और नदियों की स्थिति
अखिलेश यादव ने नदियों की सफाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि गंगा और यमुना की स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि नदियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ बताया जा रहा है और भारी धातुओं की मौजूदगी पर रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत को लेकर सवाल उठते हैं, जिसका असर निवेश और छवि पर पड़ता है।
आरक्षण और शिक्षा
बजट चर्चा में अखिलेश यादव ने शिक्षा संस्थानों में नियुक्तियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक संतुलन और समान अवसर के बिना विकास का लक्ष्य अधूरा रह जाता है।
कानून व्यवस्था और आरोप
अखिलेश यादव ने कुछ मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने अयोध्या और अन्य स्थानों से जुड़े मामलों का उल्लेख किया और कहा कि सरकार को निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनावी माहौल में लगाए गए आरोपों और मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
बुनियादी ढांचा और परियोजनाएं
उन्होंने अयोध्या एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अन्य निर्माण परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं की गुणवत्ता और समय पर पूरा होना अहम है।
उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है ताकि सार्वजनिक धन का सही उपयोग हो सके।
नतीजा
लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने सरकार के सामने कई सवाल रखे। उनके भाषण में अर्थव्यवस्था, किसान, रोजगार, स्वास्थ्य, पर्यावरण और राज्यों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। सरकार की ओर से इन सवालों पर आगे जवाब और स्पष्टीकरण दिए जाने की उम्मीद जताई गई।





