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तीनों नए आपराधिक कानून सजा पर नहीं, न्याय पर केंद्रित हैं, न्याय तय समय में दिया जाएगा

None • 2024-06-19 08:30:07
तीनों नए आपराधिक कानून सजा पर नहीं, न्याय पर केंद्रित हैं, न्याय तय समय में दिया जाएगा

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने कहा कि नए आपराधिक कानून दंडात्मक नहीं बल्कि न्यायोन्मुखी हैं। इससे पीड़ित को तय समय सीमा में न्याय मिलेगा। अब अपराधी को उसकी उम्र के आधार पर सजा नहीं मिलेगी, बल्कि उसकी मानसिक स्थिति तय करेगी कि उसे सजा मिलेगी या नहीं।

Lucknow, (Shah Times) । 1 जुलाई से पूरे भारत में नए आपराधिक कानून लागू होने जा रहे हैं। इनके लागू होने के बाद भारतीय दंड संहिता यानी IPC की जगह भारतीय न्याय संहिता 2023, दंड प्रक्रिया संहिता यानी CRPC की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेगा। नए आपराधिक कानूनों के ज़रिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लोगों को त्वरित न्याय मिले। इसके लिए पूरी प्रक्रिया में नई तकनीकों को शामिल किया गया है। भारतीय न्याय संहिता 2023 कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और पीड़ितों की भागीदारी को बढ़ावा देती है। इसके साथ ही यह न्याय प्रदान करने में कानून प्रवर्तन की भूमिका को और मज़बूत बनाती है।

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने कहा कि समय की मांग को देखते हुए ये नए आपराधिक कानून लाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में सजा पर नहीं, बल्कि न्याय पर जोर दिया गया है। भारतीय न्याय संहिता 2023 में यह सुनिश्चित किया गया है कि अपराध होने पर पीड़ित को तय समय सीमा के भीतर न्याय मिले। नए आपराधिक कानूनों में आतंकवाद और संगठित अपराध जैसे नए विषयों को भी शामिल किया गया है। पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में इस बात का ध्यान रखा गया है कि किसी शिकायत के समाधान में उसमें शामिल किसी भी पक्ष को परेशान न किया जाए।

यूपी पुलिस के महानिदेशक ने जानकारी देते हुए बताया कि नए आपराधिक कानूनों में महिलाओं और बच्चों से जुड़े सभी अपराधों को पांचवें अध्याय में एक साथ रखा गया है। 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराध के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इनमें अब पीड़िता को मुफ्त में एफआईआर की कॉपी पाने का अधिकार दिया गया है। साथ ही 90 दिनों के अंदर जांच की प्रगति की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। भारतीय न्याय संहिता में बच्चों को श्रम या वेश्यावृत्ति के लिए खरीदना और बेचना दंडनीय अपराध है। डीजीपी प्रशांत कुमार ने किशोर अपराधों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अक्सर ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जिनमें अपराध गंभीर होने पर भी आरोपी कम उम्र के कारण बच निकलते थे, लेकिन अब मानसिक परिपक्वता के आधार पर तय किया जाएगा कि अपराधी बालिग है या नहीं और उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

यूपी डीजीपी ने कहा कि मानव तस्करी एक बड़ी चुनौती है। भारतीय न्याय संहिता 2023 में इससे निपटने के लिए कानूनों को और मजबूत किया गया है। किसी भी व्यक्ति की तस्करी, वेश्यावृत्ति और फिरौती के लिए मानव तस्करी को शामिल करते हुए आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक के प्रावधान किए गए हैं। इनमें भीख मांगने को भी जोड़ा गया है।

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने कहा कि नए आपराधिक कानून दंडात्मक नहीं बल्कि न्यायोन्मुखी हैं। इससे पीड़ित को तय समय सीमा में न्याय मिलेगा। अब अपराधी को उसकी उम्र के आधार पर सजा नहीं मिलेगी, बल्कि उसकी मानसिक स्थिति तय करेगी कि उसे सजा मिलेगी या नहीं।

Lucknow, (Shah Times) । 1 जुलाई से पूरे भारत में नए आपराधिक कानून लागू होने जा रहे हैं। इनके लागू होने के बाद भारतीय दंड संहिता यानी IPC की जगह भारतीय न्याय संहिता 2023, दंड प्रक्रिया संहिता यानी CRPC की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेगा। नए आपराधिक कानूनों के ज़रिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लोगों को त्वरित न्याय मिले। इसके लिए पूरी प्रक्रिया में नई तकनीकों को शामिल किया गया है। भारतीय न्याय संहिता 2023 कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और पीड़ितों की भागीदारी को बढ़ावा देती है। इसके साथ ही यह न्याय प्रदान करने में कानून प्रवर्तन की भूमिका को और मज़बूत बनाती है।

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने कहा कि समय की मांग को देखते हुए ये नए आपराधिक कानून लाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में सजा पर नहीं, बल्कि न्याय पर जोर दिया गया है। भारतीय न्याय संहिता 2023 में यह सुनिश्चित किया गया है कि अपराध होने पर पीड़ित को तय समय सीमा के भीतर न्याय मिले। नए आपराधिक कानूनों में आतंकवाद और संगठित अपराध जैसे नए विषयों को भी शामिल किया गया है। पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में इस बात का ध्यान रखा गया है कि किसी शिकायत के समाधान में उसमें शामिल किसी भी पक्ष को परेशान न किया जाए।

यूपी पुलिस के महानिदेशक ने जानकारी देते हुए बताया कि नए आपराधिक कानूनों में महिलाओं और बच्चों से जुड़े सभी अपराधों को पांचवें अध्याय में एक साथ रखा गया है। 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराध के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इनमें अब पीड़िता को मुफ्त में एफआईआर की कॉपी पाने का अधिकार दिया गया है। साथ ही 90 दिनों के अंदर जांच की प्रगति की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। भारतीय न्याय संहिता में बच्चों को श्रम या वेश्यावृत्ति के लिए खरीदना और बेचना दंडनीय अपराध है। डीजीपी प्रशांत कुमार ने किशोर अपराधों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अक्सर ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जिनमें अपराध गंभीर होने पर भी आरोपी कम उम्र के कारण बच निकलते थे, लेकिन अब मानसिक परिपक्वता के आधार पर तय किया जाएगा कि अपराधी बालिग है या नहीं और उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

यूपी डीजीपी ने कहा कि मानव तस्करी एक बड़ी चुनौती है। भारतीय न्याय संहिता 2023 में इससे निपटने के लिए कानूनों को और मजबूत किया गया है। किसी भी व्यक्ति की तस्करी, वेश्यावृत्ति और फिरौती के लिए मानव तस्करी को शामिल करते हुए आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक के प्रावधान किए गए हैं। इनमें भीख मांगने को भी जोड़ा गया है।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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