
Map-based illustration showing China’s military expansion around South Asia. Shah Times
भारत के पड़ोस में चीनी सैन्य गतिविधियों पर पेंटागन की चेतावनी
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों का विवरण सामने आया है। रिपोर्ट में भारत के पड़ोसी देशों में संभावित चीनी सैन्य ठिकानों और हथियार आपूर्ति का जिक्र किया गया है।
📍नई दिल्ली 🗓️ 24 दिसंबर 2025✍️Asif Khan
अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने अपनी 2025 की सालाना रिपोर्ट में चीन की सैन्य तैयारियों पर विस्तृत जानकारी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी सैन्य पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। यह विस्तार जमीनी, नौसैनिक और हवाई क्षमताओं के संतुलित उपयोग पर आधारित बताया गया है।
भारत के पड़ोस पर विशेष ध्यान
रिपोर्ट के अनुसार भारत के चार पड़ोसी देशों में चीन की गतिविधियां विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इनमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार का नाम शामिल है। दस्तावेज़ में कहा गया है कि इन देशों में लॉजिस्टिक सपोर्ट, नेवल एक्सेस और एयर फैसिलिटी से जुड़ी संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
पाकिस्तान में ग्वादर का उल्लेख
पेंटागन रिपोर्ट में पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह का विशेष जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन वहां पहले से मौजूद बुनियादी ढांचे का उपयोग करते हुए नौसैनिक गतिविधियों को समर्थन देने की क्षमता विकसित कर रहा है। इसे हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की रणनीतिक मौजूदगी का अहम हिस्सा बताया गया है।
बांग्लादेश में संभावित सैन्य सुविधा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन बांग्लादेश में सैन्य सुविधा केंद्र बनाने की संभावना पर विचार कर रहा है। बांग्लादेश और चीन के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है। दस्तावेज़ के अनुसार यह सहयोग हथियार खरीद, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता तक फैला हुआ है।
पीएलए की रणनीति और उद्देश्य
अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएलए अतिरिक्त सैन्य सुविधाओं के जरिए सी पावर और एयर पावर का प्रदर्शन करना चाहती है। इसका उद्देश्य समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा और रणनीतिक चोक प्वाइंट्स पर प्रभाव बनाए रखना है। मलक्का स्ट्रेट, स्ट्रेट ऑफ होर्मूज और अफ्रीकी तटवर्ती क्षेत्र इस रणनीति के केंद्र में बताए गए हैं।
मलक्का स्ट्रेट पर फोकस
पेंटागन के अनुसार चीन मलक्का स्ट्रेट को एक संवेदनशील चोक प्वाइंट मानता है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि इस क्षेत्र में किसी भी संभावित अवरोध से चीन की सप्लाई लाइन प्रभावित हो सकती है। इसी कारण वहां वैकल्पिक पहुंच और समर्थन ढांचे पर काम किया जा रहा है।
चीन और बांग्लादेश के रक्षा संबंध
रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश चीन से जे–10 सी लड़ाकू विमान खरीदने में रुचि दिखा रहा है। बांग्लादेश पहले से चीनी सैन्य वाहनों और लाइट टैंकों का उपयोग करता रहा है। 2024 में चीन द्वारा बांग्लादेश को पनडुब्बी और युद्धपोत सौंपे जाने का भी उल्लेख किया गया है।
सरकारों के बदलाव के बाद स्थिति
दस्तावेज़ के अनुसार बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी चीन के साथ रक्षा सहयोग जारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नई सरकार के साथ भी चीन के सैन्य और रणनीतिक संपर्क बने हुए हैं।
भारत–चीन संबंधों की पृष्ठभूमि
रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े तनाव हाल के महीनों में कुछ कम हुए हैं। एलएसी से जुड़े क्षेत्रों में सेनाओं की वापसी और संवाद प्रक्रिया का जिक्र किया गया है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच वीजा सेवाओं की बहाली का उल्लेख भी है।
अमेरिका–भारत संबंधों पर असर
पेंटागन रिपोर्ट के अनुसार चीन भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग को लेकर सतर्क है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए अपने कूटनीतिक और सैन्य कदमों को समायोजित कर रहा है।
अरुणाचल प्रदेश का संदर्भ
दस्तावेज़ में अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के दावे का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इस क्षेत्र को अपने तथाकथित कोर इंटरेस्ट में शामिल करता है। इसे संप्रभुता से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बताया गया है।
पाकिस्तान को हथियार आपूर्ति
रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन पाकिस्तान को बड़े पैमाने पर सैन्य उपकरण उपलब्ध करा रहा है। इनमें लड़ाकू विमान, नौसैनिक जहाज और पनडुब्बियां शामिल हैं। मई 2025 तक चीन द्वारा पाकिस्तान को 20 जे–10 सी लड़ाकू विमान सौंपे जाने की जानकारी दी गई है।
संयुक्त परियोजनाएं
पेंटागन के अनुसार चीन और पाकिस्तान संयुक्त रूप से जेएफ–17 लड़ाकू विमान का निर्माण कर रहे हैं। इसके अलावा ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य हथियार प्रणालियों में भी सहयोग जारी है।
भविष्य की संभावनाएं
रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में पाकिस्तान में चीनी सैन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट की भूमिका बढ़ सकती है। इससे चीन की क्षेत्रीय पहुंच और संचालन क्षमता में विस्तार संभव है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इन गतिविधियों से दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में सभी संबंधित देशों से स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही गई है।
निष्कर्ष के तौर पर तथ्य
पेंटागन की यह रिपोर्ट चीन की सैन्य रणनीति और क्षेत्रीय गतिविधियों का दस्तावेज़ी विवरण प्रस्तुत करती है। इसमें भारत के पड़ोस में बदलते सुरक्षा परिदृश्य से जुड़े तथ्यों को दर्ज किया गया है, बिना किसी नीति सुझाव या आकलन के।






