
US lawmakers discuss Russia sanctions bill that could impact India’s oil imports – Shah Times
रूस से तेल ख़रीद पर 500 फ़ीसदी टैरिफ़ का अमेरिकी प्रस्ताव
अमेरिकी संसद में रूस प्रतिबंध विधेयक, भारत पर असर संभव
अमेरिका में रूस के ख़िलाफ़ एक नया कड़ा प्रतिबंध विधेयक पेश किया गया है।
इसका असर रूस से ऊर्जा ख़रीदने वाले देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर पड़ सकता है।
📍 Washington ✍️ Asif Khan
अमेरिका में नया प्रतिबंध क़ानून तैयार
अमेरिका में रूस के ख़िलाफ़ एक नया और सख़्त प्रतिबंध क़ानून तैयार किया जा रहा है। इस विधेयक का नाम “रूस पर प्रतिबंध लगाने का अधिनियम 2025” रखा गया है। यह विधेयक रूस और यूक्रेन के दरमियान जारी जंग के दौरान आर्थिक दबाव बढ़ाने के मक़सद से लाया गया है। अमेरिकी संसद की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक़, इस क़ानून के ज़रिए रूस की आय के स्रोतों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है।
ऊर्जा व्यापार पर सीधा निशाना
इस प्रस्तावित क़ानून का सबसे अहम हिस्सा ऊर्जा व्यापार से जुड़ा है। इसके तहत रूस से तेल, गैस, यूरेनियम और दूसरे एनर्जी प्रोडक्ट ख़रीदने वाले देशों पर अमेरिका भारी टैरिफ़ लगा सकता है। विधेयक में यह प्रावधान है कि ऐसे देशों से अमेरिका में आने वाले सामानों पर कम से कम 500 फ़ीसदी तक शुल्क लगाया जा सकेगा।
भारत की स्थिति पर नज़र
भारत यूक्रेन जंग के बाद रूस से सस्ता कच्चा तेल ख़रीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़, रूस भारत के लिए एक अहम एनर्जी सप्लायर बन चुका है। इस नए अमेरिकी क़ानून के लागू होने की स्थिति में भारत को अमेरिकी बाज़ार में अपने निर्यात पर भारी टैरिफ़ का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी सीनेटर का बयान
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रतिबंध विधेयक को मंज़ूरी दे दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा कि यह विधेयक कई महीनों की तैयारी के बाद पेश किया गया है और इसे दोनों प्रमुख दलों का समर्थन मिल रहा है।
द्विदलीय समर्थन का दावा
सीनेटर ग्राहम के अनुसार, यह विधेयक रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के सांसदों की सहमति से तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल समेत कई सांसद इस प्रक्रिया में शामिल रहे हैं। उनका कहना है कि अगले हफ़्ते अमेरिकी संसद में इस पर मतदान हो सकता है।
राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका
सीनेटर ग्राहम ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई बैठक में इस विधेयक पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने इसे मौजूदा हालात के लिए ज़रूरी क़दम बताया है। इस बयान से साफ़ है कि व्हाइट हाउस इस क़ानून को आगे बढ़ाने के पक्ष में है।
रूस पर दबाव बढ़ाने की रणनीति
अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इस क़ानून का मक़सद रूस को शांति वार्ता के लिए मजबूर करना है। उनका दावा है कि रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करने के लिए उसकी तेल और गैस से होने वाली कमाई को निशाना बनाया जा रहा है।
यूक्रेन शांति वार्ता का संदर्भ
यह विधेयक ऐसे समय में सामने आया है जब यूक्रेन में शांति वार्ता को लेकर कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों स्टीव विटकॉफ़ और जारेड कुश्नर से मुलाक़ात की थी। इस बैठक में युद्ध समाप्त करने के संभावित रास्तों पर चर्चा हुई।
भारत पर पहले से टैरिफ़
इससे पहले भी अमेरिका भारत पर कुछ टैरिफ़ लगा चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि भारत रूस से तेल ख़रीदने को लेकर लगाए गए ऊँचे अमेरिकी टैरिफ़ से संतुष्ट नहीं है। मौजूदा समय में भारत पर कुल 50 फ़ीसदी अमेरिकी टैरिफ़ लागू बताए गए हैं, जिनमें से 25 फ़ीसदी रूस से तेल आयात से जुड़े हैं।
आगे बढ़ सकती है सख़्ती
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर भारत रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिकी चिंताओं का समाधान नहीं करता है, तो भारतीय उत्पादों पर टैरिफ़ और बढ़ाए जा सकते हैं। नए विधेयक के पारित होने से यह सख़्ती क़ानूनी रूप ले सकती है।
व्यापारिक रिश्तों पर असर
विशेषज्ञों के मुताबिक़, अगर यह क़ानून लागू होता है तो भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है। अमेरिका भारत के लिए एक बड़ा निर्यात बाज़ार है, और भारी टैरिफ़ से कई सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं।
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की चिंता
इस विधेयक को लेकर वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भी चिंता जताई जा रही है। रूस दुनिया के बड़े तेल और गैस उत्पादकों में शामिल है। अगर रूस से ऊर्जा ख़रीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव आ सकता है।
रूस पर व्यापक प्रतिबंध
प्रस्तावित क़ानून में सिर्फ़ टैरिफ़ ही नहीं, बल्कि रूस से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं पर भी सख़्त प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इसमें बैंकिंग, शिपिंग और बीमा सेक्टर से जुड़े उपाय भी शामिल हो सकते हैं।
अमेरिकी संसद में अगला क़दम
अब सबकी नज़र अमेरिकी संसद पर है, जहां अगले हफ़्ते इस विधेयक पर मतदान होने की संभावना है। अगर इसे बहुमत मिलता है, तो यह कानून का रूप ले सकता है और इसके असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महसूस किए जा सकते हैं।
भारत की रणनीति
भारत की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक़, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थिति पर नज़र बनाए हुए है।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों की कसौटी
यह विधेयक न सिर्फ़ रूस और अमेरिका के रिश्तों को प्रभावित करेगा, बल्कि भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों के साथ अमेरिका के संबंधों की भी परीक्षा ले सकता है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक गतिविधियां तेज़ होने की उम्मीद है।






