
Community gathering during Imam Ali birth anniversary celebration in Muzaffarnagar – Shah Times
13 रजब: मौला-ए-कायनात की विलादत, सामाजिक सहभागिता के साथ कार्यक्रम
13 रजब के अवसर पर मुज़फ्फरनगर में इमाम अली (अ.स.) की विलादत को लेकर धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। आयोजन में उलेमा, समाजसेवी और नागरिकों ने शिरकत की।
📍 Muzaffarnagar ✍️ Israr Khan
13 रजब का ऐतिहासिक महत्व
13 रजब उल मुरज्जब इस्लामी तारीख का वह दिन माना जाता है, जब अमीरुल मोमिनीन, मौला-ए-कायनात हज़रत इमाम अली इब्ने अबी तालिब (अ.स.) की विलादत ख़ाना-ए-काबा के अंदर हुई। इस दिन को धार्मिक इतिहास में विशेष स्थान प्राप्त है। शहर मुज़फ्फरनगर में इस अवसर पर अकीदत, एहतराम और सामूहिक सहभागिता के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
आयोजन का स्वरूप और सहभागिता
कार्यक्रम का आयोजन सेलिब्रिटी मोहम्मद दानिश और उनके परिवार की ओर से किया गया। आयोजन स्थल पर धार्मिक विद्वान, समाजसेवी, स्थानीय नागरिक और विभिन्न क्षेत्रों से आए मेहमान मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य विलादत की याद को साझा करना और इमाम अली (अ.स.) के जीवन से जुड़े पहलुओं को सामने रखना बताया गया।
वक्ताओं का संबोधन
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने 13 रजब की अहमियत पर बात रखी। वक्ताओं ने बताया कि इमाम अली (अ.स.) का जीवन इंसाफ, इल्म, सब्र और समाजी जिम्मेदारी से जुड़ा रहा। उनके कथन और आचरण को समाज के लिए मार्गदर्शक बताया गया। वक्ताओं ने यह भी कहा कि उनकी शिक्षाएं आज के दौर में भी सामाजिक समरसता और न्याय के मूल सिद्धांतों को समझने में सहायक हैं।






धार्मिक और सामाजिक संदेश
कार्यक्रम में यह कहा गया कि इमाम अली (अ.स.) की शख्सियत केवल धार्मिक इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक ढांचे को मजबूत करने वाले उसूलों से भी जुड़ी है। उनके जीवन से जुड़े किस्सों और घटनाओं का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने इंसाफ, बराबरी और मानव गरिमा पर जोर दिया।
मौलाना अब्बास (अ.स.) के आलम का उल्लेख
कार्यक्रम के दौरान हज़रत मौलाना अब्बास (अ.स.) के आलम की अहमियत पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि आलम करबला की याद और उस पैग़ाम का प्रतीक है, जिसमें वफ़ादारी, सब्र और इमाम से निष्ठा को केंद्रीय स्थान दिया गया है। यह भी कहा गया कि आलम को उठाना उस ऐतिहासिक संदेश को जीवित रखने जैसा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी समाज तक पहुंचता रहा है।
सम्मान और एतराफ
इसी क्रम में मोहम्मद दानिश के पिता डॉक्टर शाहनवाज़ को मौलाना अब्बास (अ.स.) का आलम प्रदान किया गया। आयोजकों के अनुसार यह सम्मान उनकी सामाजिक और धार्मिक सेवाओं के एतराफ के रूप में दिया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस अवसर पर तालियों और दुआओं के साथ अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
धार्मिक सेवाओं का सम्मान
कार्यक्रम में अल्लामा गुलाम फ़रीद, ख़तीब-ए-इमाम बारगाह, को भी सम्मानित किया गया। उन्हें दीन-ए-इस्लाम और मजलिसी ख़िदमात के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए प्रमाण-पत्र दिया गया। यह सम्मान DIG अभिषेक सिंह और मोहम्मद दानिश द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर मंच से उनके योगदान का संक्षिप्त उल्लेख किया गया।
प्रमुख अतिथियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी हस्तियों की मौजूदगी रही। इनमें टेलीविजन जगत से जुड़े सलीम ज़ैदी उर्फ अमजद, सामाजिक कार्यकर्ता सुफियान त्यागी और टीम सेवेंजर्स के सदस्य शामिल रहे। आयोजकों के अनुसार, इनकी मौजूदगी से कार्यक्रम को व्यापक सामाजिक स्वरूप मिला।
शिक्षाविद का संबोधन
मोहम्मद दानिश के चाचा और शिक्षाविद डॉ. शबाब आलम ने अपने संबोधन में कहा कि इमाम अली (अ.स.) की जीवन शैली और मौलाना अब्बास (अ.स.) की कुर्बानी से जुड़े मूल्यों को आज के समाज में समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी के जरिए इन मूल्यों को अपनाया जा सकता है।
सामाजिक संदर्भ
डॉ. शबाब आलम ने यह भी कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान की भूमिका अहम है। उन्होंने इमाम अली (अ.स.) के जीवन से जुड़े उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि इंसाफ और बराबरी समाज को स्थिरता प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन सामूहिक दुआ के साथ किया गया। आयोजकों ने बताया कि इस तरह के आयोजन समाज में आपसी समझ और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देते हैं। उपस्थित लोगों ने शांतिपूर्ण और व्यवस्थित आयोजन की सराहना की।
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