गुरुवार, 08 October 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
🔔 Google पर Shah Times की खबरें पाने के लिए क्लिक करें
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Advertisement Advertisement
Entertainment

मोहर्रम और कर्बला: क्या सिर्फ मातम नहीं, एक फ़िक्र का पैग़ाम है यह महीना?

Asif Khan • 2026-06-17 16:13:01
मोहर्रम और कर्बला: क्या सिर्फ मातम नहीं, एक फ़िक्र का पैग़ाम है यह महीना?

इस्लामी हिजरी साल का पहला महीना मोहर्रम केवल नए साल की शुरुआत नहीं, बल्कि इबादत, आत्ममंथन और इंसाफ़ की राह पर डटे रहने का पैग़ाम भी माना जाता है। कर्बला की घटना ने इस महीने को पूरी इंसानियत के लिए सब्र, कुर्बानी और उसूलों की मिसाल बना दिया।


📍 India / Islamic World


📰 Date: 17 June 2026


✍️ Zia Abbas Zaidi 




मोहर्रम की फ़ज़ीलत: नया साल, लेकिन अलग मायने


जब दुनिया के अधिकांश समाज नए साल को जश्न, उत्सव और नई उम्मीदों के साथ जोड़ते हैं, तब इस्लामी हिजरी कैलेंडर का पहला महीना मोहर्रम एक अलग तरह का पैग़ाम देता है। यह महीना मुसलमानों के लिए सिर्फ कैलेंडर की शुरुआत नहीं बल्कि इबादत, मुहासबा-ए-नफ़्स और दीन के मूल्यों पर दोबारा गौर करने का अवसर भी माना जाता है।


मोहर्रम उन चार महीनों में शामिल है जिन्हें इस्लामी परंपरा में ख़ास एहतराम हासिल है। इसी वजह से इसकी धार्मिक और आध्यात्मिक अहमियत सामान्य महीनों से अलग मानी जाती है।


लेकिन मोहर्रम की चर्चा आते ही दुनिया भर के करोड़ों लोगों के ज़ेहन में सबसे पहले जो तस्वीर उभरती है, वह कर्बला की है।




कर्बला: इतिहास की वह घटना जिसने सदियों को प्रभावित किया


सन् 680 ईस्वी (61 हिजरी) में वर्तमान इराक़ के कर्बला क्षेत्र में हुई घटना इस्लामी इतिहास के सबसे चर्चित और संवेदनशील अध्यायों में गिनी जाती है।


इमाम हुसैन, जो पैग़म्बर इस्लाम हज़रत मुहम्मद के नवासे थे, उस दौर की राजनीतिक और धार्मिक परिस्थितियों को लेकर अपनी अलग राय रखते थे। ऐतिहासिक स्रोत बताते हैं कि तत्कालीन शासन व्यवस्था और उसके तौर-तरीकों को लेकर गंभीर मतभेद मौजूद थे।


यहीं से वह संघर्ष शुरू हुआ जिसने आगे चलकर कर्बला के मैदान में एक त्रासद लेकिन ऐतिहासिक मोड़ लिया।


कर्बला की घटना को लेकर विभिन्न इस्लामी विचारधाराओं में कई धार्मिक और ऐतिहासिक व्याख्याएँ मौजूद हैं। हालांकि एक बात पर व्यापक सहमति दिखाई देती है कि यह घटना सिद्धांतों, नैतिकता और प्रतिबद्धता की मिसाल बन गई।


क्या कर्बला सत्ता का संघर्ष था या उसूलों की लड़ाई?


यह सवाल सदियों से बहस का विषय रहा है।


कुछ इतिहासकार इसे राजनीतिक संघर्ष के रूप में देखते हैं, जबकि बड़ी संख्या में इस्लामी विद्वान इसे नैतिक और धार्मिक मूल्यों की रक्षा के लिए दिया गया प्रतिरोध मानते हैं।


यही वह बिंदु है जहां पत्रकारिता का तकाज़ा हमें तथ्यों और मान्यताओं के बीच संतुलन बनाने की सीख देता है।


तथ्य यह है कि कर्बला की घटना हुई, जिसमें इमाम हुसैन और उनके परिवार तथा साथियों की शहादत हुई। यह भी तथ्य है कि इस घटना ने इस्लामी इतिहास और सामूहिक स्मृति पर गहरा असर डाला।


लेकिन घटना के कारणों और उसके धार्मिक अर्थों की व्याख्या अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती है। इसलिए किसी एक दृष्टिकोण को अंतिम सत्य मानना इतिहास की जटिलता को सरल बना देना होगा।




इमाम हुसैन का नैरेटिव आज भी क्यों प्रासंगिक है?


कर्बला की सबसे बड़ी ताकत उसका नैरेटिव है।


यह नैरेटिव बताता है कि कभी-कभी संख्या से अधिक महत्व सिद्धांतों का होता है। कभी-कभी तत्काल सफलता से अधिक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक नैतिक प्रभाव होता है।


इसी वजह से इमाम हुसैन का नाम केवल धार्मिक संदर्भों में ही नहीं बल्कि सामाजिक न्याय, प्रतिरोध और नैतिक साहस की चर्चाओं में भी लिया जाता है।


दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मानवाधिकार आंदोलनों, सामाजिक न्याय अभियानों और नैतिक नेतृत्व पर होने वाली बहसों में भी कर्बला का उल्लेख दिखाई देता है।


मोहर्रम का सामाजिक और मानवीय संदेश


दुर्भाग्य से कई बार मोहर्रम को केवल मातम या शोक तक सीमित करके देखा जाता है।


हकीकत यह है कि इस महीने से जुड़ी शिक्षाओं में सब्र, इंसाफ़, करुणा, सामाजिक ज़िम्मेदारी और कमजोरों के अधिकारों की चर्चा भी मिलती है।


कर्बला की याद इंसान को यह सोचने पर मजबूर करती है कि जब सच और सुविधा आमने-सामने हों तो कौन सा रास्ता चुना जाए।


यही कारण है कि मोहर्रम का संदेश किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं माना जाता। इसके भीतर नैतिक साहस और मानवीय मूल्यों की एक सार्वभौमिक अपील मौजूद है।



बदलते दौर में मोहर्रम की नई प्रासंगिकता


डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और तेज़ी से बदलती दुनिया के इस दौर में मोहर्रम का संदेश नई चुनौतियों के बीच भी प्रासंगिक दिखाई देता है।


आज समाज फेक नैरेटिव, ध्रुवीकरण और त्वरित प्रतिक्रियाओं के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में कर्बला का संदेश धैर्य, विवेक और सिद्धांत आधारित निर्णयों की याद दिलाता है।


यह केवल अतीत का इतिहास नहीं बल्कि वर्तमान का आईना भी बन सकता है।


मोहर्रम का असली सबक


मोहर्रम को केवल कैलेंडर की शुरुआत या ऐतिहासिक स्मृति के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा।


यह महीना इंसान को अपने ज़मीर से सवाल करने का अवसर देता है। कर्बला की घटना चाहे धार्मिक, ऐतिहासिक या सामाजिक दृष्टिकोण से देखी जाए, उसका केंद्रीय संदेश इंसाफ़, सब्र और उसूलों पर डटे रहने से जुड़ा दिखाई देता है।


शायद यही वजह है कि सदियां गुजर जाने के बाद भी इमाम हुसैन का नाम केवल इतिहास की किताबों में नहीं बल्कि इंसानी ज़मीर की आवाज़ में सुनाई देता है।

ADVERTISEMENT
Asif Khan

Asif Khan

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

संबंधित खबरें

पाकिस्तान में SCO राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक शुरू, भारत भी शामिल

2026-09-29 11:51:29

इमरान खान की रिहाई की मांग, इस्लामाबाद पहुंचने वाले रास्तों पर रोक

2026-09-23 13:09:55

रावलपिंडी में सैलाब से हाहाकार, नाला लई 29 फीट पार, स्कूल-कॉलेज बंद

2026-09-01 15:36:52

इमरान खान की मेडिकल जांच पूरी, फिर अदियाला जेल भेजे गए

2026-08-21 12:33:27

डियरबॉर्न में मुस्लिम विरोधी प्रदर्शन, ‘ईसाई धर्मयुद्ध’ का आह्वान

2026-08-19 16:02:00

राजपाल यादव चेक बाउंस केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, ₹1.15 करोड़ का ड्राफ्ट पेश, बाकी ₹85 लाख पर समय

2026-10-07 15:24:41

28 साल बाद भी क्यों याद किया जाता है ‘जब किसी की तरफ दिल’, कुमार सानू की आवाज़ और जतिन-ललित की धुन की कहानी

2026-10-07 15:11:12

कियारा आडवाणी दूसरी बार बनने वाली हैं मां, सिद्धार्थ मल्होत्रा संग साझा की खुशखबरी

2026-10-07 14:58:20

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर