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स्कूल चलो अभियान 2026: सहारनपुर से सीएम योगी का बड़ा संदेश, हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने पर जोर

Shahana • 2026-07-01 10:15:26
स्कूल चलो अभियान 2026: सहारनपुर से सीएम योगी का बड़ा संदेश, हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने पर जोर

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'स्कूल चलो अभियान-2026' के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए प्रत्येक बच्चे तक सरकारी शिक्षा योजनाओं का लाभ पहुंचाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में शिक्षा अवसंरचना, डिजिटल सुविधाओं और सामाजिक भागीदारी पर विशेष बल दिया गया।

Location:-  Saharanpur

Date:- 1 July 2026

Byline:- Shahana

शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे मजबूत आधार बताया

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राज्यव्यापी 'स्कूल चलो अभियान-2026' के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। निर्धारित समय से लगभग सवा घंटे की देरी से कार्यक्रम स्थल पहुंचने के बावजूद बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने उनका स्वागत किया। बारिश के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं और सरकारी विद्यालयों के सशक्तीकरण को केंद्र में रखा गया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज, राज्य और राष्ट्र के भविष्य की बुनियाद तैयार करती है। उनके अनुसार एक सशक्त शिक्षा व्यवस्था ही ऐसे नागरिक तैयार करती है जो प्रशासन, स्वास्थ्य, विज्ञान, उद्योग, राजनीति और सामाजिक जीवन में सकारात्मक योगदान दे सकें।

स्कूल चलो अभियान 2026 का उद्देश्य क्या है

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में शुरू किए गए 'स्कूल चलो अभियान' का मूल उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को विद्यालय से जोड़ना था। उनका कहना था कि आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक कारणों से कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में अभियान के माध्यम से बड़ी संख्या में बच्चों का नामांकन बढ़ा है और सरकारी विद्यालयों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सरकार अब दूसरे चरण में उन बच्चों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जो अब भी नियमित शिक्षा व्यवस्था से बाहर हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा का विस्तार केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है। इसमें अभिभावकों, शिक्षकों, ग्राम प्रधानों, जनप्रतिनिधियों और समाज के सभी वर्गों की साझी भागीदारी आवश्यक है।

शिक्षा और विकास को जोड़ने की कोशिश

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा और आर्थिक विकास के बीच संबंध पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक संसाधन उपलब्ध होंगे तो भविष्य में प्रदेश की कार्यशक्ति अधिक सक्षम बनेगी। इससे रोजगार, नवाचार और सामाजिक विकास को भी गति मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का प्रयास केवल विद्यालयों में प्रवेश दिलाना नहीं है, बल्कि ऐसा शैक्षिक वातावरण तैयार करना है जहां विद्यार्थी आत्मविश्वास के साथ सीख सकें और भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें।

ऑपरेशन कायाकल्प से सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदलने का दावा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में वर्ष 2017 की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय बेसिक शिक्षा परिषद के केवल लगभग 36 प्रतिशत विद्यालय ही आवश्यक आधारभूत सुविधाओं से संतृप्त थे। अनेक स्कूलों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, फर्नीचर, पुस्तकालय, चारदीवारी और मिड-डे मील के लिए समुचित रसोई जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं का अभाव था। उनके अनुसार इस स्थिति ने शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, दोनों को प्रभावित किया।

उन्होंने कहा कि इसी चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने "ऑपरेशन कायाकल्प" शुरू किया। इस पहल के तहत जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय समुदाय के सहयोग से सरकारी विद्यालयों में आधारभूत ढांचे को विकसित करने का अभियान चलाया गया। सरकार का दावा है कि इससे हजारों विद्यालयों में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार हुआ और सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा। हालांकि शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भवन और सुविधाओं में सुधार महत्वपूर्ण है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन केवल अवसंरचना से नहीं किया जा सकता। सीखने के स्तर, प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता, नियमित मूल्यांकन और विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। यही कारण है कि शिक्षा सुधार पर बहस केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहती।

आधुनिक शिक्षा व्यवस्था पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी विद्यालयों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। उनके अनुसार कई विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, डिजिटल लाइब्रेरी और शिक्षकों के लिए टैबलेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनका कहना था कि डिजिटल संसाधनों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप तैयार करना है। उन्होंने दिव्यांग विद्यार्थियों का भी विशेष उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार बेसिक शिक्षा परिषद के माध्यम से एक लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे भी मुख्यधारा की शिक्षा से समान अवसर के साथ जुड़ सकें। समावेशी शिक्षा को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया गया। शिक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि डिजिटल संसाधनों का विस्तार स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन उनकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विद्यालयों में इंटरनेट, बिजली, तकनीकी रखरखाव और शिक्षकों का प्रशिक्षण कितना मजबूत है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी इन चुनौतियों पर निरंतर काम किए जाने की आवश्यकता बनी हुई है।

हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने की सामाजिक जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि यदि कोई बच्चा विद्यालय से बाहर रह जाता है तो उसका नुकसान केवल उस परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज और राष्ट्र दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी ही आने वाले समय में डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, उद्यमी, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि बनेगा। इसलिए प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सहारनपुर सहित पूरे प्रदेश के ग्राम प्रधानों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, सांसदों, विधायकों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि "स्कूल चलो अभियान" को सरकारी कार्यक्रम के बजाय जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाए। उनका कहना था कि जब समाज स्वयं शिक्षा के प्रति जिम्मेदारी महसूस करेगा, तभी शत-प्रतिशत नामांकन और नियमित उपस्थिति का लक्ष्य स्थायी रूप से हासिल किया जा सकेगा।

शिक्षा सुधार की राह में मौजूद चुनौतियां

सरकार ने सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं, डिजिटल संसाधनों और नामांकन बढ़ाने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। इसके बावजूद शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सुधार की अगली चुनौती सीखने की गुणवत्ता को और बेहतर बनाना है। केवल विद्यालय में प्रवेश दिलाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी कक्षा के अनुरूप पढ़ने, लिखने और गणित जैसी बुनियादी क्षमताओं में दक्ष हो। ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में शिक्षक उपलब्धता, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग और अभिभावकों की भागीदारी जैसे मुद्दे अब भी नीति निर्माताओं के सामने महत्वपूर्ण चुनौती बने हुए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में लगातार निगरानी और स्थानीय स्तर पर समाधान विकसित किए बिना दीर्घकालिक परिवर्तन संभव नहीं होगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उत्तर प्रदेश की रणनीति

'स्कूल चलो अभियान-2026' को व्यापक स्तर पर देखा जाए तो यह राज्य सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक विकास से जोड़ा जा रहा है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप बुनियादी साक्षरता, डिजिटल लर्निंग, समावेशी शिक्षा और कौशल विकास पर लगातार ज़ोर दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि आधुनिक सुविधाओं वाले विद्यालय विद्यार्थियों को बेहतर सीखने का वातावरण देंगे। दूसरी ओर, शिक्षा विश्लेषकों का मत है कि इन योजनाओं की सफलता का वास्तविक मूल्यांकन आने वाले वर्षों में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर, ड्रॉपआउट दर में कमी और उच्च शिक्षा तक उनकी पहुँच के आधार पर किया जाना चाहिए।

राजनीतिक और सामाजिक असर

सहारनपुर से दूसरे चरण की शुरुआत को केवल प्रशासनिक कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जा रहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यहां से राज्यव्यापी अभियान का शुभारंभ करना शिक्षा के साथ-साथ सरकार की प्राथमिकताओं का सार्वजनिक संदेश भी माना जा रहा है।

हालांकि कार्यक्रम का मुख्य फोकस शिक्षा रहा, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े सरकारी अभियानों के माध्यम से सरकार अपनी विकास संबंधी उपलब्धियों को भी जनता के सामने रखती है। वहीं विपक्ष समय-समय पर सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी और शिक्षा बजट जैसे मुद्दों पर सवाल उठाता रहा है। ऐसे में शिक्षा सुधार पर बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

आगे की दिशा

अब इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विद्यालय से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान कितनी प्रभावी ढंग से होती है और उन्हें नियमित शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के बाद उनकी पढ़ाई कितनी निरंतर रहती है। इसके साथ ही स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आईसीटी लैब और अन्य आधुनिक सुविधाओं का वास्तविक उपयोग भी महत्वपूर्ण होगा। यदि आधारभूत ढांचे के विकास के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, प्रशिक्षित शिक्षक, नियमित मूल्यांकन और सामुदायिक भागीदारी समान गति से आगे बढ़ते हैं, तो सरकारी विद्यालयों की छवि और परिणाम दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।

सहारनपुर से शुरू हुआ 'स्कूल चलो अभियान-2026' केवल नामांकन बढ़ाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण के व्यापक एजेंडे से जोड़ने का प्रयास है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना सरकार और समाज, दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

हालांकि सरकारी दावों की वास्तविक सफलता का आकलन आने वाले समय में विद्यालयों की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, ड्रॉपआउट दर में कमी और शिक्षा के वास्तविक परिणामों से होगा। यदि नीतियों का प्रभाव ज़मीनी स्तर पर दिखाई देता है, तो यह अभियान उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

 

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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