दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई फ्लाइट FZ1073 में को-पायलट ने भारतीय कप्तान पर हमला किया। विमान तबुक पहुंचा। नेतन्याहू ने कट्टरपंथी विचारधारा और आत्मघाती इरादे का दावा किया।
मध्य पूर्व | 30 सितंबर–2 अक्टूबर 2026
By Mohd Haris
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर 2026 को उस समय गंभीर संकट पैदा हो गया, जब कॉकपिट में मौजूद को-पायलट ने विमान के भारतीय कप्तान पर हमला कर दिया। घटना के बाद विमान का रुख बदला गया और उसे सऊदी अरब के तबुक में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी।
विमान सुरक्षित रूप से तबुक पहुंचा और यात्रियों को बाद में दूसरे विमान से उनके गंतव्य की ओर रवाना किया गया। एयरलाइन के मुताबिक सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। सऊदी अधिकारियों ने बताया कि कप्तान और को-पायलट दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 1 अक्टूबर को कहा कि आरोपी ओमानी को-पायलट के बारे में शुरुआती जांच में कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा से प्रभावित होने के संकेत मिले हैं।
नेतन्याहू के मुताबिक, हमले के बाद जब यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने को-पायलट को काबू में कर लिया, तब उसने कथित तौर पर बार-बार “मुझे मार डालो, मुझे मार डालो” कहा।
नेतन्याहू ने इसी आधार पर उसे आत्मघाती इरादे वाला बताया और कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उसका मकसद विमान को नीचे गिराना था। हालांकि, ये बातें फिलहाल नेतन्याहू और इजरायली अधिकारियों के दावे हैं।
उपलब्ध जांच संबंधी विवरणों के मुताबिक, फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव के लिए रवाना हुई थी। उड़ान के दौरान कॉकपिट में कप्तान और को-पायलट के बीच हिंसक स्थिति पैदा हुई।
भारतीय कप्तान स्मित मच्छार पर हमला हुआ। इसके बाद विमान की उड़ान स्थिति में तेज बदलाव दर्ज किया गया। विमान ने अचानक ऊंचाई खोई और फिर उसे स्थिर करने की कोशिश की गई।
कप्तान के घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा यात्रियों और अन्य चालक दल के सदस्यों के लिए खुला। इसके बाद कुछ यात्रियों और विमान में मौजूद अन्य पायलटों ने आरोपी को-पायलट को काबू में किया। इसके बाद विमान को तबुक की ओर मोड़ा गया और सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विमान में 174 यात्री सवार थे। घटना के बावजूद किसी यात्री की गंभीर चोट की पुष्टि नहीं हुई है। कप्तान को हमले में चोटें आईं और चालक दल के सदस्यों को भी चिकित्सा सहायता दी गई।
विमान के तबुक पहुंचने के बाद यात्रियों को एयरपोर्ट पर आवश्यक सहायता दी गई। बाद में उन्हें दूसरे विमान के जरिए आगे भेजा गया।
जांच से जुड़े विवरणों में आरोपी को-पायलट को ओमान का नागरिक बताया गया है। उसकी सार्वजनिक पहचान अभी स्पष्ट रूप से जारी नहीं की गई है।
घटना के बाद आरोपी को हिरासत में लिया गया। मामले की जांच में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल की एजेंसियों की भूमिका सामने आई है। जांच का प्रमुख फोकस हमले की मंशा, उसकी तैयारी, सुरक्षा प्रक्रिया और किसी संभावित बाहरी संपर्क पर है।
नेतन्याहू ने बताया कि यात्रियों से बातचीत के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि को-पायलट को काबू में करने के बाद उसने “किल मी, किल मी” कहा था।
इजरायली यात्री यानिव हायून ने भी नेतन्याहू के साथ बातचीत में इसी तरह का विवरण दिया। उनके अनुसार आरोपी को बांधने के बाद उसने अंग्रेजी में ये शब्द दोहराए थे।
घटना के बाद ईरान से संभावित संबंध को लेकर भी सवाल उठे हैं। नेतन्याहू ने खुद कहा कि इस स्तर पर ईरान से किसी संभावित मिलीभगत के बारे में निश्चित रूप से कहना जल्दबाजी होगी।
इसका अर्थ है कि फिलहाल ईरान कनेक्शन को स्थापित तथ्य के रूप में पेश करने का आधार नहीं है। जांच एजेंसियां यह देख रही हैं कि आरोपी ने अकेले कार्रवाई की या उसे किसी संगठन अथवा व्यक्ति से निर्देश या सहायता मिली थी।
इस घटना ने विमानन सुरक्षा से जुड़े कई अहम सवाल सामने रखे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक सक्रिय को-पायलट कॉकपिट में मौजूद दूसरे पायलट पर हमला करने की स्थिति तक कैसे पहुंचा।
दूसरा सवाल कॉकपिट सिक्योरिटी और चालक दल की स्क्रीनिंग से जुड़ा है। तीसरा सवाल यह है कि विमान में मौजूद अन्य पायलटों और यात्रियों ने संकट की स्थिति में कितनी जल्दी प्रतिक्रिया दी और किस प्रक्रिया के तहत कॉकपिट पर नियंत्रण वापस हासिल किया गया।
जांच एजेंसियों के लिए यह घटना केवल एक व्यक्ति की कथित कार्रवाई तक सीमित नहीं है। इसमें भर्ती प्रक्रिया, सुरक्षा जांच, कॉकपिट प्रोटोकॉल, हथियार या धारदार वस्तु की उपलब्धता और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हैं।
घटना में भारतीय कप्तान स्मित मच्छार घायल हुए। उपलब्ध विवरणों के अनुसार उन्होंने हमले के बावजूद विमान को पूरी तरह नियंत्रण से बाहर जाने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कप्तान के कॉकपिट दरवाजे को खोलने के बाद यात्रियों और अन्य चालक दल के सदस्यों को अंदर पहुंचने का अवसर मिला। इससे आरोपी को-पायलट को काबू करने में मदद मिली।
इसके बाद विमान को तबुक की ओर मोड़ा गया और सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। यह पूरा घटनाक्रम विमान में मौजूद अन्य पायलटों और यात्रियों की संयुक्त प्रतिक्रिया से जुड़ा हुआ है।
जांच के सामने कई अहम सवाल हैं। आरोपी को-पायलट की पृष्ठभूमि क्या थी और उसके व्यवहार में पहले कोई चेतावनी संकेत मौजूद थे या नहीं, इसकी पड़ताल होगी।
इसके साथ उसके सोशल मीडिया रिकॉर्ड, संपर्कों, यात्रा विवरण, प्रशिक्षण रिकॉर्ड और मानसिक या वैचारिक पृष्ठभूमि से जुड़े साक्ष्यों की जांच की जा सकती है।
जांच यह भी निर्धारित करेगी कि हमला पहले से योजनाबद्ध था या उड़ान के दौरान अचानक हुआ। इसके अलावा यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि क्या आरोपी ने अकेले कार्रवाई की थी या उसे किसी अन्य व्यक्ति अथवा संगठन से सहायता मिली थी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।