1 अक्टूबर से उत्तर प्रदेश के आठ NCR जिलों में बिना वैध PUCC वाहनों को पेट्रोल, डीजल या CNG नहीं मिलेगा। CAQM के निर्देश के तहत पेट्रोल पंपों पर ANPR और अन्य तकनीक से सत्यापन होगा। मेरठ, मुजफ्फरनगर समेत प्रभावित जिलों में वाहन मालिकों को 30 सितंबर से पहले PUCC जांचना होगा।
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📍 मेरठ, उत्तर प्रदेश 📰 30 सितंबर 2026 ✍️ Apurva Choudhary
1 अक्टूबर से लागू होगा No PUCC, No Fuel नियम
उत्तर प्रदेश के NCR क्षेत्र में वाहन चलाने वालों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। वैध Pollution Under Control Certificate यानी PUCC के बिना वाहनों को पेट्रोल, डीजल और CNG देने पर रोक लगाने की व्यवस्था लागू की जा रही है।
यह कदम Commission for Air Quality Management यानी CAQM के निर्देश के तहत उठाया गया है। आयोग ने 15 मई 2026 को जारी Direction No. 101 के तहत NCR में वैध PUCC के बिना वाहनों में फ्यूल भरने पर रोक की व्यवस्था 1 अक्टूबर से लागू करने का निर्णय लिया था।
इसका सीधा मतलब है कि अगर किसी वाहन का Pollution Under Control Certificate 1 अक्टूबर को वैध नहीं है, तो संबंधित फ्यूल स्टेशन पर वाहन को ईंधन देने से इनकार किया जा सकता है।
UP के इन आठ NCR जिलों में लागू होगी व्यवस्था
उत्तर प्रदेश में NCR के अंतर्गत आने वाले आठ जिले इस व्यवस्था के दायरे में हैं। इनमें गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत और शामली शामिल हैं।
इसलिए मेरठ और मुजफ्फरनगर के वाहन मालिकों के लिए यह बदलाव सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है। इसी तरह गाजियाबाद, नोएडा यानी गौतम बुद्ध नगर और आसपास के इलाकों में रोजाना वाहन चलाने वालों को भी अपने PUCC की वैधता जांचने की जरूरत होगी।
CAQM का यह निर्देश केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। वैध PUCC के बिना फ्यूल देने पर रोक की व्यवस्था पूरे NCR के लिए तय की गई है, जबकि अलग-अलग राज्यों और जिलों में इसके जमीनी क्रियान्वयन की तैयारियां चल रही हैं।
करीब 1,041 फ्यूल स्टेशनों पर तकनीकी व्यवस्था
इस नियम को लागू करने के लिए पेट्रोल पंपों पर Automatic Number Plate Recognition यानी ANPR तकनीक का इस्तेमाल किया जाना है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के आठ NCR जिलों के करीब 1,041 फ्यूल स्टेशनों को इस व्यवस्था से जोड़ा जाना है।
ANPR कैमरा वाहन की नंबर प्लेट को पहचानकर उसके रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल कर सकता है। इसके जरिए यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि वाहन के रिकॉर्ड में PUCC वैध है या नहीं।
कुछ जिलों में कैमरा आधारित व्यवस्था के साथ मोबाइल ऐप और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी परीक्षण शुरू किया गया है। गाजियाबाद में सितंबर के दौरान ऐसी तकनीक के जरिए वाहनों के PUCC की जांच का ट्रायल किया गया।
मेरठ में भी पेट्रोल पंप संचालकों को 30 सितंबर तक ANPR कैमरे और जरूरी तकनीकी व्यवस्था पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय प्रशासन की ओर से पंपों पर नियम के संबंध में सूचना प्रदर्शित करने की तैयारी भी की गई है।
पेट्रोल पंप पर कैसे होगी जांच?
नई व्यवस्था में वाहन फ्यूल स्टेशन पर पहुंचेगा तो उसकी नंबर प्लेट की पहचान तकनीकी सिस्टम के जरिए की जा सकती है। नंबर प्लेट से संबंधित जानकारी के आधार पर वाहन के PUCC स्टेटस का सत्यापन किया जाएगा।
अगर सिस्टम में वैध PUCC उपलब्ध है, तो सामान्य प्रक्रिया के तहत फ्यूल दिया जा सकेगा। वहीं अगर PUCC वैध नहीं है या रिकॉर्ड में इसकी वैधता नहीं मिलती, तो फ्यूल देने से इनकार किया जा सकता है।
CAQM की व्यवस्था का मकसद वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना है। आयोग ने अपने निर्देश में वाहन क्षेत्र को NCR में PM2.5, NOx और CO जैसे प्रदूषकों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले क्षेत्रों में शामिल किया है।
मेरठ और मुजफ्फरनगर के वाहन मालिक अभी क्या करें?
सबसे पहले वाहन का PUCC स्टेटस चेक करना जरूरी है। अगर प्रमाणपत्र पहले ही एक्सपायर हो चुका है या जल्द एक्सपायर होने वाला है, तो अधिकृत PUC सेंटर से वाहन की जांच कराकर नया प्रमाणपत्र बनवाया जा सकता है।
Parivahan के डिजिटल सिस्टम पर वाहन के PUCC स्टेटस को देखा जा सकता है। सरकारी Parivahan व्यवस्था में वाहन नंबर के जरिए PUCC Status जांचने की सुविधा उपलब्ध है।
mParivahan प्लेटफॉर्म भी वाहन से जुड़े दस्तावेजों और PUCC की वैधता की जानकारी देखने की सुविधा देता है।
इसलिए वाहन मालिकों के लिए बेहतर है कि वे 1 अक्टूबर की समयसीमा से पहले अपने वाहन का PUCC स्टेटस जांच लें, खासकर अगर उन्हें रोजाना मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, नोएडा या NCR के दूसरे हिस्सों में सफर करना पड़ता है।
सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं, CNG भी दायरे में
इस नियम को केवल पेट्रोल और डीजल से जोड़कर देखना पूरी तरह सही नहीं होगा। CAQM के Direction No. 101 में वैध PUCC के बिना वाहनों को फ्यूल देने पर रोक की व्यवस्था है और जमीनी रिपोर्टिंग में पेट्रोल, डीजल के साथ CNG स्टेशनों पर भी इसके अनुपालन की तैयारी बताई गई है।
इसका मतलब है कि CNG वाहन मालिकों को भी अपने PUCC की वैधता पर ध्यान देना होगा। मेरठ समेत NCR के जिलों में संबंधित फ्यूल स्टेशनों को तकनीकी और परिचालन व्यवस्था पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
नियम का मकसद क्या है?
NCR में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो जाती है। वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन इस प्रदूषण में योगदान देने वाले प्रमुख स्रोतों में शामिल है।
CAQM ने इसी वजह से वाहन क्षेत्र से जुड़े कई उपायों के साथ PUCC आधारित फ्यूलिंग व्यवस्था को लागू करने का फैसला किया है। आयोग के मुताबिक वाहनों से निकलने वाले PM2.5, nitrogen oxides और carbon monoxide जैसे प्रदूषकों को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
PIB के अनुसार जून 2026 में CAQM की समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश समेत NCR राज्यों को 1 अक्टूबर 2026 से वैध PUCC के बिना वाहनों को फ्यूल नहीं देने संबंधी Direction No. 101 के लिए ANPR कैमरों की स्थापना और संचालन की तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा गया था।
पेट्रोल पंप संचालकों के लिए भी नई जिम्मेदारी
इस व्यवस्था का असर केवल वाहन मालिकों पर नहीं बल्कि फ्यूल स्टेशन संचालकों पर भी पड़ेगा। उन्हें निर्धारित तकनीकी सिस्टम को स्थापित और संचालित करना होगा।
मेरठ में स्थानीय अधिकारियों ने पंप संचालकों को 30 सितंबर तक ANPR और अन्य जरूरी तकनीकी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। नियमों का अनुपालन नहीं करने पर प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
शामली में भी जिला प्रशासन ने NCR के अंतर्गत आने वाले फ्यूल स्टेशनों को Direction No. 101 के तहत आवश्यक तैयारी और समयबद्ध अनुपालन के निर्देश दिए हैं।
क्या 1 अक्टूबर से हर वाहन की मैनुअल जांच होगी?
व्यवस्था का उद्देश्य तकनीक आधारित सत्यापन करना है, इसलिए हर वाहन के कागज को लंबे समय तक मैनुअली जांचने की जरूरत कम हो सकती है। ANPR कैमरा या संबंधित डिजिटल सिस्टम वाहन की पहचान कर PUCC स्टेटस सत्यापित करने में मदद करेगा।
हालांकि अलग-अलग जिलों में जमीनी स्तर पर तकनीकी व्यवस्था की स्थिति अलग हो सकती है। गाजियाबाद में सितंबर में ऐप आधारित ट्रायल और पेट्रोल पंप कर्मचारियों की ट्रेनिंग की रिपोर्ट सामने आई थी।
इसलिए शुरुआती चरण में कुछ स्थानों पर तकनीकी सत्यापन के साथ वैकल्पिक जांच प्रक्रिया भी इस्तेमाल हो सकती है।
PUCC नहीं है तो अभी क्या करें?
वाहन मालिकों को 30 सितंबर की रात तक इंतजार करने के बजाय पहले ही अपने वाहन का PUCC स्टेटस देख लेना चाहिए। अगर प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है तो अधिकृत PUC सेंटर पर वाहन की प्रदूषण जांच करानी होगी।
Parivahan के आधिकारिक सिस्टम में PUCC से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है और mParivahan के जरिए भी वाहन से संबंधित दस्तावेजों की वैधता देखी जा सकती है।
नए प्रमाणपत्र के बाद वाहन मालिक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डिजिटल रिकॉर्ड में भी अपडेट सही तरीके से दिखाई दे। इससे फ्यूल स्टेशन पर तकनीकी सत्यापन के समय परेशानी की संभावना कम हो सकती है।
1 अक्टूबर से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, नोएडा या UP के किसी अन्य NCR जिले में वाहन चलाते हैं, तो अपने वाहन का PUCC स्टेटस अभी जांच लें।
PUCC एक्सपायर हो चुका है तो अधिकृत सेंटर से नया प्रमाणपत्र बनवाएं। साथ ही वाहन के नंबर, RC और PUCC रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी हो तो समय रहते संबंधित परिवहन विभाग या अधिकृत सेवा माध्यम से उसे ठीक कराना बेहतर होगा।
NCR में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक और सख्त कदम
1 अक्टूबर से लागू होने वाली यह व्यवस्था NCR में वाहन प्रदूषण नियंत्रण के लिए CAQM की ओर से उठाए गए प्रमुख कदमों में शामिल है। इसका सबसे सीधा असर उन वाहन मालिकों पर पड़ेगा जिनके पास वैध PUCC नहीं है।
मेरठ और मुजफ्फरनगर समेत आठ UP NCR जिलों में करीब 1,041 फ्यूल स्टेशनों को तकनीकी व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। ऐसे में वाहन मालिकों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि 1 अक्टूबर से पहले अपने PUCC की वैधता सुनिश्चित कर लें, ताकि फ्यूल स्टेशन पर वाहन रोकने की स्थिति न बने।