सोनीपत में पुलिस ने नंदू गैंग से जुड़े 2 शूटरों को मुठभेड़ में मार गिराया। मामला 2 करोड़ रुपये की रंगदारी और फायरिंग से जुड़ा है। पुलिस ने घटनास्थल से हथियार बरामद किए हैं।
सोनीपत | 11 सितंबर 2026
सोनीपत में शुक्रवार को पुलिस और नंदू गैंग से जुड़े बताए जा रहे 2 शूटरों के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस के मुताबिक, दोनों बदमाशों को घेरने के बाद फायरिंग हुई और जवाबी कार्रवाई में दोनों मारे गए। घटनास्थल से हथियार बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मामला 2 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और इसके बाद एक दफ्तर पर फायरिंग किए जाने की वारदात से जुड़ा बताया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों का संबंध रंगदारी वसूली के एक मामले से था। इस मामले में 2 करोड़ रुपये की रकम मांगने का आरोप है।
पुलिस को शूटरों की लोकेशन मिलने के बाद उनकी घेराबंदी की गई। इसी दौरान कथित तौर पर पुलिस और बदमाशों के बीच गोलीबारी हुई। मुठभेड़ के बाद दोनों को मृत पाया गया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, रंगदारी की मांग के बाद दफ्तर को निशाना बनाकर फायरिंग की गई थी। इस वारदात ने सोनीपत में कारोबारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और संगठित अपराध के खतरे को लेकर फिर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, फायरिंग की पूरी परिस्थितियों, दफ्तर के मालिक या कारोबारी की पहचान और घटना में आरोपियों की सटीक भूमिका की विस्तृत जानकारी पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस कार्रवाई के बाद घटनास्थल से हथियार बरामद होने की जानकारी सामने आई है। बरामद हथियारों की संख्या और उनकी फॉरेंसिक जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि उनका इस्तेमाल पहले हुई फायरिंग में हुआ था या नहीं।
पुलिस अब मुठभेड़ की परिस्थितियों के साथ-साथ दोनों आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और गैंग के दूसरे सदस्यों से उनके संबंधों की भी जांच कर रही है।
हरियाणा में गैंगवार, रंगदारी और कारोबारी प्रतिष्ठानों पर फायरिंग के मामले लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं। सोनीपत और आसपास के इलाकों में अलग-अलग गैंग से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई करती रही है।
इससे पहले भी सोनीपत में रंगदारी की मांग से जुड़ी फायरिंग के मामले सामने आए हैं। 2024 में गोहाना में मातूराम हलवाई की दुकान पर 2 करोड़ रुपये की रंगदारी के लिए फायरिंग की घटना सामने आई थी। उस मामले में पुलिस ने 30 से 40 राउंड फायरिंग की बात कही थी।
नंदू गैंग का नाम हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में रंगदारी तथा संगठित आपराधिक गतिविधियों से जुड़े कई मामलों में सामने आता रहा है। पुलिस और जांच एजेंसियां गैंग से जुड़े संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखती रही हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति को गैंग का सदस्य या किसी वारदात का आरोपी बताने के लिए पुलिस रिकॉर्ड और जांच की पुष्टि जरूरी है। इसलिए मौजूदा मामले में भी आरोपियों की भूमिका को पुलिस जांच के अंतिम निष्कर्ष के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
मुठभेड़ के बाद पुलिस के सामने अब कई अहम सवाल हैं। दोनों शूटरों तक हथियार और वाहन कैसे पहुंचे, रंगदारी की रकम किसके इशारे पर मांगी गई और फायरिंग की वारदात में उनका क्या सटीक रोल था, इन बिंदुओं की जांच जरूरी होगी।
पुलिस गैंग के दूसरे सदस्यों, फंडिंग नेटवर्क और रंगदारी के संभावित पीड़ितों से जुड़े लिंक भी खंगाल सकती है।
रंगदारी के लिए फायरिंग की घटनाएं कारोबारियों के बीच असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं। ऐसे मामलों में पुलिस की त्वरित कार्रवाई के साथ शिकायतकर्ताओं और संभावित पीड़ितों को सुरक्षा देना भी महत्वपूर्ण होता है।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण से देखें तो संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल मुठभेड़ पर्याप्त नहीं होती। गैंग के वित्तीय नेटवर्क, हथियारों की आपूर्ति, डिजिटल संचार और स्थानीय सहयोगियों तक पहुंचना भी जरूरी होता है।
सोनीपत में 2 शूटरों का एनकाउंटर 2 करोड़ रुपये की रंगदारी और फायरिंग के मामले से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ के बाद दोनों बदमाश मारे गए और घटनास्थल से हथियार बरामद हुए।
अब जांच का अहम हिस्सा यह होगा कि रंगदारी और फायरिंग के पीछे पूरा नेटवर्क कौन चला रहा था। पुलिस की आगे की कार्रवाई से गैंग के अन्य सदस्यों और इस मामले से जुड़े दूसरे आपराधिक कनेक्शन की तस्वीर साफ हो सकती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।