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2008 अहमदाबाद बम धमाका मामला: सुप्रीम कोर्ट ने अहमद बावा की मौत की सजा पर लगाई रोक

Mohammad Naved • 2026-10-01 13:30:57
2008 अहमदाबाद बम धमाका मामला: सुप्रीम कोर्ट ने अहमद बावा की मौत की सजा पर लगाई रोक

2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी अहमद बावा की मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई और गुजरात सरकार से जवाब मांगा। मामला अब शीर्ष अदालत में है।


📍

नई दिल्ली

🗓️

1 अक्टूबर 2026

✍️

Mohd Naved

सुप्रीम कोर्ट में अहमद बावा की याचिका पर सुनवाई

2008 अहमदाबाद सीरियल बम धमाका मामले में मौत की सजा पाए अहमद बावा उर्फ अब्बू अबू बकर बरेलवी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उसकी मौत की सजा पर रोक लगाते हुए गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति एजी मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अहमद बावा की ओर से गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।


गुजरात हाई कोर्ट ने बरकरार रखी थी मौत की सजा

अहमद बावा उन 38 दोषियों में शामिल है, जिन्हें अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में ट्रायल कोर्ट ने फरवरी 2022 में मौत की सजा सुनाई थी। बाद में गुजरात हाई कोर्ट ने जुलाई 2026 में 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद मौत की सजा पाए दोषियों के लिए अगला कानूनी रास्ता सुप्रीम कोर्ट में अपील का था। अहमद बावा की याचिका इसी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।


सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश क्या बताता है

सुप्रीम कोर्ट ने अहमद बावा की याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने फिलहाल उसकी मौत की सजा के अमल पर रोक लगाई है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि दोषसिद्धि समाप्त हो गई है या अहमद बावा को मामले में बरी कर दिया गया है। मौत की सजा पर रोक फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सजा के अमल से संबंधित है। मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला आगे की सुनवाई में होगा।


2008 में अहमदाबाद में हुए थे सिलसिलेवार धमाके

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में सिलसिलेवार बम धमाकों ने शहर को दहला दिया था। अलग-अलग स्थानों पर हुए धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों समेत कई इलाकों को निशाना बनाया गया था।

जांच और अभियोजन के अनुसार इन हमलों को इंडियन मुजाहिदीन से जोड़ा गया था। मामले में लंबी जांच और सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि 28 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया था।


2022 में विशेष अदालत का बड़ा फैसला

फरवरी 2022 में विशेष अदालत ने 49 दोषियों को सजा सुनाई। इनमें 38 दोषियों को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद दी गई थी। यह फैसला इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया में अहम पड़ाव था।

मौत की सजा को लागू करने के लिए हाई कोर्ट की पुष्टि जरूरी थी। इसके बाद दोषियों की अपील और सजा की पुष्टि से जुड़ी कार्यवाही गुजरात हाई कोर्ट के सामने चली।

जुलाई 2026 में हाई कोर्ट का फैसला

गुजरात हाई कोर्ट ने जुलाई 2026 में विशेष अदालत के फैसले की समीक्षा के बाद 38 दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा। 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद भी कायम रही।

इसके बाद मौत की सजा पाए दोषियों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील का रास्ता खुला रहा। सितंबर 2026 में इस मामले के एक अन्य मौत की सजा पाए दोषी को सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी के लिए 7 दिन की पैरोल भी दी गई थी।


अहमद बावा का नाम मामले में पहले से दर्ज

अहमद बावा का नाम इस मामले की जांच के शुरुआती दौर से सामने आया था। 2008 में उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों ने उसे इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े नेटवर्क के संदर्भ में आरोपी बनाया था। बाद की न्यायिक कार्यवाही में उसे अहमदाबाद ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराया गया।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी आरोपी या दोषी को किसी संगठन से जोड़ने संबंधी तथ्य अदालत में दर्ज निष्कर्षों और मामले की न्यायिक स्थिति के संदर्भ में ही देखे जाने चाहिए।


अब आगे क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद गुजरात सरकार को याचिका पर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत मामले की सुनवाई आगे बढ़ाएगी और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों, हाई कोर्ट के फैसले तथा दोषी की कानूनी दलीलों की समीक्षा करेगी।

मौत की सजा से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के सामने दोषसिद्धि और सजा दोनों को चुनौती देने के कानूनी आधार मौजूद रहते हैं। अंतिम निर्णय अदालत की आगे की सुनवाई और आदेशों पर निर्भर करेगा।

अहमदाबाद ब्लास्ट केस की कानूनी स्थिति

अहमद बावा को मिली मौजूदा राहत को बरी होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उपलब्ध न्यायिक स्थिति के अनुसार उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा पर गुजरात हाई कोर्ट का फैसला पहले से मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मौत की सजा के अमल पर रोक लगाई है और गुजरात सरकार से जवाब मांगा है।

इस मामले में अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आगे के आदेशों से तय होगी। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को सजा के अमल पर न्यायिक रोक और अपील की प्रक्रिया के रूप में समझना अधिक सटीक है।

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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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