SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने ECINet की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा, नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए घर पर दस्तावेज लेने और दिल्ली-महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों की समयसीमा बढ़ाने समेत नौ फैसले लिए। आयोग ने कहा कि फैसलों को पूर्ण आयोग की मंजूरी मिली है। SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों में विशेष नामांकन अभियान भी चलेगा।
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नई दिल्ली | 27 सितंबर 2026 | अपूर्वा चौधरी
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के 9 बड़े फैसले
Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक और संस्थागत विवाद के बीच चुनाव आयोग ने कई अहम प्रक्रियात्मक बदलावों की घोषणा की है। 26 सितंबर को नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की पूर्ण आयोग बैठक हुई। बैठक के बाद आयोग ने SIR, मतदाता सुनवाई, ECINet, Form 6 और आंतरिक कामकाज से जुड़े फैसलों की जानकारी दी। आयोग ने कहा कि इन फैसलों को पूर्ण आयोग की मंजूरी प्राप्त है।
इन फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ECINet की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा और उन मतदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान करना है जिन्हें SIR के दौरान पुराने रिकॉर्ड से unmapped या logical discrepancies के आधार पर नोटिस मिला है। इसके अलावा दिल्ली और महाराष्ट्र में claims और objections दाखिल करने की समयसीमा भी बढ़ाई गई है।
ECINet की होगी स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा
चुनाव आयोग ने ECINet सिस्टम की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। समिति की अध्यक्षता Senior Deputy Election Commissioner करेंगे और इसमें IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा।
इस समिति का उद्देश्य यह देखना होगा कि ECINet संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं। आयोग के मुताबिक, रिपोर्ट मिलने के बाद जरूरी सुधारों पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज और मतदाता सूची से जुड़े IT सिस्टम को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई थी। Indian Express ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। आयोग ने इन टिप्पणियों को सामान्य संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा बताया है।
ECINet के नए IT बदलावों की पहले समीक्षा होगी
आयोग ने यह भी तय किया है कि भविष्य में नए IT modules और portals से जुड़ी पहल पहले Committee of Officers के सामने रखी जाएगी और उसके बाद आयोग के समक्ष मंजूरी के लिए लाई जाएगी।
आयोग ने कहा है कि field officers को उनकी वैधानिक जिम्मेदारियों के अनुरूप ECINet पर role-based access उपलब्ध है। अगर फील्ड स्तर पर सिस्टम में अतिरिक्त flexibility की जरूरत होगी तो उसे भी operational किया जाएगा।
इस फैसले का उद्देश्य मतदाता सूची से जुड़े तकनीकी कामकाज में निगरानी और प्रक्रिया को अधिक संस्थागत बनाना बताया गया है।
SIR नोटिस पाने वालों के घर जाएगा BLO
SIR के दौरान जिन मतदाताओं को पुराने रिकॉर्ड से unmapped होने या logical discrepancies के आधार पर नोटिस मिला है, उनके लिए आयोग ने व्यक्तिगत सुनवाई की प्रक्रिया को आसान किया है।
अब सामान्य स्थिति में ऐसे मतदाताओं को अपने दस्तावेज लेकर ERO या AERO कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। Booth Level Officer यानी BLO उनके घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेगा और उन्हें ECINet पर अपलोड करेगा। इसके बाद Electoral Registration Officer यानी ERO मामले पर निर्णय लेगा।
आयोग के अनुसार, केवल असाधारण परिस्थितियों में ही व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत होगी।
सुनवाई हुई तो ऑनलाइन विकल्प को प्राथमिकता
आयोग ने कहा है कि अगर किसी मामले में सुनवाई आवश्यक होती है तो उसे संभव होने पर ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। इससे विशेष रूप से उन मतदाताओं को सुविधा मिलने की उम्मीद है जिन्हें उम्र, बीमारी, दूरी या अन्य कारणों से कार्यालय पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
इसके अलावा जरूरत पड़ने पर मतदाता अपने स्थान पर परिवार के किसी वयस्क सदस्य को सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है। ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को मजबूत करने का निर्देश भी दिया गया है।
जरूरतमंद मतदाताओं के लिए Help Desk और Special Camp
चुनाव आयोग ने District Election Officers को जरूरत के अनुसार help desks और special camps आयोजित करने का निर्देश दिया है।
इन सुविधाओं में खास तौर पर night shelters में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीब और बेघर नागरिकों तथा ऐसे अन्य मतदाताओं को सहायता देने पर जोर दिया गया है जिन्हें SIR से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी हो सकती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेज या ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में पात्र मतदाता अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने से वंचित न रहें।
दिल्ली में claims-objections की तारीख बढ़ी
दिल्ली में SIR से जुड़े claims और objections दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। इनके निपटारे की समयसीमा भी बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 कर दी गई है।
पहले दिल्ली में claims और objections दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर थी। नई समयसीमा के कारण मतदाताओं को अपने नाम, रिकॉर्ड या अन्य आपत्तियों से संबंधित दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
दिल्ली के मामले में नई प्रक्रिया के तहत BLO द्वारा घर जाकर दस्तावेज लेने की व्यवस्था भी लागू होगी।
महाराष्ट्र में भी बढ़ी समयसीमा
महाराष्ट्र में claims और objections दाखिल करने की समयसीमा 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। इनके निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर 2026 तक कर दी गई है।
यह विस्तार महाराष्ट्र के Chief Electoral Officer की ओर से प्राप्त अनुरोध के बाद किया गया।
इससे महाराष्ट्र के मतदाताओं और संबंधित चुनाव अधिकारियों को SIR से जुड़े दावों, आपत्तियों और नोटिसों के निपटारे के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
Form 6 को लेकर आयोग ने स्थिति स्पष्ट की
Form 6 नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आयोग ने कहा कि SIR अवधि के दौरान Form 6 के साथ जुड़ी declaration लागू रहेगी, जबकि non-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे।
हालांकि, इस मुद्दे का एक हिस्सा अभी चर्चा में है। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक ECINet पर Form 6 के ऑनलाइन संस्करण में जो अतिरिक्त सवाल जोड़े जाने की बात सामने आई थी, आयोग की नई घोषणा में उसके हटाए जाने या मौजूदा स्थिति पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
इसलिए SIR अवधि के Form 6 और सामान्य non-SIR अवधि के Form 6 के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण होगा।
SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों में विशेष नामांकन अभियान
आयोग ने बताया कि 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, जिनमें बिहार और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं। इन राज्यों में जिन पात्र लोगों के नाम SIR के दौरान छूट गए हैं या बाद में छूटे हैं, वे continuous updation प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के सामने नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आयोग ने Chief Electoral Officers, District Election Officers और EROs को ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले पात्र नागरिक भी शामिल हैं।
गोवा के मामले में आयोग ने बताया कि 97 ऐसे मतदाताओं में से 81 ने Form 6 भर दिया है। Indian Express के मुताबिक, इन मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल कराने के लिए राज्य के Chief Electoral Officer को सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
आयोग ने आंतरिक कामकाज में भी बदलाव किए
SIR से सीधे जुड़े फैसलों के अलावा आयोग ने अपने आंतरिक कामकाज को लेकर भी कुछ प्रक्रियाएं तय की हैं। अब आयोग की बैठकों के agenda पहले से circulate किए जाएंगे और meetings के minutes जारी किए जाएंगे।
आयोग ने अधिकारियों की foreign trips के लिए आयोग की मंजूरी लेने, Annual Performance Appraisal Reports को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने और Commissioners की ओर से अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के पालन की प्रक्रिया पर भी जोर दिया है।
इन फैसलों को हाल में सामने आई उन रिपोर्टों के संदर्भ में देखा जा रहा है जिनमें आयोग के दो चुनाव आयुक्तों की ओर से विभिन्न प्रक्रियाओं और IT सिस्टम से जुड़े मामलों पर लिखित आपत्तियों का उल्लेख किया गया था।
आयोग ने SIR फैसलों को सर्वसम्मत बताया
26 सितंबर की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े उसके फैसलों को पूर्ण आयोग की मंजूरी मिली है। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के विभिन्न चरणों के कार्यक्रमों को तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी।
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर विपक्षी दलों ने अलग-अलग आपत्तियां और राजनीतिक दावे किए हैं। इन दावों को आयोग के आधिकारिक पक्ष से अलग समझना जरूरी है। वर्तमान स्थिति में किसी राजनीतिक दल की ओर से लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
विवाद में Form 6 और ECINet अभी भी अहम मुद्दे
नए फैसलों के बावजूद SIR से जुड़े सभी सवाल खत्म नहीं हुए हैं। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार Form 6 के ऑनलाइन संस्करण में अतिरिक्त सवाल से जुड़े मुद्दे और पश्चिम बंगाल में कुछ appeals से जुड़े सवाल अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।
ECINet की स्वतंत्र समीक्षा इस संदर्भ में महत्वपूर्ण होगी क्योंकि मतदाता सूची से जुड़े कई कार्य इसी डिजिटल सिस्टम के माध्यम से संचालित होते हैं। हालांकि समीक्षा समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सिस्टम में कौन-कौन से बदलाव या सुधार जरूरी पाए जाते हैं।
अभी SIR पर क्या बदला है?
फिलहाल चुनाव आयोग ने SIR को रोकने की घोषणा नहीं की है। इसके बजाय उसने प्रक्रिया के कुछ हिस्सों में बदलाव किए हैं। नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए BLO की घर-घर दस्तावेज प्रक्रिया, अपवादस्वरूप ऑनलाइन सुनवाई, help desks और special camps जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
दिल्ली में claims और objections की तारीख 30 अक्टूबर तथा disposal की तारीख 30 नवंबर कर दी गई है। महाराष्ट्र में ये तारीखें क्रमशः 12 अक्टूबर और 10 नवंबर हैं। साथ ही ECINet की समीक्षा के लिए IIT या IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल करने वाली समिति बनाई जाएगी। इसकी रिपोर्ट चुनाव आयोग के सामने रखी जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ आयोग ने अपने फैसलों को पूर्ण आयोग की मंजूरी वाला बताया है, जबकि दूसरी तरफ हालिया रिपोर्टों में आयोग के भीतर दर्ज असहमतियों और प्रक्रियागत सवालों का उल्लेख हुआ है। इसलिए SIR विवाद की अगली दिशा ECINet समीक्षा, Form 6 से जुड़े स्पष्टीकरण, राज्यों में claims-objections के निपटारे और आगे आने वाली न्यायिक या संस्थागत कार्रवाई से काफी हद तक तय होगी।