जम्मू-कश्मीर विधानसभा में वक्फ बिल पर चर्चा को लेकर AAP और BJP विधायकों के बीच तीखी झड़प हुई। जानिए पूरी खबर विस्तार से।
श्रीनगर, (Shah Times) । जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन बिल को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला। सदन में आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई। वक्फ कानून पर चर्चा की मांग को लेकर शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते पूरे सदन में तनाव का माहौल पैदा कर गया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेताओं ने वक्फ कानून को लेकर गहन चर्चा की मांग की। एनसी विधायकों का कहना था कि यह विषय संवेदनशील है और इस पर गंभीरता से बहस होनी चाहिए। पार्टी के वरिष्ठ नेता नज़ीर ग़ुरेज़ी और तनवीर सादिक के नेतृत्व में सदस्यों ने प्रश्नकाल स्थगित करने का प्रस्ताव भी रखा। इस प्रस्ताव का कांग्रेस और कुछ निर्दलीय विधायकों ने भी समर्थन किया।
भारतीय जनता पार्टी ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। बीजेपी विधायक सुनील शर्मा के नेतृत्व में पार्टी के सदस्य विरोध में खड़े हो गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और नारेबाज़ी हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। विधानसभा परिसर के एंट्री गेट पर भी AAP और BJP विधायकों के बीच झड़प हुई, जिसमें हल्की धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आईं।
हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वक्फ बिल से जुड़ा मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए सदन की प्रक्रिया के अनुसार इस पर चर्चा संभव नहीं है। उन्होंने नियम 58 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अदालत में लंबित मामलों पर विधानसभा में चर्चा नहीं की जा सकती।
गौरतलब है कि सोमवार को भी इसी मुद्दे को लेकर सदन में भारी हंगामा हुआ था, जिसके चलते अध्यक्ष को कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी थी। बजट सत्र के दौरान यह पहली बार था जब कार्यवाही को बाधित करना पड़ा।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का सत्र मंगलवार को तब हंगामेदार हो गया जब आम आदमी पार्टी के विधायक मेहराज मलिक और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के विधायक वहीद पारा के बीच तीखी बहस हुई। देखते ही देखते मामला इतना बिगड़ गया कि दोनों नेताओं के बीच धक्का-मुक्की और जुबानी जंग तक हो गई, जिससे सदन का माहौल बेहद तनावपूर्ण बन गया।
मुफ्ती मोहम्मद सईद पर टिप्पणी से भड़का विवाद
AAP विधायक मेहराज मलिक द्वारा PDP संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद पर की गई टिप्पणी ने राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी। पीडीपी समर्थकों ने इसे बेहद अपमानजनक करार दिया और विधानसभा परिसर के बाहर मलिक का घेराव कर लिया। उन्होंने मलिक पर युवाओं को गुमराह करने और भ्रष्टाचार में लिप्त होने के गंभीर आरोप लगाए।
जवाब में मेहराज मलिक ने पलटवार करते हुए पीडीपी को भाजपा की “बी-टीम” करार दिया और कहा कि जम्मू-कश्मीर की आज की हालत के लिए पीडीपी जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि PDP ने 2014 में भाजपा से गठबंधन कर राज्य की नींव को ही कमजोर किया।
विधानसभा परिसर में आरोप-प्रत्यारोप और हाथापाई
विवाद विधानसभा परिसर तक ही सीमित नहीं रहा। पीडीपी के दो समर्थकों ने मलिक पर व्यक्तिगत आरोप लगाते हुए उन्हें घेर लिया और ठगी व पत्रकार उत्पीड़न के आरोप भी लगाए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वहां मौजूद अन्य लोगों को बीच-बचाव करना पड़ा।
इतना ही नहीं, पीडीपी समर्थकों ने यह तक कह दिया कि मलिक को नेशनल कॉन्फ्रेंस से फंडिंग मिलती है ताकि वे विपक्ष को कमजोर कर सत्तारूढ़ दल का समर्थन कर सकें। मलिक ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर राजनीतिक साजिश बताया।
वक्फ बिल और भाजपा की नाराज़गी
उधर, वक्फ बिल को लेकर भी सदन में तनाव जारी रहा। नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अल्ताफ अहमद कालू ने स्थगन प्रस्ताव की मांग की, जिससे माहौल और गरमा गया। बहस के दौरान कुछ विधायक आपस में भिड़ भी गए।
इसी बीच, भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने मेहराज मलिक पर हिंदू धर्म के अपमान का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मलिक ने तिलक लगाने को "पाप" कहा है, जो किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा ने इस बयान पर विधानसभा में कार्रवाई की मांग की है।
जनता के मुद्दे हाशिए पर
राजनीतिक झगड़ों के बीच आम जनता से जुड़े मुद्दे विधानसभा में कहीं गुम हो गए हैं। विपक्षी दलों के बीच बढ़ता विवाद और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप का दौर लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।