केन्या के माउंट एल्गॉन में अध्ययन ने अफ्रीकी हाथियों के संभावित Self-Medication व्यवहार के संकेत दर्ज किए। 35 पौधों और 4 मिट्टी-खनिज संसाधनों की पहचान हुई।
माउंट एल्गॉन, केन्या | 24 September 2026
By Mohd Haris
अफ्रीकी हाथियों के व्यवहार पर नई रिसर्च
अफ्रीकी हाथियों को लंबे समय से उनकी याददाश्त, सामाजिक व्यवहार और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के लिए जाना जाता है। अब वैज्ञानिक शोध ने उनके एक और दिलचस्प व्यवहार की ओर ध्यान खींचा है। केन्या के माउंट एल्गॉन क्षेत्र में स्थानीय विशेषज्ञों की प्रत्यक्ष टिप्पणियों के आधार पर ऐसे संकेत मिले हैं कि अफ्रीकी हाथी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के दौरान कुछ खास पौधों और प्राकृतिक संसाधनों को चुन सकते हैं।
24 September 2026 को प्रकाशित अध्ययन में 35 पौधों की प्रजातियों को संभावित औषधीय उपयोग से जोड़ा गया। शोधकर्ताओं ने 4 तरह की मिट्टी, खनिज या क्ले संसाधनों की जानकारी भी दर्ज की। हालांकि शोधकर्ता इसे अंतिम रूप से सिद्ध Self-Medication नहीं बताते। अध्ययन के निष्कर्षों में "putatively" यानी संभावित रूप से स्व-उपचार करने वाले व्यवहार की बात कही गई है।
अध्ययन का केंद्र केन्या और युगांडा की सीमा के पास स्थित माउंट एल्गॉन क्षेत्र रहा। यह इलाका पौधों की विविधता और गुफाओं में मौजूद मिट्टी तथा खनिज संसाधनों के लिए जाना जाता है।
शोधकर्ताओं ने 8 स्थानीय विशेषज्ञों से बातचीत की। इनमें वन्यजीव समुदाय के स्काउट, एक सेवानिवृत्त रेंजर, स्थानीय बुजुर्ग और क्षेत्र में लंबे समय से हाथियों को देखने वाले लोग शामिल थे। सभी प्रतिभागियों के पास हाथियों के व्यवहार का 20 वर्ष से अधिक का अनुभव बताया गया।
यह अध्ययन अक्टूबर 2023 से September 2024 के बीच किए गए इंटरव्यू और स्थानीय अवलोकनों पर आधारित था। शोध में पौधों की पहचान के लिए हर्बेरियम सैंपल भी तैयार किए गए और उनकी टैक्सोनॉमिक पहचान की गई।
शोध में 35 पौधों की प्रजातियां 23 वनस्पति परिवारों से संबंधित पाई गईं। इनके अलावा मिट्टी, खनिज और क्ले से जुड़े 4 प्राकृतिक संसाधनों का भी उल्लेख हुआ।
इन पौधों में पत्तियां, छाल और जड़ें प्रमुख रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले हिस्से बताए गए। अध्ययन में दर्ज पौधों में Aloe arborescens, Bersama abyssinica, Coleus barbatus, Dombeya burgessiae, Dombeya rotundifolia, Dombeya torrida subsp. torrida, Ficus natalensis और Kuloa usambarensis को विशेष रूप से उन संसाधनों में रखा गया जिन्हें बीमार या कमजोर हाथियों द्वारा औषधीय उद्देश्य से लक्षित किए जाने के संकेत मिले।
यहां एक अहम वैज्ञानिक सावधानी जरूरी है। इन पौधों के बारे में यह निष्कर्ष नहीं निकाला गया है कि वे निश्चित रूप से हाथियों की बीमारी ठीक करते हैं। अध्ययन ने स्थानीय लोगों की प्रत्यक्ष टिप्पणियों और उनके पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक व्यवहार वर्गीकरण के साथ दर्ज किया है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक कुछ मामलों में हाथियों द्वारा पौधों का इस्तेमाल सामान्य चराई से अलग दिखाई दिया। स्थानीय विशेषज्ञों ने ऐसे उदाहरण बताए जहां हाथी बीमारी की स्थिति में किसी खास पौधे की ओर जाते थे।
एक पौधे Croton macrostachyus के बारे में बताया गया कि visibly sick हाथी उसकी छाल खाते देखे गए। कुछ अन्य पौधों के बारे में भी बीमारी या कमजोर स्थिति से जुड़े चयनात्मक सेवन के विवरण मिले। Nature
शोध में ऐसे व्यवहार को सामान्य भोजन और संभावित औषधीय सेवन के बीच अंतर समझने के लिए अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया।
रिसर्च का एक अहम पहलू Mother Elephant और उसके Calf से जुड़ा व्यवहार है। स्थानीय विशेषज्ञों ने ऐसे मामलों की जानकारी दी जिसमें मां हाथियों द्वारा कुछ पौधों को बच्चों तक पहुंचाने या खिलाने की बात सामने आई।
Coleus barbatus, Ficus natalensis और Bersama abyssinica समेत कुछ पौधों के बारे में ऐसे विवरण दर्ज किए गए। एक मामले में मां हाथी द्वारा पौधे को दूध के साथ बच्चे तक पहुंचाने की जानकारी दी गई, जिसे स्थानीय लोग एक तरह के "immunization" व्यवहार के रूप में देखते हैं।
हालांकि "immunization" शब्द यहां स्थानीय व्याख्या के संदर्भ में है। इसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में वैक्सीन या प्रतिरक्षा उपचार के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
अध्ययन में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया। 39 प्राकृतिक संसाधनों में से 34 के बारे में स्थानीय लोगों ने बताया कि उनका इस्तेमाल पारंपरिक मानव चिकित्सा में भी होता है।
इनमें से 25 संसाधनों को स्थानीय विशेषज्ञों ने हाथियों के लिए भी औषधीय उपयोग से जोड़ा। इससे वैज्ञानिकों के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा होता है कि इन व्यवहारों की शुरुआत कैसे हुई। Nature
क्या हाथियों ने खुद इन पौधों का चयन सीखा? क्या स्थानीय समुदायों ने हाथियों को देखकर कुछ पौधों के औषधीय इस्तेमाल की जानकारी हासिल की? या दोनों प्रजातियों ने अलग-अलग परिस्थितियों में समान प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल विकसित किया? मौजूदा अध्ययन इन सवालों का अंतिम जवाब नहीं देता।
Animal Self-Medication को वैज्ञानिक भाषा में Zoopharmacognosy के व्यापक क्षेत्र में देखा जाता है। इसमें जानवरों द्वारा बीमारी, चोट या परजीवी संक्रमण जैसी परिस्थितियों में ऐसे प्राकृतिक पदार्थों का चयन शामिल हो सकता है जिनका सामान्य भोजन में इस्तेमाल कम होता है।
अफ्रीकी हाथियों के संदर्भ में पहले भी कुछ स्थानीय और ऐतिहासिक विवरण सामने आते रहे हैं। मसलन, तंजानिया में एक पुराने विवरण में पाचन संबंधी परेशानी वाले हाथी द्वारा पत्तियों को पानी के साथ इस्तेमाल करने की बात दर्ज की गई थी। मादा हाथियों द्वारा प्रसव से जुड़े समय में कुछ पौधों का सेवन करने की रिपोर्ट भी पहले सामने आ चुकी है।
लेकिन इन पुराने विवरणों और नए अध्ययन के बीच एक समान सीमा है। केवल व्यवहार देखकर यह साबित करना कठिन है कि किसी पौधे का सेवन वास्तव में बीमारी का इलाज करने के लिए किया गया था।
रिसर्च की सबसे अहम सीमा इसका Evidence Base है। अध्ययन में केवल 8 स्थानीय विशेषज्ञों के इंटरव्यू और उनके लंबे समय के अनुभवों को शामिल किया गया।
शोधकर्ताओं ने इन विवरणों को पौधों की पहचान, स्थानीय औषधीय ज्ञान और व्यवहार संबंधी वर्गीकरण के साथ जोड़ा। फिर भी यह नियंत्रित Veterinary Experiment नहीं था। हाथियों के शरीर में किसी पौधे के सक्रिय रासायनिक तत्वों की चिकित्सीय प्रभावशीलता का परीक्षण भी इस अध्ययन का हिस्सा नहीं था।
इसलिए "हाथी अपना इलाज करते हैं" कहना इस रिसर्च का सबसे सटीक वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं होगा। ज्यादा सटीक निष्कर्ष यह है कि अफ्रीकी हाथियों में संभावित Self-Medication और Allo-Medication के व्यवहार के संकेत मिले हैं।
यह रिसर्च Animal Behaviour और Ethnopharmacology दोनों क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर आगे प्रत्यक्ष Wildlife Observation और Chemical Analysis से इन व्यवहारों की पुष्टि होती है, तो यह समझने में मदद मिलेगी कि हाथी बीमारी के दौरान प्राकृतिक संसाधनों का चयन किस आधार पर करते हैं।
इसके अलावा पौधों की औषधीय रासायनिक संरचना का अध्ययन नई Pharmacological Research के लिए भी उपयोगी हो सकता है। लेकिन किसी पौधे के पारंपरिक इस्तेमाल और उसके वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार के बीच स्पष्ट अंतर रखना जरूरी है।
इस रिसर्च का एक व्यापक पहलू वन्य जीवन की बातचीत है। अगर हाथी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए कुछ विशिष्ट पौधों या प्राकृतिक संसाधनों को चुनते हैं, तो उनके Habitat की सुरक्षा केवल भोजन और पानी की उपलब्धता तक सीमित मुद्दा नहीं रह जाती।
ऐसे पौधों की मौजूदगी भी उनके प्राकृतिक पर्यावरण का हिस्सा हो सकती है। Habitat Loss, वनस्पति में बदलाव और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी परिस्थितियां हाथियों की इन प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच को प्रभावित कर सकती हैं। अध्ययन ने भी संभावित औषधीय संसाधनों की उपलब्धता और संरक्षण के बीच संबंध पर आगे शोध की जरूरत बताई है।
अगले चरण में वैज्ञानिकों को लंबे समय तक हाथियों का प्रत्यक्ष Observation करना होगा। बीमार हाथी की स्थिति, उसके सामान्य भोजन और अचानक चुने गए पौधे के बीच संबंध को रिकॉर्ड करना जरूरी होगा।
इसके साथ पौधों के Chemical Compounds का Laboratory Analysis और Veterinary Testing भी महत्वपूर्ण होगा। इससे पता चलेगा कि जिन पौधों को हाथी बीमारी के दौरान चुनते हैं, उनमें वास्तव में Antimicrobial, Anti-inflammatory, Antiparasitic या दूसरे जैविक प्रभाव मौजूद हैं या नहीं।
शोधकर्ताओं के लिए यह भी समझना जरूरी होगा कि क्या हाथी किसी औषधीय व्यवहार को सामाजिक रूप से सीखते हैं या यह व्यवहार उनके प्राकृतिक व्यवहार तंत्र का हिस्सा है।
माउंट एल्गॉन का अध्ययन यह संकेत देता है कि जंगल में रहने वाले हाथियों और उनके प्राकृतिक पर्यावरण के बीच संबंध हमारी मौजूदा समझ से ज्यादा जटिल हो सकता है।
35 पौधों की पहचान और बीमार हाथियों द्वारा कुछ संसाधनों के चयन की स्थानीय रिपोर्टें एक महत्वपूर्ण Research Lead देती हैं। लेकिन इसे अंतिम वैज्ञानिक प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल उपलब्ध Evidence यह बताता है कि अफ्रीकी हाथियों में संभावित Self-Medication व्यवहार की जांच के लिए मजबूत आधार मौजूद है। आगे प्रत्यक्ष अवलोकन, रासायनिक परीक्षण और नियंत्रित वैज्ञानिक अध्ययन इस सवाल का जवाब देंगे कि हाथी वास्तव में बीमारी की पहचान कर अपने लिए प्राकृतिक उपचार चुनते हैं या उनके व्यवहार के पीछे कोई दूसरा जैविक कारण है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।