जैसा कि हम सभी जानते हैं सावन शुरू हो गया है और शुरुआती दिनों में बरसात (Rain) जैसा माहौल बना हुआ है सावन के इस मौसम ( Climate) में लोग सर्द महसूस कर रहे हैं बहुत से लोगों में कभी सर्दी कभी गर्मी और कभी बरसात जैसे मौसमों का झेलना इंसान के शरीर के बस में नहीं होता इसी कारणवश उसे अपने रहन-सहन में भी बदलाव करना चाहिए क्योंकि वह अपनी शरीर की क्षमता के अनुसार मौसम के द्वारा दी गई प्रत्येक चुनौतियों को न आसानी से स्वीकार कर सकें जैसे आजकल बारिश ट्रेड में बनी हुई है जिसकी वजह से प्रत्येक व्यक्ति को कुछ सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। जैसे एंटीबैक्टीरियल क्रीम का उपयोग करें आप बारिश में भीगने के बाद कपड़े बदलते वक्त आप कोई एंटीबैक्टीरियल क्रीम का इस्तेमाल जरूर करें ,इससे शरीर पर मौजूद बैक्टीरिया मर जाते हैं एंटीबैक्टीरियल क्रीम लगाने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि आपकी स्किन एलर्जी और इंफेक्शन से बच सकती है एंटीबैक्टीरियल क्रीम का उपयोग करने से आपको दाद खाज और खुजली जैसी समस्याओं की कोई शिकायत नहीं रहेगी, घर से बाहर निकलने पर कई बार लोग बारिश में भीग जाते हैं तो कई बार लोग गर्मी से राहत पाने के लिए बारिश के फुहारों के मजे लेने के लिए भी भीगते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं बारिश में भीगना आपको कभी बीमार भी कर सकता है, मानसून सीजन के साथ कई तरह की बीमारियां भी शुरू हो जाती है इस मौसम में सर्दी खांसी वायरल बुखार डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां फैलती है मगर आप इन बीमारियों से अच्छे से निपटारा कर सकते हैं, यदि आप बारिश में भीग जाए तो यह टिप्स जरूर अपनाएं…..
2.तुरंत कपड़े बदल ले ,जिससे शरीर का तापमान पहले जैसा हो जाए बारिश के मौसम में किसी भी तरह के फंगल संक्रमण से बचने के लिए भी आपको तुरंत गीले कपड़े बदल लेने चाहिए।
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3.अदरक वाली चाय या हल्दी वाला दूध पिए ,बुखार और सर्दी से बचने के लिए आपको कुछ गर्म ही खाना चाहिए जिसमें आपके शरीर को अंदरूनी गर्माहट मिल सके ।
हम आपको यहां पर यह भी बताते चहाते हैं कि कौन सी बारिश नहाने के लायक होती है और कौन सी बारिश नुकसानदायक होती हैं,आपने अक्सर सुना होगा की बिन मौसम बरसात हो रही हैं बिना मौसम में होने वाली बारिश को ही बिन मौसम बरसात कहते हैं ,और ऐसी बारिश को ही एसिड रेन या फिर अम्लीय वर्षा कहते हैं….
अम्लीय वर्षा तब होती है जब सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे कंपाउंड हवा में छोड़े जाते हैं. ये पदार्थ वातावरण में मिलकर बारिश के रूप में नीचे गिरते हैं. दरअसल, वायु प्रदूषण की वजह से हवा में नाइट्रिक और सल्फ्यूरिक एसिड मौजूद होते हैं और ऐसी बारिश में भीगना अक्सर नुकसानदायक हो जाता है बेहतर होगा कि ऐसी बारिश से बचे ।
भारत में मानसून की अवधि चार महीने यानी 1जून से 30 सितम्बर मानी जाती है। यहां जुलाई व अगस्त महीने में सबसे ज्यादा वर्षा होती है और और बारिश के मजे लेने वाले शौकीनों के लिए मानसून की एक मात्र बारिश ही नहाने के लायक होती हैं।
~सना राजपूत
Health, Climate,Rain, Shah Times,शाह टाइम्स
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।