हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत के डूबने को लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक पुष्टि की है। अमेरिका का कहना है कि पनडुब्बी से दागे गए टॉरपीडो के जरिए यह कार्रवाई की गई। श्रीलंका की नौसेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया है। घटना को लेकर अमेरिका, श्रीलंका और ईरान की ओर से अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं।
📍New Delhi ✍️ Asif Khan
हिंद महासागर में हुई घटना की पुष्टि
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो अटैक के जरिए डुबो दिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई उस समय हुई, जब संबंधित युद्धपोत अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मौजूद था और खुद को सुरक्षित मान रहा था। इस घटना ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर नई स्थिति पैदा कर दी है।
अमेरिकी पक्ष का आधिकारिक बयान
वॉशिंगटन में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने ईरानी वॉरशिप पर टॉरपीडो दागा। उनके अनुसार, यह हमला समुद्री अभियानों के तहत किया गया और इसका उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद खतरों को निष्क्रिय करना था।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाता रहेगा।
किस तरह का हथियार इस्तेमाल हुआ
अमेरिकी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने बताया कि इस कार्रवाई में Mk-48 टॉरपीडो का उपयोग किया गया। यह टॉरपीडो खास तौर पर बड़े समुद्री जहाजों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है और पनडुब्बी से दागा जाता है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान सभी तकनीकी मानकों का पालन किया गया।
ईरानी युद्धपोत की पहचान
श्रीलंका की नौसेना ने पहले बयान में कहा था कि ईरान का मौज क्लास फ्रिगेट आईआरआईएस डेना हिंद महासागर में डूब गया है। यह जहाज भारत से लौट रहा था। ईरानी नौसेना के लिए यह जहाज आधुनिक क्षमताओं से लैस माना जाता रहा है।
रेस्क्यू ऑपरेशन और हताहतों की जानकारी
घटना की सूचना मिलने के बाद श्रीलंका नौसेना ने अपने तट के पास बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। श्रीलंका सरकार के मुताबिक, जहाज पर कुल 180 लोग सवार थे। अब तक 32 लोगों को बचा लिया गया है। अधिकारियों ने 80 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है, जबकि 60 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
श्रीलंका सरकार का बयान
श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय के सचिव एयर वाइस मार्शल सम्पथ थुइयाकोंठा ने स्थानीय मीडिया को बताया कि तटीय इलाकों में शव और मलबा मिलने की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन अभी जारी है और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र का संदर्भ
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हमला अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुआ, जहां समुद्री गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत आती हैं। वहीं, ईरानी पक्ष की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है। ईरान के सरकारी मीडिया ने जहाज के डूबने की खबर दी है, लेकिन हमले की जिम्मेदारी पर विस्तृत बयान नहीं दिया गया।
ऐतिहासिक संदर्भ
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद किसी ईरानी सरफेस वॉरशिप पर अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा किया गया पहला ज्ञात टॉरपीडो अटैक बताया जा रहा है। इससे पहले इस तरह की घटनाएं दशकों पहले दर्ज की गई थीं।
क्षेत्रीय समुद्री स्थिति
हिंद महासागर में हाल के वर्षों में सैन्य और वाणिज्यिक गतिविधियां बढ़ी हैं। इस क्षेत्र से होकर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में किसी भी सैन्य घटना का असर क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ता है।
आगे की स्थिति
फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और संबंधित देशों की ओर से आधिकारिक जांच की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी, श्रीलंकाई और ईरानी अधिकारियों के बीच संपर्क बनाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।