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कावड़ यात्रा के मार्ग पर पड़ने वाली दुकानों को सांप्रदायिक सियासत का हिस्सा बनाने की कोशिश

None • 2024-07-19 17:56:19
कावड़ यात्रा के मार्ग पर पड़ने वाली दुकानों को सांप्रदायिक सियासत का हिस्सा बनाने की कोशिश

लखनऊ, (Shah Times ) । उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी अपने आपको चारों ओर से घिरी देख रही है बीजेपी ने अपने सहयोगी दलों को दरकिनार करते हुए, हिंदुत्व के हथियार को धार देने में जुट गईं है।

कांवड़ यात्रा के रास्ते में पड़ने वाली दुकानों, होटलों, ढाबों, ठेलों, खोमचों  पर दुकानदारों के नामों की तख़्तियाँ लगाने का जो आदेश सिर्फ पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों तक सीमित था, उसे योगी सरकार ने पूरे प्रदेश पर लागू कर दिया है।

कावड़ यात्रा के मार्ग पर पड़ने वाली दुकाने सियासत का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है, ताकि लोकसभा चुनाव में यूपी में बुरी तरह पिटी, अयोध्या तक हार चुकी बीजेपी के कट्टर हिंदू वोटर को यक़ीन हो जाए कि उसकी प्यारी देश को बांटने वाली पार्टी क़तई नहीं बदली है।वह अब भी कट्टर हिंदुत्व के एजेंडे पर चलते हुए समाज का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करके ही चुनाव लड़ने और जीतने की रणनीति पर काम कर रही है ना बेरोजगारी और ना बढ़ती महंगाई पर बात करेंगे बस हिन्दू मुसलमान करके ही चुनाव लड़ते रहेंगे।

हालांकि एनडीए में शामिल जनता दल यूनाइटेड केसी त्यागी और राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष ने इस फैसले पर एतराज़ जताया है साथ ही कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने भी योगी आदित्यनाथ सरकार के इस फैसले की निंदा करते हुए इससे वापिस लेने की मांग की है।

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने योगी सरकार के द्वारा कावड़ मार्ग पर दुकानों का हिन्दू मुस्लिम करने की निंदा करते हुए कहा कि हमारा संविधान हर नागरिक को गारंटी देता है कि उसके साथ जाति, धर्म, भाषा या किसी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं होगा। 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में ठेलों, खोमचों और दुकानों पर उनके मालिकों के नाम का बोर्ड लगाने का विभाजन कारी आदेश हमारे संविधान, हमारे लोकतंत्र और हमारी साझी विरासत पर हमला है। 

उन्होंने कहा कि समाज में जाति और धर्म के आधार पर विभाजन पैदा करना संविधान के खिलाफ अपराध है। यह आदेश तुरंत वापस लिया जाना चाहिए और जिन अधिकारियों ने इसे जारी किया है, उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अपने बुज़ुर्गों से सुना है , किताबों में पढ़ा है कि भारत को आजादी मिलने और देश का बँटवारा होने से पहले के घनघोर सांप्रदायिक हिंसा और नफरत के माहौल में पानी और चाय भी हिंदू-मुस्लिम में बँट गये थे। रेलवे स्टेशनों पर हिंदू पानी-मुस्लिम पानी मिला करता था। हिंदू चाय-मुस्लिम चाय मिलती थी। बीजेपी देश को एक बार फिर उसी तरह की सांप्रदायिक नफरत के माहौल में झोंक देना चाहती है।

यह आकस्मिक नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का ऐलान किया था। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दस साल में समाज के सांप्रदायिक विभाजन की ऐसी कोशिशें लगातार तेज हुई हैं। कट्टर हिंदुत्व के नायक और हिंदू ह्रदय सम्राट नरेंद्र मोदी को दूसरे कट्टर हिंदुत्व नायक और हिंदू ह्रदय सम्राट योगी आदित्यनाथ से कड़ी चुनौती मिल रही है इसी मुकाबले के चलते उत्तर प्रदेश की राजनीति में घमासान मचा हुआ है।

मुजफ्फरनगर से शुरू हुआ सिलसिला आगे बढ़ाने के पीछे मक़सद साफ तौर पर कट्टर हिंदुत्व के एजेंडे पर वापस लौटते हुए मुसलमानों के सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार की नीति को ही तेज करना है।

उत्तर प्रदेश में दस विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं। बीजेपी हर बार की तरह इस चुनाव से पहले भी जमकर सांप्रदायिक माहौल बनाने की हर मुमकिन कोशिश करेगी।हर बात हिंदू-मुसलमान के इर्दगिर्द घुमाने के हथकंडे अपनाए जाएंगे।

लोकसभा चुनावों में तो हिंदू-मुसलमान के बजाय सामाजिक न्याय की राजनीति का पलड़ा भारी रहा था,हालांकि मोदी की बीजेपी ने चुनाव को सांप्रदायिक करने की कोशिश की गई है लेकिन जनता ने इसे नकारते हुए मुद्दों पर वोटिंग की जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश में मुंह की खाईं थी कम से कम उत्तर प्रदेश के नतीजे तो यही इशारा करते हैं। अब बीजेपी फिर से कट्टर हिंदुत्व पर ज़ोर देती दिख रही है तो सोचना समाज को है कि उसे इस राजनीति के साथ किस तरह पेश आना है।

कल अगर हिंदू बस्ती, मुस्लिम बस्ती, हिंदू मोहल्ले, मुस्लिम मोहल्ले जैसी बातें होने लगी तब अमन और भाईचारे के साथ रहने वाले समाज की प्रतिक्रिया क्या होगी ? ऐसा लगता हैं कि बीजेपी दो सीटों पर जाने का मन बना चुकी है क्योंकि जनता अब हिन्दू मुस्लिम की सियासत से तंग आ चुकी है।

लखनऊ, (Shah Times ) । उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी अपने आपको चारों ओर से घिरी देख रही है बीजेपी ने अपने सहयोगी दलों को दरकिनार करते हुए, हिंदुत्व के हथियार को धार देने में जुट गईं है।

कांवड़ यात्रा के रास्ते में पड़ने वाली दुकानों, होटलों, ढाबों, ठेलों, खोमचों  पर दुकानदारों के नामों की तख़्तियाँ लगाने का जो आदेश सिर्फ पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों तक सीमित था, उसे योगी सरकार ने पूरे प्रदेश पर लागू कर दिया है।

कावड़ यात्रा के मार्ग पर पड़ने वाली दुकाने सियासत का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है, ताकि लोकसभा चुनाव में यूपी में बुरी तरह पिटी, अयोध्या तक हार चुकी बीजेपी के कट्टर हिंदू वोटर को यक़ीन हो जाए कि उसकी प्यारी देश को बांटने वाली पार्टी क़तई नहीं बदली है।वह अब भी कट्टर हिंदुत्व के एजेंडे पर चलते हुए समाज का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करके ही चुनाव लड़ने और जीतने की रणनीति पर काम कर रही है ना बेरोजगारी और ना बढ़ती महंगाई पर बात करेंगे बस हिन्दू मुसलमान करके ही चुनाव लड़ते रहेंगे।

हालांकि एनडीए में शामिल जनता दल यूनाइटेड केसी त्यागी और राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष ने इस फैसले पर एतराज़ जताया है साथ ही कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने भी योगी आदित्यनाथ सरकार के इस फैसले की निंदा करते हुए इससे वापिस लेने की मांग की है।

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने योगी सरकार के द्वारा कावड़ मार्ग पर दुकानों का हिन्दू मुस्लिम करने की निंदा करते हुए कहा कि हमारा संविधान हर नागरिक को गारंटी देता है कि उसके साथ जाति, धर्म, भाषा या किसी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं होगा। 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में ठेलों, खोमचों और दुकानों पर उनके मालिकों के नाम का बोर्ड लगाने का विभाजन कारी आदेश हमारे संविधान, हमारे लोकतंत्र और हमारी साझी विरासत पर हमला है। 

उन्होंने कहा कि समाज में जाति और धर्म के आधार पर विभाजन पैदा करना संविधान के खिलाफ अपराध है। यह आदेश तुरंत वापस लिया जाना चाहिए और जिन अधिकारियों ने इसे जारी किया है, उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अपने बुज़ुर्गों से सुना है , किताबों में पढ़ा है कि भारत को आजादी मिलने और देश का बँटवारा होने से पहले के घनघोर सांप्रदायिक हिंसा और नफरत के माहौल में पानी और चाय भी हिंदू-मुस्लिम में बँट गये थे। रेलवे स्टेशनों पर हिंदू पानी-मुस्लिम पानी मिला करता था। हिंदू चाय-मुस्लिम चाय मिलती थी। बीजेपी देश को एक बार फिर उसी तरह की सांप्रदायिक नफरत के माहौल में झोंक देना चाहती है।

यह आकस्मिक नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का ऐलान किया था। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दस साल में समाज के सांप्रदायिक विभाजन की ऐसी कोशिशें लगातार तेज हुई हैं। कट्टर हिंदुत्व के नायक और हिंदू ह्रदय सम्राट नरेंद्र मोदी को दूसरे कट्टर हिंदुत्व नायक और हिंदू ह्रदय सम्राट योगी आदित्यनाथ से कड़ी चुनौती मिल रही है इसी मुकाबले के चलते उत्तर प्रदेश की राजनीति में घमासान मचा हुआ है।

मुजफ्फरनगर से शुरू हुआ सिलसिला आगे बढ़ाने के पीछे मक़सद साफ तौर पर कट्टर हिंदुत्व के एजेंडे पर वापस लौटते हुए मुसलमानों के सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार की नीति को ही तेज करना है।

उत्तर प्रदेश में दस विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं। बीजेपी हर बार की तरह इस चुनाव से पहले भी जमकर सांप्रदायिक माहौल बनाने की हर मुमकिन कोशिश करेगी।हर बात हिंदू-मुसलमान के इर्दगिर्द घुमाने के हथकंडे अपनाए जाएंगे।

लोकसभा चुनावों में तो हिंदू-मुसलमान के बजाय सामाजिक न्याय की राजनीति का पलड़ा भारी रहा था,हालांकि मोदी की बीजेपी ने चुनाव को सांप्रदायिक करने की कोशिश की गई है लेकिन जनता ने इसे नकारते हुए मुद्दों पर वोटिंग की जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश में मुंह की खाईं थी कम से कम उत्तर प्रदेश के नतीजे तो यही इशारा करते हैं। अब बीजेपी फिर से कट्टर हिंदुत्व पर ज़ोर देती दिख रही है तो सोचना समाज को है कि उसे इस राजनीति के साथ किस तरह पेश आना है।

कल अगर हिंदू बस्ती, मुस्लिम बस्ती, हिंदू मोहल्ले, मुस्लिम मोहल्ले जैसी बातें होने लगी तब अमन और भाईचारे के साथ रहने वाले समाज की प्रतिक्रिया क्या होगी ? ऐसा लगता हैं कि बीजेपी दो सीटों पर जाने का मन बना चुकी है क्योंकि जनता अब हिन्दू मुस्लिम की सियासत से तंग आ चुकी है।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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