चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया से जुड़े विवाद के बीच उन राज्यों में फॉर्म 6 के साथ Annexure-D की अतिरिक्त अनिवार्यता हटाकर मूल फॉर्म बहाल किया है जहां पुनरीक्षण पूरा हो चुका है।
📍
नई दिल्ली
🗓️
30 सितंबर 2026
✍️Mohd Naved
फॉर्म 6 को लेकर चुनाव आयोग का नया फैसला
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया है। जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां ऑनलाइन फॉर्म 6 से अतिरिक्त घोषणा पत्र Annexure-D को हटा दिया गया है। इससे नए मतदाता के तौर पर पंजीकरण के लिए मूल फॉर्म 6 का पुराना स्वरूप फिर इस्तेमाल किया जाएगा। उपलब्ध आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल पर फॉर्म 6 को नए मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म के तौर पर प्रदर्शित किया गया है।
जरूरी तथ्य क्या हैं
फॉर्म 6 भारत में नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होता है। निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र नागरिकों के लिए फॉर्म 6 भरने की सुविधा उपलब्ध है। पोर्टल पर फॉर्म 6, उसकी गाइडलाइन और संबंधित घोषणा पत्र के लिए अलग विकल्प भी दिए गए हैं।
नए फैसले का मुख्य असर SIR से जुड़े अतिरिक्त घोषणा पत्र पर है। आयोग ने मूल वैधानिक फॉर्म 6 में बदलाव किए जाने की बात से पहले भी इनकार किया था। उसका तर्क था कि SIR के दौरान जो अतिरिक्त जानकारी मांगी गई, वह मूल फॉर्म का हिस्सा नहीं बल्कि अलग घोषणा पत्र के रूप में जोड़ी गई थी।
Annexure-D क्यों चर्चा में आया
SIR के दौरान नए मतदाता के पंजीकरण से जुड़े फॉर्म 6 के साथ Annexure-D जोड़ा गया था। इस घोषणा पत्र में मतदाता की नागरिकता और जन्म से जुड़ी जानकारी के साथ कुछ मामलों में माता-पिता से संबंधित दस्तावेजी जानकारी का प्रावधान था।
SIR के नियमों के तहत फॉर्म 6 या कुछ मामलों में फॉर्म 8 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र जमा करने की व्यवस्था की गई थी। इस व्यवस्था को लेकर चुनावी प्रक्रिया और आयोग के भीतर भी सवाल उठे।
अब आयोग ने SIR पूरी कर चुके राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म 6 से इस अतिरिक्त घोषणा पत्र को हटाकर मूल प्रारूप बहाल किया है। इसका अर्थ यह है कि संबंधित राज्यों में नए मतदाता पंजीकरण के लिए आवेदन करते समय पहले की तरह मूल फॉर्म 6 का इस्तेमाल किया जाएगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
Annexure-D को लेकर विवाद केवल तकनीकी बदलाव तक सीमित नहीं रहा। सवाल यह उठा कि मूल वैधानिक फॉर्म में बदलाव किए बिना उसके साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ने की प्रक्रिया किस तरह लागू की गई।
निर्वाचन आयोग ने इस पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा था कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार माता-पिता या दादा-दादी से संबंधित लिंक की जानकारी को अलग घोषणा पत्र के जरिए जोड़ा गया था।
इस व्यवस्था पर चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियां सामने आने की रिपोर्ट भी आई थी। इसके बाद फॉर्म 6 और Annexure-D की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बहस तेज हुई।
SIR और मतदाता सूची का संदर्भ
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष स्तर पर पुनरीक्षण करना है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच और पात्रता से जुड़े विवरणों का सत्यापन किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश में भी SIR से संबंधित प्रक्रिया और Annexure-D के इस्तेमाल का उल्लेख हुआ है। अदालत के रिकॉर्ड में नए मतदाता के लिए फॉर्म 6 के साथ घोषणा पत्र जमा करने की व्यवस्था दर्ज है।
इसलिए मौजूदा बदलाव को समझते समय मूल फॉर्म 6 और SIR के दौरान इस्तेमाल किए गए अतिरिक्त घोषणा पत्र के बीच अंतर समझना जरूरी है।
अब मतदाताओं के लिए क्या बदला
SIR प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में नए मतदाता के लिए फॉर्म 6 भरने की प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल होगी। उपलब्ध सूचना के मुताबिक ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन में मूल फॉर्म 6 का इस्तेमाल किया जाएगा और Annexure-D की अतिरिक्त अनिवार्यता नहीं रहेगी।
हालांकि यह बदलाव SIR के दौरान लागू हुई पूरी प्रक्रिया को स्वतः समाप्त करने के बराबर नहीं है। इसका सीधा संबंध फॉर्म 6 के साथ जुड़े अतिरिक्त घोषणा पत्र की अनिवार्यता से है।
मतदाताओं को आवेदन करते समय अपने राज्य और निर्वाचन क्षेत्र के लिए उपलब्ध मौजूदा आधिकारिक निर्देशों को देखना चाहिए, क्योंकि SIR की स्थिति सभी राज्यों में एक जैसी नहीं है।
ऑनलाइन व्यवस्था में क्या दिख रहा है
निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर SIR 2026 के लिए अलग सेवाएं उपलब्ध हैं। इसमें मतदाता सूची में नाम खोजने, SIR से जुड़े दस्तावेज जमा करने और नए मतदाता के लिए फॉर्म 6 भरने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इससे साफ है कि सामान्य मतदाता पंजीकरण और SIR से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए पोर्टल पर अलग-अलग विकल्प रखे गए हैं।
मतदाताओं के लिए इसका महत्व
फॉर्म 6 नए मतदाता के नामांकन की बुनियादी प्रक्रिया से जुड़ा है। इसलिए अतिरिक्त घोषणा पत्र हटने से उन आवेदकों पर दस्तावेजी और प्रशासनिक बोझ कम होगा, जिनके राज्य में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
यह बदलाव उन लोगों के लिए खास महत्व रखता है जो पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। आवेदन करने से पहले उम्र, सामान्य निवास और नागरिकता से संबंधित मूल पात्रता पूरी होना जरूरी है।
आगे क्या होगा
अगला अहम पहलू यह रहेगा कि अलग-अलग राज्यों में SIR की स्थिति के अनुसार फॉर्म 6 की प्रक्रिया कैसे लागू होती है। आयोग के पोर्टल और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की ओर से जारी निर्देश इस मामले में प्रमुख संदर्भ होंगे।
इस बदलाव से एक बात स्पष्ट है कि फॉर्म 6 और SIR के अतिरिक्त घोषणा पत्र को अब अलग-अलग प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। SIR पूरी कर चुके राज्यों में मूल फॉर्म 6 की वापसी इसी प्रशासनिक बदलाव का हिस्सा है।
फॉर्म 6 के साथ Annexure-D को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने SIR पूरी कर चुके राज्यों में अतिरिक्त घोषणा पत्र की अनिवार्यता हटा दी है। मूल फॉर्म 6 को फिर से ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मूल फॉर्म 6 में बदलाव और उसके साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ने को आयोग ने अलग-अलग प्रक्रियाएं माना था। अब संबंधित राज्यों में Annexure-D हटाने से नए मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया पहले के प्रारूप के करीब लौट गई है।