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पश्चिमी UP में शहजाद भट्टी नेटवर्क पर ATS का शिकंजा, कई ठिकानों पर जांच तेज

Mohammad Naved • 2026-10-03 11:10:08
पश्चिमी UP में शहजाद भट्टी नेटवर्क पर ATS का शिकंजा, कई ठिकानों पर जांच तेज

पश्चिमी UP में ATS शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े कथित संपर्कों की जांच कर रही है। अमरोहा समेत कई मामलों में संदिग्धों से पूछताछ और ठिकानों की पड़ताल हुई है।


📍 उत्तर प्रदेश, पश्चिमी UP

🗓️ 03 अक्टूबर 2026

✍️ Mohd Naved


पश्चिमी UP में ATS की जांच का दायरा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच को लेकर ATS की गतिविधियां तेज हुई हैं। उपलब्ध जांच विवरणों के मुताबिक एजेंसी संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क, डिजिटल कम्युनिकेशन और उनके संभावित आपराधिक नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है।

अमरोहा के गजरौला में सितंबर 2026 में ATS की कार्रवाई इसका एक प्रमुख उदाहरण है। जांच टीम पूछताछ के लिए 2 लोगों को लेकर इलाके में पहुंची और उनकी निशानदेही पर कई स्थानों का निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानों के नक्शे तैयार किए गए थे। हालांकि, उस कार्रवाई से क्या बरामद हुआ या जांच में कौन-सी नई जानकारी सामने आई, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।

इसलिए मौजूदा स्थिति में यह कहना अधिक सटीक है कि ATS नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही है। किसी व्यक्ति को नेटवर्क का सक्रिय सदस्य या किसी साजिश का आरोपी बताने से पहले जांच एजेंसी के आधिकारिक रिकॉर्ड और अदालत में सामने आने वाले तथ्यों का इंतजार जरूरी है।


गजरौला में क्या हुआ था

सितंबर में ATS की 3 टीमों ने गजरौला में करीब 3 घंटे तक कार्रवाई की थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार लगभग 15 सदस्यीय टीम का नेतृत्व सीओ प्रीति त्रिपाठी ने किया।

ATS रवि और शोएब नाम के 2 लोगों को अपने साथ लेकर गजरौला पहुंची थी। दोनों के बारे में जांच एजेंसी को दनियाल अशरफ से संपर्क होने की जानकारी मिली थी।

टीम ने लक्ष्मी नगर, मोहरका पट्टी और पपसरा खादर में जांच की। चौपला चौराहा और हसनपुर रोड के आसपास भी जानकारी जुटाई गई। कुछ स्थानों के नक्शे तैयार किए गए।

उपलब्ध रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस कार्रवाई में कोई हथियार, विस्फोटक, नकदी या अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई। इसलिए ऐसी किसी बरामदगी का दावा करना फिलहाल उचित नहीं होगा।


जांच की शुरुआत कहां से हुई

इस जांच की एक अहम कड़ी बाराबंकी के दनियाल अशरफ से जुड़ी कार्रवाई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार ATS ने मई 2026 में दनियाल अशरफ को गिरफ्तार किया था।

जांच एजेंसी के अनुसार अशरफ के संपर्कों की पड़ताल के दौरान दूसरे लोगों के बारे में जानकारी सामने आई। इसी क्रम में गजरौला के रवि और शोएब से जुड़े संपर्कों की जांच आगे बढ़ी।

ATS ने दोनों की गतिविधियों और पुराने मामलों की जानकारी जुटाई। इसके बाद पूछताछ और आगे की जांच के आधार पर टीम उन्हें गजरौला लेकर पहुंची।


पश्चिमी UP में पहले भी सामने आए मामले

शहजाद भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच केवल अमरोहा तक सीमित नहीं रही है। मई 2026 में ATS और STF ने सहारनपुर में 4 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक इनमें सहारनपुर के महकाब और शाहरुख, मुजफ्फरनगर के गगनदीप सिंह उर्फ गुरी सिंह और हरिद्वार के मुशर्रफ शामिल थे।

अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के सोशल मीडिया और वीडियो कॉलिंग प्लेटफॉर्म के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से संपर्क की जांच की गई। एजेंसियों ने यह भी आरोप लगाया था कि नेटवर्क स्थानीय युवाओं को जोड़ने और कथित स्लीपर सेल तैयार करने की कोशिश कर रहा था।

इन आरोपों की जांच का कानूनी नतीजा अलग विषय है। गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होती।


डिजिटल नेटवर्क जांच के केंद्र में

इस पूरे मामले में डिजिटल कम्युनिकेशन एक अहम जांच बिंदु बनकर सामने आया है।

ATS ने अलग-अलग मामलों में सोशल मीडिया अकाउंट, चैट, वीडियो कॉल और दूसरे डिजिटल संपर्कों की पड़ताल की है। अगस्त 2026 में सामने आए जांच विवरण के अनुसार एजेंसी ने 52 गिरफ्तार लोगों से पूछताछ के बाद 150 से अधिक संदिग्ध लोगों की पृष्ठभूमि और संपर्कों की जांच शुरू की थी।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसी संदिग्ध व्यक्ति का किसी आरोपी से सोशल मीडिया संपर्क होना अपने आप में आतंकी गतिविधि में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। जांच एजेंसियों को संपर्क की प्रकृति, बातचीत की सामग्री, आर्थिक लेनदेन और कथित गतिविधियों में वास्तविक भूमिका जैसे पहलुओं को स्थापित करना होता है।


अप्रैल से बढ़ी जांच की परतें

अप्रैल 2026 में ATS ने नोएडा से 2 युवकों को गिरफ्तार किया था। एजेंसी के आरोपों के अनुसार दोनों का संपर्क शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी अबिद जट्ट से था।

जांच में संवेदनशील स्थानों की कथित रेकी और संभावित टारगेट किलिंग की योजना से जुड़े आरोप सामने आए थे। एजेंसी ने डिजिटल कम्युनिकेशन और कथित विदेशी संपर्कों को जांच का हिस्सा बनाया था।

मई में सहारनपुर की कार्रवाई और उसके बाद दूसरे जिलों में हुई पड़ताल ने जांच को पश्चिमी UP के कई इलाकों तक पहुंचाया।


कौन-कौन से इलाके जांच के दायरे में आए

उपलब्ध मामलों में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और अमरोहा जैसे पश्चिमी UP के जिले सामने आए हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों से जुड़े संदिग्ध संपर्कों की भी जांच की गई है।

मई की सहारनपुर कार्रवाई में मुजफ्फरनगर के एक आरोपी का नाम सामने आया था। सितंबर में अमरोहा के गजरौला में ATS की कार्रवाई हुई। इससे यह स्पष्ट होता है कि एजेंसी अलग-अलग मामलों के बीच संपर्कों की कड़ी तलाश रही है।

हालांकि, इन सभी मामलों को एक ही सक्रिय मॉड्यूल का हिस्सा मानना तब तक उचित नहीं होगा, जब तक जांच एजेंसी इसकी पुष्टि न करे।


जांच में सामने आए आरोप क्या हैं

ATS के विभिन्न मामलों में पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से संपर्क, युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए जोड़ना, संवेदनशील स्थानों की रेकी और कथित हिंसक गतिविधियों की तैयारी जैसे आरोप सामने आए हैं।

कुछ मामलों में जांच एजेंसियों ने वित्तीय मदद और हथियार हासिल करने की संभावित योजना का भी जिक्र किया है। लेकिन इन दावों को जांच एजेंसी के आरोप के तौर पर ही प्रस्तुत करना जरूरी है।

किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगा।


सितंबर 2026 में नया मोड़

सितंबर 2026 में केंद्र सरकार ने शहजाद भट्टी नेटवर्क को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत आतंकवादी संगठन के रूप में अधिसूचित किया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सरकार ने नेटवर्क से जुड़े 14 राज्यों में 253 ऑपरेटिव की जानकारी का उल्लेख किया था।

इस घटनाक्रम के बाद राज्य स्तर पर नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध संपर्कों की जांच का महत्व बढ़ गया है।

फिर भी हर स्थानीय संपर्क को नेटवर्क की सक्रिय गतिविधि से जोड़ना उचित नहीं होगा। जांच का वास्तविक उद्देश्य यही निर्धारित करना है कि कौन व्यक्ति केवल संपर्क में था और कौन कथित गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।


सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती

इस तरह की जांच में सबसे बड़ी चुनौती डिजिटल नेटवर्क की प्रकृति है। सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और अलग-अलग राज्यों में मौजूद संपर्क जांच को जटिल बनाते हैं।

एक जिले में मिले डिजिटल सुराग दूसरे राज्य तक पहुंच सकते हैं। इसलिए ATS, STF और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचना साझा करना जांच का अहम हिस्सा बनता है।

अगला चरण डिजिटल डिवाइस, चैट रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और आरोपियों के आपसी संपर्कों की फोरेंसिक जांच से जुड़ा हो सकता है।


अब आगे क्या होगा

ATS की जांच अभी पूरी नहीं मानी जा सकती। उपलब्ध मामलों में एजेंसी ने आगे की पूछताछ और नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की पहचान पर काम जारी रखा है।

गजरौला मामले में भी कार्रवाई के बाद कोई विस्तृत आधिकारिक बरामदगी सूची सार्वजनिक नहीं हुई थी। इसलिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ATS संदिग्ध संपर्कों और कथित नेटवर्क की कड़ियों की पड़ताल कर रही है।

आगे की कार्रवाई में नए नाम सामने आ सकते हैं, लेकिन किसी भी गिरफ्तारी या आरोप की पुष्टि होने पर ही उसे स्थापित तथ्य के रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए।


पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शहजाद भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच कई चरणों में आगे बढ़ रही है। सहारनपुर में गिरफ्तारी, मुजफ्फरनगर से जुड़े आरोपी और अमरोहा के गजरौला में ATS की कार्रवाई इस जांच की अलग-अलग कड़ियां हैं।

मामले का संवेदनशील पक्ष यह है कि जांच एजेंसियां डिजिटल संपर्कों, संभावित स्थानीय नेटवर्क और अंतरराज्यीय कनेक्शन की पड़ताल कर रही हैं। लेकिन जांच में सामने आए आरोपों और अदालत में साबित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

फिलहाल ATS की कार्रवाई को एक जारी जांच के रूप में देखा जाना चाहिए। आगे की आधिकारिक जानकारी ही यह स्पष्ट करेगी कि पश्चिमी UP में सामने आए संपर्कों की वास्तविक भूमिका क्या थी और कथित नेटवर्क का स्थानीय स्तर पर कितना विस्तार था।

वीडियो देखें

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Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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