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सीरिया में Bashar al-Assad को मौत की सजा, Atef Najib भी दोषी, 2011 दमन पर ऐतिहासिक फैसला

Shah Times 2026-08-11 15:00:15
सीरिया में Bashar al-Assad को मौत की सजा, Atef Najib भी दोषी, 2011 दमन पर ऐतिहासिक फैसला

सीरिया में Bashar al-Assad को मौत की सजा, 2011 दमन पर ऐतिहासिक फैसला

Assad और Atef Najib को मौत की सजा, दमिश्क कोर्ट का बड़ा फैसला

14 साल पुराने सीरियाई संघर्ष पर बड़ा न्यायिक फैसला, Assad को मृत्युदंड


सीरिया की एक अदालत ने 11 अगस्त 2026 को पूर्व राष्ट्रपति Bashar al-Assad और उनके भाई Maher al-Assad को मानवता के खिलाफ अपराधों और युद्ध अपराधों से जुड़े आरोपों में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई। Assad के चचेरे भाई और पूर्व सुरक्षा अधिकारी Atef Najib को भी मौत की सजा दी गई। Najib को हिरासत में लेकर मुकदमा चलाया गया था और वह अदालत में मौजूद थे। मामला 2011 में Daraa से शुरू हुए विद्रोह के शुरुआती दमन से जुड़ा है, जिसे बाद में 14 साल लंबे सीरियाई संघर्ष का शुरुआती बिंदु माना गया।


दमिश्क, सीरिया | 11 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स 

Mohd Haris


Assad युग पर अदालत का ऐतिहासिक फैसला

सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति Bashar al-Assad के लंबे शासन से जुड़े गंभीर अपराधों पर अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। दमिश्क की अदालत ने 11 अगस्त 2026 को Assad और उनके भाई Maher al-Assad को अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई। Assad के चचेरे भाई Atef Najib को भी मृत्युदंड दिया गया।

यह फैसला सीरिया के लिए बेहद अहम है क्योंकि यह पूर्व शासन के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ घरेलू न्यायिक कार्रवाई का सबसे बड़ा पड़ाव है।

Bashar al-Assad और Maher al-Assad सीरिया छोड़कर रूस चले गए थे। इसलिए दोनों पर मुकदमा उनकी गैरमौजूदगी में चला। इसके विपरीत Atef Najib को गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने अदालत में व्यक्तिगत रूप से कार्यवाही का सामना किया।

Atef Najib कौन हैं

Atef Najib Assad परिवार के करीबी रिश्तेदार और पूर्व वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी थे। वह Daraa में Political Security Branch के प्रमुख रहे थे।

2011 में Daraa में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू होने के दौरान Najib की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगे। अभियोजन के मुताबिक प्रदर्शनकारियों और उनके समर्थकों के खिलाफ सुरक्षा कार्रवाई में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

उनके खिलाफ मुकदमे में हत्या, यातना और नरसंहार से जुड़ी जिम्मेदारी समेत कम से कम 10 आरोप लगाए गए थे।

अप्रैल 2026 में दमिश्क में उनकी सार्वजनिक सुनवाई शुरू हुई थी। यह पूर्व Assad शासन के किसी वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ सीरिया में शुरू हुई पहली प्रमुख सार्वजनिक आपराधिक कार्यवाही थी।

Daraa से शुरू हुई कहानी

2011 में Daraa में कुछ किशोरों द्वारा सरकार विरोधी graffiti लिखे जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी और कथित यातना ने स्थानीय स्तर पर भारी आक्रोश पैदा किया।

इसके बाद Daraa में विरोध प्रदर्शन तेज हुए। सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने आंदोलन को और व्यापक बनाया।

धीरे-धीरे विरोध पूरे देश में फैल गया और सीरिया एक लंबे गृहयुद्ध में फंस गया।

इसीलिए Atef Najib का मुकदमा केवल एक व्यक्ति के खिलाफ criminal case नहीं माना जा रहा था। यह 2011 में हिंसक दमन की शुरुआत से जुड़ी जवाबदेही की पहली बड़ी judicial test भी थी।

Bashar al-Assad पर क्या आरोप हैं

अदालत ने Bashar al-Assad को गंभीर अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्टों में उनके खिलाफ crimes against humanity और war crimes से जुड़े आरोपों का उल्लेख है।

अभियोजन का तर्क पूर्व शासन की उस व्यापक नीति से जुड़ा है जिसमें विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों और दूसरे राज्य तंत्र का इस्तेमाल किया गया।

सीरियाई संघर्ष के दौरान बड़े पैमाने पर हत्या, यातना, जबरन गायब किए जाने और नागरिकों के खिलाफ हमलों के आरोप Assad सरकार पर लंबे समय से लगते रहे हैं।

हालांकि मौजूदा फैसला सीरिया की घरेलू अदालत का फैसला है। इसे अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले के समान समझना उचित नहीं होगा।

Maher al-Assad को भी मौत की सजा

इस मामले में Bashar अकेले नहीं हैं। उनके छोटे भाई Maher al-Assad को भी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई है।

Maher लंबे समय तक सीरियाई सैन्य और सुरक्षा ढांचे में प्रभावशाली भूमिका में रहे।

उनका नाम Assad शासन के सैन्य दमन से जुड़े मामलों में बार-बार सामने आता रहा है।

अब अदालत का फैसला पूर्व शासन के राजनीतिक नेतृत्व के साथ-साथ उसके सुरक्षा और सैन्य ढांचे की जवाबदेही पर भी बड़ा संदेश देता है।

Bashar और Maher अदालत में मौजूद क्यों नहीं थे

दोनों Assad भाइयों ने दिसंबर 2024 में Damascus पर विद्रोही बलों के कब्जे के बाद सीरिया छोड़ दिया था। वे रूस चले गए।

इसी वजह से उनके खिलाफ मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में चला।

कानूनी दृष्टि से यह पहलू महत्वपूर्ण है क्योंकि death sentence के क्रियान्वयन का सवाल तभी व्यावहारिक बनेगा जब आरोपी सीरियाई अधिकारियों की हिरासत में हों।

फिलहाल दोनों सीरिया से बाहर हैं।

Atef Najib को कैसे गिरफ्तार किया गया

Atef Najib को जनवरी 2025 में सीरियाई सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया था। वह Assad शासन के पतन के बाद छिपे हुए थे।

उनकी गिरफ्तारी ने नए सीरियाई प्रशासन के सामने transitional justice का एक अहम सवाल खड़ा किया।

क्या पुराने शासन के उन अधिकारियों को अदालत के सामने लाया जाएगा जिन पर गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप हैं?

Najib का मुकदमा इस सवाल का पहला बड़ा जवाब बना।

अदालत में क्या हुआ

Najib अप्रैल 2026 से शुरू हुई सुनवाई में अदालत के सामने मौजूद रहे। वह prison uniform में अदालत पहुंचे और उनके खिलाफ indictment पढ़ा गया।

मुकदमे में कई पीड़ितों और उनके परिवारों को civil parties के रूप में शामिल किया गया।

Syria-focused legal analysis के मुताबिक शुरुआती चरण में 50 plaintiffs को civil parties के तौर पर दर्ज किया गया था। अदालत ने यह भी माना था कि आगे और पीड़ित मामले में शामिल हो सकते हैं।

इससे मुकदमे का फोकस केवल state prosecution तक सीमित नहीं रहा। पीड़ित परिवारों को भी न्यायिक प्रक्रिया में स्थान मिला।

2011 के दमन की जांच क्यों अहम है

सीरियाई संघर्ष की शुरुआत को समझने के लिए Daraa की घटनाएं केंद्रीय महत्व रखती हैं।

शुरुआती विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ कठोर सुरक्षा कार्रवाई ने आंदोलन को शांत करने के बजाय उसे देश के दूसरे हिस्सों तक फैलाने में योगदान दिया।

बाद में संघर्ष में कई घरेलू और विदेशी पक्ष शामिल हुए। ISIS, विभिन्न विद्रोही संगठन, कुर्द नेतृत्व वाले बल और विदेशी सैन्य शक्तियां भी युद्ध में शामिल हुईं।

लेकिन मौजूदा मुकदमा मुख्य रूप से पूर्व Assad शासन से जुड़े आरोपों पर केंद्रित है।

14 साल के संघर्ष की विरासत

सीरिया का संघर्ष 2011 में शुरू हुआ और लगभग 14 वर्षों तक देश को हिंसा, विस्थापन और आर्थिक तबाही से गुजरना पड़ा।

Associated Press के अनुसार इस संघर्ष में लगभग 500,000 लोगों की मौत हुई।

लाखों लोग विस्थापित हुए। बड़ी संख्या में लोगों ने पड़ोसी देशों और यूरोप में शरण ली।

शहरों का infrastructure तबाह हुआ और स्वास्थ्य तथा शिक्षा व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा।

इस पृष्ठभूमि में Assad और उनके सहयोगियों के खिलाफ मुकदमे का महत्व केवल criminal punishment तक सीमित नहीं है।

Syria में transitional justice का पहला बड़ा परीक्षण

पूर्व शासन के अधिकारियों पर मुकदमे सीरिया की नई न्यायिक व्यवस्था के लिए बड़ा परीक्षण हैं।

Syrian Network for Human Rights की legal analysis के मुताबिक Najib का मुकदमा post-Assad phase में गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए national judiciary की क्षमता की पहली बड़ी practical test था।

चुनौती यह भी है कि सीरिया के पास international crimes के लिए पूरी तरह विकसित स्वतंत्र domestic legal framework नहीं है।

इसलिए अदालत को national criminal law और international humanitarian law के बीच कानूनी संबंध तय करना पड़ा।

मानवाधिकार संगठनों की नजर

Amnesty International ने सीरिया में पूर्व शासन के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमों को accountability की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना है। साथ ही संगठन ने न्यायिक प्रक्रिया में international legal standards और निष्पक्ष trial की जरूरत पर जोर दिया है।

मानवाधिकार संगठनों की चिंता यह भी है कि न्यायिक कार्रवाई राजनीतिक बदले में नहीं बदलनी चाहिए।

आरोपों की गंभीरता के बावजूद हर आरोपी को fair trial, legal representation और appeal जैसे मूलभूत अधिकारों की आवश्यकता रहती है।

यही किसी transitional justice process की credibility तय करता है।

मौत की सजा पर भी बहस

इस फैसले का एक अहम पहलू death penalty है।

सीरिया में मौत की सजा अभी कानूनी व्यवस्था का हिस्सा है। Amnesty International ने भी अपनी हालिया समीक्षा में इस तथ्य को रेखांकित किया है।

मानवाधिकार संगठनों के लिए यह एक संवेदनशील मुद्दा है।

एक तरफ पीड़ित परिवार लंबे समय से न्याय और जवाबदेही की मांग करते रहे हैं। दूसरी तरफ international human rights framework death penalty के इस्तेमाल को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज करता है।

इसलिए यह फैसला Syria की transitional justice policy को लेकर आगे भी बहस पैदा करेगा।

क्या Assad को वास्तव में फांसी दी जा सकती है

फिलहाल ऐसा होना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है क्योंकि Bashar al-Assad सीरिया में नहीं हैं।

वह रूस में हैं और सीरियाई अदालत के पास उनके शरीर और हिरासत पर नियंत्रण नहीं है।

इसलिए verdict का तत्काल प्रभाव मुख्य रूप से legal और symbolic accountability के स्तर पर है।

अगर भविष्य में Assad सीरियाई हिरासत में आते हैं, तभी sentence के enforcement का सवाल वास्तविक रूप से सामने आएगा।

रूस की भूमिका पर भी नजर

Assad शासन के पतन के बाद उनका रूस जाना इस मामले को अंतरराष्ट्रीय आयाम देता है।

अब सीरियाई अदालत के फैसले के बाद यह सवाल उठ सकता है कि रूस Assad को सीरियाई authorities को सौंपेगा या नहीं।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टिंग में ऐसी किसी extradition प्रक्रिया की पुष्टि नहीं है।

इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगा कि death sentence जल्द लागू होगा।

क्या यह फैसला सीरिया के लिए नया अध्याय है

राजनीतिक तौर पर यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है।

Assad परिवार ने दशकों तक सीरिया की सत्ता पर नियंत्रण रखा। Bashar al-Assad ने 2000 में अपने पिता Hafez al-Assad के बाद राष्ट्रपति पद संभाला था।

उनके शासन का सबसे बड़ा संकट 2011 के विद्रोह के बाद शुरू हुआ।

अब उन्हीं घटनाओं से जुड़े अपराधों पर अदालत का फैसला आया है।

इससे सत्ता परिवर्तन के बाद जवाबदेही की प्रक्रिया को संस्थागत रूप देने की कोशिश दिखाई देती है।

लेकिन न्याय की राह आसान नहीं

एक verdict से सीरिया के सभी युद्ध अपराधों का हिसाब नहीं हो जाएगा।

संघर्ष में अलग-अलग पक्षों पर गंभीर आरोप लगे हैं। Assad सरकार के अलावा armed opposition groups, ISIS और दूसरे actors पर भी मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप रहे हैं।

इसलिए व्यापक transitional justice framework के लिए सभी गंभीर अपराधों की निष्पक्ष जांच जरूरी होगी।

अगर accountability केवल एक पक्ष तक सीमित रहती है, तो न्यायिक प्रक्रिया की credibility पर सवाल उठ सकते हैं।

पीड़ित परिवारों के लिए क्या मायने रखता है

सीरिया में हजारों परिवार वर्षों से अपने लापता रिश्तेदारों, मृत परिजनों और यातना के मामलों के जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

Atef Najib के मामले में कुछ पीड़ित परिवार सीधे अदालत की प्रक्रिया से जुड़े हैं।

उनके लिए verdict एक symbolic recognition भी है कि राज्य के पुराने अधिकारियों पर criminal responsibility तय की जा सकती है।

लेकिन पीड़ितों के लिए न्याय में केवल सजा शामिल नहीं होती। उन्हें सत्य, दस्तावेज, लापता लोगों की जानकारी, मुआवजा और सुरक्षित भविष्य भी चाहिए।

Assad युग की जवाबदेही का अगला चरण

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों पर भी मुकदमे आगे बढ़ेंगे।

Najib के मामले में indictment में Bashar al-Assad, Maher al-Assad और कई अन्य पूर्व सुरक्षा तथा सैन्य अधिकारियों के नाम शामिल किए गए थे। इनमें से कई आरोपी अदालत में मौजूद नहीं थे।

अगर सीरिया की न्यायिक व्यवस्था इन मामलों को आगे बढ़ाती है, तो यह post-Assad accountability process को व्यापक रूप दे सकता है।

लेकिन इसके लिए मजबूत evidence collection, fair trials और transparent judicial procedures जरूरी होंगे।

अंतरराष्ट्रीय अदालतों से अलग प्रक्रिया

यह समझना भी जरूरी है कि Bashar al-Assad के खिलाफ मौजूदा फैसला Syrian domestic court का है।

यह International Criminal Court या किसी UN tribunal का verdict नहीं है।

सीरिया की अपनी अदालत ने national legal framework और international law के संदर्भ में मामले की सुनवाई की है।

इसलिए इसके jurisdiction, enforcement और international recognition को लेकर अलग कानूनी सवाल मौजूद रहेंगे।

निष्कर्ष

सीरिया की अदालत ने 11 अगस्त 2026 को पूर्व राष्ट्रपति Bashar al-Assad और उनके भाई Maher al-Assad को अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई। Assad के चचेरे भाई और पूर्व Daraa सुरक्षा प्रमुख Atef Najib को भी मौत की सजा दी गई।

यह फैसला 2011 के शुरुआती विद्रोह के दमन और उसके बाद शुरू हुए 14 साल लंबे संघर्ष से जुड़े गंभीर अपराधों की जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम है।

Atef Najib का मुकदमा अप्रैल 2026 में शुरू हुआ था और इसे post-Assad Syria में पूर्व शासन के किसी वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ पहली बड़ी सार्वजनिक criminal proceeding माना गया।

Bashar और Maher al-Assad देश से बाहर हैं, इसलिए उनके खिलाफ सुनाई गई सजा को तत्काल लागू करना संभव नहीं दिखता। इसके बावजूद verdict का राजनीतिक और symbolic असर बड़ा है।

अब सीरिया के सामने असली चुनौती यह है कि transitional justice को केवल कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों तक सीमित न रखा जाए। पीड़ितों को निष्पक्ष मुकदमे, सत्य, दस्तावेजी जवाबदेही और प्रभावी न्याय मिले।

Assad शासन का अंत सीरिया की राजनीतिक कहानी का अंत नहीं था। अब अदालतों के जरिए उस दौर की जवाबदेही तय करने की कोशिश शुरू हुई है। इस प्रक्रिया की credibility इस बात पर निर्भर करेगी कि आगे के मुकदमों में कानून, evidence और fair trial standards कितनी मजबूती से लागू होते हैं।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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