इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने जेल में बंद हमास के वरिष्ठ सदस्य हसन सलामेह का वीडियो जारी किया है। वीडियो में वह सलामेह को जान से मारने और फांसी देने की इच्छा जताते दिखाई देते हैं।
Israel | 28 September 2026
By Mohd Haris
दक्षिण-पश्चिम एशिया में इजराइल और हमास के बीच जारी लंबे संघर्ष के बीच इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर का एक नया जेल वीडियो सामने आया है। वीडियो में बेन-ग्वीर जेल में बंद हमास के वरिष्ठ सदस्य हसन सलामेह के सामने खड़े दिखाई देते हैं और उसे मौत की सजा देने की इच्छा जाहिर करते हैं। यह वीडियो खुद बेन-ग्वीर ने सोशल मीडिया पर जारी किया है।
वीडियो में क्या हुआ
रिपोर्टों के मुताबिक, बेन-ग्वीर सशस्त्र और नकाबपोश सुरक्षा कर्मियों के साथ सलामेह के सामने दिखाई देते हैं। उन्होंने सलामेह से कहा कि जेल में उसके लिए जो सख्त परिस्थितियां हैं, वे उनकी नीतियों का हिस्सा हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह उसे मारना और मौत की सजा दिलाना चाहते हैं।
बेन-ग्वीर ने इस मुलाकात को अपने लिए एक तरह का “क्लोज़र” बताया। उनका कहना था कि 1996 में यरुशलम बस धमाकों के बाद वह किशोर अवस्था में विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए थे और अब राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री के तौर पर सलामेह के सामने खड़े हैं।
कौन हैं हसन सलामेह
हसन सलामेह हमास के सैन्य ढांचे से जुड़े वरिष्ठ सदस्य रहे हैं। इजराइली अदालत ने उन्हें 1990 के दशक में हुए घातक हमलों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया था। संयुक्त राष्ट्र के पुराने रिकॉर्ड के मुताबिक, 1996 में उन्हें कई लगातार उम्रकैद की सजाएं सुनाई गई थीं।
इजराइली और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, सलामेह को 1996 में यरुशलम में लाइन 18 बसों पर हुए आत्मघाती हमलों की योजना और संचालन से जोड़ा गया था। इजराइली रिकॉर्ड के अनुसार इन हमलों में दर्जनों लोग मारे गए और कई अन्य घायल हुए।
यही 1996 के हमले बेन-ग्वीर के मौजूदा बयान की पृष्ठभूमि में भी दिखाई देते हैं। बेन-ग्वीर ने वीडियो में अपने किशोर दौर के विरोध प्रदर्शनों का जिक्र किया है।
डेथ पेनल्टी कानून का संदर्भ
इस घटनाक्रम की अहम कड़ी इजराइल में 2026 में पारित मौत की सजा से जुड़ा कानून भी है। इजराइली संसद ने 30 मार्च 2026 को दूसरे और तीसरे रीडिंग में डेथ पेनल्टी फॉर टेररिस्ट्स कानून को मंजूरी दी। आधिकारिक Knesset रिकॉर्ड के अनुसार प्रस्ताव के पक्ष में 62 वोट पड़े, जबकि 48 सदस्य इसके खिलाफ रहे और 1 सदस्य ने मतदान से परहेज किया।
कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में आतंकवादी कृत्य के दौरान जान लेने वाले दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया गया है। वेस्ट बैंक से जुड़े मामलों में कानून में कुछ परिस्थितियों में मौत की सजा को प्राथमिक दंड बनाने और विशेष परिस्थितियों में उम्रकैद की गुंजाइश रखने का प्रावधान भी दर्ज है।
हालांकि हसन सलामेह का मामला 1996 के पुराने मुकदमे से जुड़ा है। इसलिए मौजूदा कानून और उनके मामले के बीच सीधे तौर पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि नया कानून अपने आप उनकी मौजूदा सजा को मौत की सजा में बदल देता है।
बेन-ग्वीर का राजनीतिक संदेश
इस वीडियो का एक दूसरा पहलू इजराइल की मौजूदा राजनीति से जुड़ा है। बेन-ग्वीर ने कहा है कि यदि उन्हें भविष्य की सरकार में रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलती है, तो वह फिलिस्तीनी कैदियों के लिए मौत की सजा के इस्तेमाल को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने इस मुद्दे को अपनी राजनीतिक मांगों से भी जोड़ा है।
इजराइल में अगला Knesset चुनाव 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। इसलिए बेन-ग्वीर के हालिया बयानों को मौजूदा चुनावी माहौल के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
जेल के वीडियो पर पहले भी विवाद
बेन-ग्वीर पहले भी जेलों और हिरासत केंद्रों से वीडियो जारी करने को लेकर विवादों में रहे हैं। इजराइल की Central Elections Committee ने इस साल उनके कुछ वीडियो में सरकारी संसाधनों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों के इस्तेमाल को चुनावी प्रचार से जोड़कर आदेश जारी किए थे। एक मामले में जेल सेवा की सुविधा और वर्दीधारी कर्मियों की मौजूदगी वाले वीडियो को चुनावी प्रचार के तौर पर हटाने का निर्देश दिया गया था।
हमास की प्रतिक्रिया
बेन-ग्वीर के वीडियो पर हमास ने प्रतिक्रिया देते हुए उनकी धमकी की निंदा की है। हमास ने दावा किया कि इस तरह के बयान फिलिस्तीनी कैदियों के खिलाफ हिंसा का खतरा बढ़ा सकते हैं। यह प्रतिक्रिया हमास की अपनी राजनीतिक और संघर्ष संबंधी स्थिति का हिस्सा है, इसलिए इसे स्वतंत्र तथ्य के बजाय संगठन के आधिकारिक बयान के तौर पर देखा जाना चाहिए।
इजराइल की तरफ से बेन-ग्वीर का तर्क अलग है। वह सलामेह और अन्य फिलिस्तीनी कैदियों को इजराइल के खिलाफ घातक हमलों से जुड़े दोषी कैदियों के तौर पर पेश करते हैं और मौत की सजा को आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति का हिस्सा बताते हैं। इजराइली Knesset के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी समर्थकों ने कानून को आतंकवाद के खिलाफ निवारक नीति के रूप में पेश किया था।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।