संयुक्त राष्ट्र महासभा ने Equal Earth मानचित्र के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया। 164 देशों ने पक्ष में मतदान किया, अमेरिका अकेला विरोध में रहा।
न्यूयॉर्क | 5 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
विश्व मानचित्र पर अफ्रीका की वास्तविक भौगोलिक हैसियत दिखाने की मुहिम को संयुक्त राष्ट्र महासभा में बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली है। 4 सितंबर 2026 को महासभा ने अफ्रीकी देशों की पहल से जुड़े प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूर किया। प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट दिया और छह देशों ने मतदान से दूरी बनाई।
इस पहल का मकसद दुनिया के नक्शे पर महाद्वीपों के आकार को अधिक सटीक तरीके से पेश करना है। इसके केंद्र में 2018 में विकसित Equal Earth cartographic projection है, जो जमीन के क्षेत्रफल को अधिक वास्तविक अनुपात में दिखाती है।
दुनिया में लंबे समय से इस्तेमाल होने वाली Mercator projection वर्ष 1569 में फ्लेमिश कार्टोग्राफर Gerardus Mercator ने विकसित की थी। इसका मूल उद्देश्य समुद्री नौवहन था।
इस प्रोजेक्शन में भूमध्य रेखा से दूर स्थित भूभाग अपने वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना में बड़ा दिखाई देता है। इसका असर खास तौर पर अफ्रीका जैसे भूमध्यरेखीय क्षेत्र पर पड़ता है।
मिसाल के तौर पर, Mercator मानचित्र पर ग्रीनलैंड और अफ्रीका आकार में लगभग समान दिखाई दे सकते हैं, जबकि वास्तविक क्षेत्रफल के लिहाज से अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है।
इस मुहिम की अगुवाई टोगो ने अफ्रीकी समूह की ओर से की। इसे अफ्रीकी संघ का समर्थन हासिल था। अफ्रीकी संघ ने फरवरी 2026 में Equal Earth projection को अपनाने का फैसला किया था और सदस्य देशों से अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों में इसे शामिल करने का आग्रह किया था।
टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने संयुक्त राष्ट्र में इस पहल को वैज्ञानिक और प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल के तौर पर पेश किया। उनका तर्क है कि मानचित्र केवल भौगोलिक जानकारी देने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे दुनिया के बारे में लोगों की सामूहिक समझ को भी प्रभावित करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला। अमेरिका अकेला देश था जिसने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। छह देशों ने Abstain किया।
यह आंकड़ा इस पहल के व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन को दिखाता है। हालांकि, मतदान को अफ्रीका के क्षेत्रफल में किसी वास्तविक बदलाव के तौर पर समझना गलत होगा। जमीन का आकार नहीं बदला है। बदलाव उस तरीके में प्रस्तावित है, जिससे मानचित्रों पर अलग-अलग भूभागों को प्रदर्शित किया जाता है।
अमेरिका का विरोध इस मतदान को अंतरराष्ट्रीय बहस का अहम हिस्सा बनाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी प्रतिनिधि ने इस पहल को अनावश्यक बताया और इसे संयुक्त राष्ट्र की प्राथमिकताओं से भटकाव के तौर पर देखा।
इससे बहस केवल कार्टोग्राफी तक सीमित नहीं रहती। इसके पीछे यह सवाल भी है कि वैश्विक संस्थान दुनिया को किस तरह पेश करते हैं और पुराने प्रतिनिधित्व के तौर-तरीकों को कब और किस हद तक बदला जाना चाहिए।
नहीं। संयुक्त राष्ट्र का यह फैसला Mercator projection पर वैश्विक प्रतिबंध नहीं लगाता। इसका उद्देश्य Equal Earth जैसी समान-क्षेत्रफल वाली projections के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है, खासकर शिक्षा, संस्थागत कामकाज और सार्वजनिक प्रतिनिधित्व में।
Mercator projection का समुद्री नौवहन में अपना व्यावहारिक महत्व बना हुआ है। इसलिए नई नीति को पुराने मानचित्र को पूरी तरह हटाने के बजाय उसके इस्तेमाल के संदर्भ और उद्देश्य को बदलने की कोशिश के रूप में देखना ज्यादा सटीक होगा।
अफ्रीकी देशों के लिए यह पहल केवल तकनीकी सुधार नहीं है। अफ्रीकी संघ के आधिकारिक निर्णय में Mercator projection से जुड़ी असमानताओं को औपनिवेशिक दौर की कार्टोग्राफी की विरासत से जोड़ा गया है। संघ ने Equal Earth को अपनाते हुए इसे अफ्रीका की वैश्विक छवि को अधिक सटीक बनाने की दिशा में कदम बताया।
इसका व्यापक संदेश यह है कि अफ्रीका को वैश्विक व्यवस्था में अपनी राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक भूमिका के साथ-साथ अपने भौगोलिक प्रतिनिधित्व को भी अधिक सटीक रूप में सामने लाना है।
अब असली परीक्षा प्रस्ताव के अमल की होगी। संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव सदस्य देशों को Equal Earth जैसी projections के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसका असर स्कूल की किताबों, संस्थागत मानचित्रों, मीडिया ग्राफिक्स और डिजिटल मैपिंग सेवाओं में धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है।
हालांकि हर देश या कंपनी के लिए एक ही projection अपनाना अनिवार्य नहीं हुआ है। अलग-अलग उद्देश्यों के लिए अलग cartographic projections की जरूरत बनी रहेगी।
संयुक्त राष्ट्र का यह फैसला भौगोलिक सीमाओं को बदलने वाला निर्णय नहीं है। इसकी अहमियत इस बात में है कि दुनिया को दिखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले मानचित्रों में क्षेत्रफल की विकृति को अब वैश्विक स्तर पर औपचारिक बहस का हिस्सा बनाया गया है।
164 देशों का समर्थन बताता है कि इस मुद्दे को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला। अमेरिका का अकेला विरोध इस बहस में अलग दृष्टिकोण को सामने रखता है। अब निगाह इस बात पर होगी कि शिक्षा, संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों में यह प्रस्ताव कितनी तेजी से व्यावहारिक बदलाव में बदलता है
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।