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भाजपा ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए खूब काला धन कमाया : कांग्रेस

None 2024-09-29 20:42:38
भाजपा ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए खूब काला धन कमाया : कांग्रेस

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने आज यहां पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में सरकार ने रिजर्व बैंक, बैंक, सुप्रीम कोर्ट आदि के निर्देशों का भी पालन नहीं किया

नई दिल्ली, (शाह टाइम्स) । कांग्रेस ने  कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए खूब काला धन कमाया है और इसे उजागर होने से रोकने के लिए लगातार नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने आज यहां पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में सरकार ने रिजर्व बैंक, बैंक, सुप्रीम कोर्ट आदि के निर्देशों का भी पालन नहीं किया। यहां तक ​​कि इस बारे में लाए गए विधेयक को भी धन विधेयक बनाकर राज्यसभा में आने से रोक दिया गया।

उन्होंने कहा, "भाजपा की इतनी बड़ी आय ऐसे ही नहीं बढ़ी है। इसीलिए भाजपा चुनाव के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड लेकर आई। काला धन और बेनामी चंदा, भाजपा के पास यही एक धंधा बचा है। यह कहानी इस बात से शुरू होती है कि चुनावी बांड के पीछे भाजपा की क्या सोच थी और कैसे सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उसने बांड को लेकर सारे नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। कोर्ट के ये शब्द पूरी तरह से साबित हो चुके हैं।"

प्रवक्ता ने कहा, "चुनावी बॉन्ड मामले का चौथा पहलू एफआईआर दर्ज होना है। किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान है, जिसमें अदालत मामले की प्रारंभिक जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश देती है। इस एफआईआर में भी वित्त मंत्री आरोपी नंबर एक हैं और मामले में अन्य लोग भी संबंधित धाराओं के तहत आरोपी हैं। इसमें नाम के साथ आंकड़े भी हैं - कुल आंकड़ा 8,000 करोड़ रुपये है।"

https://twitter.com/INCIndia/status/1840313003817697345?t=jOR6c9n1afJKcTufGMhduA&s=19

  उन्होंने कहा, "मीडिया ने पिछले एक साल में चुनावी बॉन्ड से जुड़ी कई कहानियां, नाम और किस्से छापे हैं। उनमें कई तथ्य हैं। उन कहानियों में बताया गया है कि कैसे और कब किसी कंपनी या व्यक्ति ने चुनावी बॉन्ड लिया। कई मामलों में पहले जांच एजेंसियों ने छापेमारी की और फिर उन कंपनियों ने चुनावी बॉन्ड ले लिए। यह भी देखा गया कि चुनावी बॉन्ड खरीदने के बाद उन मामलों में जांच धीमी हो गई। हमने कई मामलों में यह भी देखा कि जिन कंपनियों की चुकता पूंजी 100 करोड़ भी नहीं थी, उन्होंने 500 करोड़ के चुनावी बॉन्ड खरीदे। 

जब चुनावी बॉन्ड बनाया जा रहा था, तब रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा था कि इस चुनावी बॉन्ड का मामला संदिग्ध है और इसका गलत इस्तेमाल शेल कंपनियां कर सकती हैं। बैंक के गवर्नर ने इस संबंध में सरकार को एक पत्र लिखा था, लेकिन सरकार इस पत्र को कूड़ेदान में फेंक देती है और उन्हें हटा देती है।" उन्होंने कहा, "सरकार जानती थी कि वह गलत कर रही है और यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह विधेयक राज्यसभा में पारित न हो जाए, सरकार ने इसे धन विधेयक का टैग दे दिया। अब सबसे बड़ा मुद्दा बराबरी का मौका है और यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए बहुत महत्वपूर्ण भी है।"  उन्होंने कहा, "यह संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न अंग है। लेकिन, चुनावी बॉन्ड संविधान के उसी मूल ढांचे की नींव पर हमला करता है। इस तरह यह योजना भाजपा के पुराने नारे का नया संस्करण है - 'खाऊंगा भी और चुराऊंगा भी और वसूली भी करूंगा भी।"

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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