ब्राज़ील में लूला की राष्ट्रपति चुनाव में जीत को बोल्सोनारो की पार्टी ने स्वीकार कर लिया। ट्रंप ने धांधली का आरोप लगाया, जबकि चुनावी गड़बड़ी का ठोस प्रमाण सामने नहीं आया।
ब्रासीलिया, ब्राज़ील | 27 अक्टूबर 2026
By Mohd Haris
ब्राज़ील चुनाव में बड़ा सियासी मोड़, बोल्सोनारो की पार्टी ने स्वीकार किए नतीजे
ब्राज़ील के राष्ट्रपति चुनाव के बाद जारी सियासी तनातनी के बीच एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। दक्षिणपंथी लिबरल पार्टी ने राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की चुनावी जीत को स्वीकार कर लिया है। हालांकि पार्टी के उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो ने अभी तक अपनी हार औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं की है।
27 अक्टूबर को प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, लिबरल पार्टी के अध्यक्ष वाल्डेमार कोस्टा नेटो ने सोमवार, 26 अक्टूबर को जारी बयान में चुनाव परिणाम को मान्यता देने की बात कही।
पार्टी ने इसके साथ ही मतदान प्रक्रिया से मुताल्लिक़ उठाए गए सवालों की उचित जांच और स्पष्टीकरण की मांग भी बरकरार रखी है।
लूला को 44 लाख से अधिक वोटों की बढ़त
25 अक्टूबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को बड़े अंतर से शिकस्त दी।
रिपोर्ट में दर्ज चुनावी आंकड़ों के मुताबिक:
लूला दा सिल्वा को 6.425 करोड़ से अधिक वोट मिले।
फ्लावियो बोल्सोनारो को करीब 5.983 करोड़ वोट मिले।
दोनों उम्मीदवारों के बीच 44 लाख से अधिक वोटों का अंतर रहा।
इस अंतर ने लूला की चुनावी जीत को निर्णायक बनाया। हालांकि चुनाव के बाद मतदान अवधि बढ़ाने के फैसले पर विपक्षी उम्मीदवार ने सवाल खड़े किए।
मतदान का समय बढ़ाने पर क्यों शुरू हुआ विवाद?
चुनाव के दिन ब्राज़ील के कुछ इलाकों में खराब मौसम और सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं।
बोल्सोनारो के चुनावी खेमे का कहना था कि दक्षिणी ब्राज़ील में भारी बारिश के कारण कुछ मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचने में परेशानी हुई।
दूसरी ओर, लूला के चुनाव अभियान ने आरोप लगाया कि कुछ शहरों में सार्वजनिक परिवहन की सेवाएं सीमित किए जाने से उनके समर्थकों को मतदान करने में मुश्किल पेश आई।
दोनों पक्षों ने अलग-अलग वजहों से मतदान का समय बढ़ाने की मांग की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश क्रिस्टियानो ज़ानिन ने संबंधित मतदान केंद्रों के लिए मतदान समाप्त होने का समय शाम 5 बजे से बढ़ाकर शाम 7 बजे करने की अनुमति दी।
इसी फैसले को लेकर बोल्सोनारो ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि मतदान के दौरान नियमों में बदलाव से उनके समर्थकों के हित प्रभावित हुए।
हालांकि यह आरोप अभी प्रमाणित चुनावी धांधली के रूप में स्थापित नहीं हुआ है।
ट्रंप ने उठाए सवाल, लेकिन हस्तक्षेप का एलान नहीं
ब्राज़ील के चुनावी नतीजों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी ने विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।
सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ब्राज़ील का चुनाव उन्हें धांधली से प्रभावित प्रतीत हुआ।
हालांकि उन्होंने अपने आरोप के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया।
ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में किसी पक्ष का समर्थन नहीं किया।
उनकी टिप्पणी को चुनावी प्रक्रिया पर संदेह के इज़हार के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इसे किसी औपचारिक अमेरिकी सरकारी जांच या चुनाव परिणाम को अस्वीकार करने के फैसले के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
क्या अतिरिक्त मतदान से चुनाव का परिणाम बदल सकता था?
चुनावी विवाद के बीच अतिरिक्त मतदान अवधि के वास्तविक असर को लेकर भी विश्लेषण सामने आया है।
ब्राज़ील के शैक्षणिक संस्थान इंस्पर के प्रोफेसर पेड्रो बुर्गोस के विश्लेषण के अनुसार, मतदान अवधि बढ़ाने से देशभर में लगभग 35,000 अतिरिक्त वोट पड़े।
यह कुल मतदान का 0.03 प्रतिशत से भी कम था।
इसके मुकाबले लूला की जीत का अंतर 44 लाख से अधिक वोट रहा।
इन आंकड़ों के आधार पर मतदान अवधि बढ़ने से पड़े अतिरिक्त वोटों की संख्या चुनावी जीत के अंतर से काफी कम थी।
हालांकि यह विश्लेषण मतदान अवधि बढ़ाने के प्रभाव का आकलन है। इसे चुनाव प्रक्रिया के हर पहलू की स्वतंत्र न्यायिक जांच का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
फ्लावियो बोल्सोनारो ने दी थी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो ने नतीजों को अस्वीकार्य बताते हुए उन्हें रद्द कराने के लिए कानूनी कार्रवाई की बात कही थी।
हालांकि अब उनकी अपनी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर चुनाव परिणाम स्वीकार कर लिए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्राज़ील में राजनीतिक और कानूनी सलाहकारों ने बोल्सोनारो को चुनाव परिणाम के खिलाफ चुनौती आगे न बढ़ाने की सलाह दी है।
एक स्थानीय रिपोर्ट में दावा किया गया कि बोल्सोनारो अपने चुनावी परिणाम को रद्द कराने की कोशिश छोड़ने पर राज़ी हो गए हैं।
इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि वह औपचारिक कानूनी चुनौती दाखिल करेंगे या नहीं।
जायर बोल्सोनारो का राजनीतिक अतीत भी चर्चा में
फ्लावियो बोल्सोनारो के पिता जायर बोल्सोनारो 2019 से 2023 तक ब्राज़ील के राष्ट्रपति रहे।
2022 के राष्ट्रपति चुनाव में लूला से हारने के बाद जायर बोल्सोनारो ने भी चुनावी परिणाम को स्वीकार करने से इनकार किया था।
बाद में सत्ता हस्तांतरण रोकने की कथित साज़िश से जुड़े मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई।
27 अक्टूबर की उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, जायर बोल्सोनारो तख्तापलट से संबंधित अपराधों में 27 वर्ष की सज़ा काट रहे हैं।
फ्लावियो बोल्सोनारो और उनके परिवार ने अपने पिता के खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक उत्पीड़न बताया है।
इस पारिवारिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण मौजूदा चुनावी विवाद को ब्राज़ील की लोकतांत्रिक संस्थाओं और विपक्ष की रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
पासपोर्ट जमा करने का मामला भी सामने आया
चुनाव के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो ने बताया कि संघीय पुलिस ने उनसे अपने पासपोर्ट जमा करने को कहा है।
उन्होंने कहा कि वह इस निर्देश का पालन करेंगे और देश छोड़ने की उनकी कोई योजना नहीं है।
हालांकि पासपोर्ट संबंधी कार्रवाई के विस्तृत कानूनी आधार की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
बोल्सोनारो ने चुनाव के बाद विपक्ष को संगठित करने की अपनी मंशा भी ज़ाहिर की है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।