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कैंसर का निदान अब हो सकेगा एआई की मदद से

None • 2023-09-15 15:07:18
कैंसर का निदान अब हो सकेगा एआई की मदद से

Report By: Safdar Ali

90 फीसदी सटीक परिणाम की उम्मीद

गॉलब्लैडर कैंसर एक अत्यधिक घातक बीमारी है जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है

नई दिल्ली। कैंसर (Cancer) वैश्विक स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम रहा है, हर साल तमाम प्रकार के कैंसर (Cancer) के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कैंसर (Cancer) का खतरा किसी को भी हो सकता है, इससे बचाव के लिए लगातार प्रयास करते रहने की आवश्यकता होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तकनीक के विकास और मेडिकल की क्षेत्र में आधुनिकता के साथ पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अब कैंसर (Cancer) का इलाज आसान तो हुआ है पर अब भी यह आम लोगों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। कैंसर के कारण मृत्यु के बढ़ते मामलों के लिए इसका समय पर निदान न हो पाना एक कारण माना जाता रहा है।

इस बीच एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने कैंसर के निदान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को प्रभावी पाया है। द लैंसेट रीजनल हेल्थ (The Lancet Regional Health) में प्रकाशित एक अध्ययन की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया कि एआई के माध्यम से पित्ताशय के कैंसर का पता लगाना आसान हो सकता है, एक अनुभवी रेडियोलॉजिस्ट (Radiologist) की तरह ही इसके माध्यम से समय पर कैंसर (Cencer) का पता लगाया जा सकता है।

मेडिकल के क्षेत्र में तकनीक के इस संयोजन को स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी प्रभावी मान रहे हैं।

चंडीगढ़ में पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), नई दिल्ली की टीम डीप लर्निंग मॉडल को बनाने की दिशा में काम कर रही है जो पेट के अल्ट्रासाउंड के माध्यम से पित्ताशय के कैंसर (Gall Bladder cancer) का पता लगा सके।

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यहां जानना जरूरी है कि डीप लर्निंग, एआई में एक ऐसी विधि है जो कंप्यूटर को उसी तरह से डेटा प्रोसेस करना सिखाती है जैसा कि इंसानों का मस्तिष्क करता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इसकी मदद से दुनिया के कई देशों में तेजी से बढ़ रहे इस कैंसर का समय रहते निदान किया जा सकेगा।

वैज्ञानिकों की टीम ने 233 रोगियों के डेटासेट पर डीप लर्निंग के इस मेथड को ट्रेन किया और 273 रोगियों पर इसका परीक्षण किया गया। परीक्षण के अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट की दो रेडियोलॉजिस्टों ने समीक्षा भी की। अध्ययन के अनुसार परीक्षण सेट में डीएल मॉडल की प्रभाविकता 92.3 प्रतिशत पाई गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि रेडियोलॉजिस्ट की तरह एआई के माध्यम से भी कैंसर का आसानी से निदान करने में मदद मिल सकती है।

कैंसर के समय पर निदान को बढ़ावा देने में इसका लाभ हो सकता है, वैज्ञानिकों की टीम ने इस तकनीक को लेकर आशा जताई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, गॉलब्लैडर कैंसर (Gallbladder cancer a) एक अत्यधिक घातक बीमारी है, जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ज्यादातर मामलों में रोग का प्रारंभिक निदान चुनौतीपूर्ण है क्योंकि पित्ताशय के घावों का आसानी से पता लगाना कठिन हो सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि मेडिकल के क्षेत्र में इस नई तकनीक के माध्यम से कैंसर का पता लगाना आसान हो सकेगा साथ ही यह वैश्विक स्तर पर पड़ रहे दबाव को कम करने में भी मददगार हो सकेगी।

#ShahTimes

Report By: Safdar Ali

90 फीसदी सटीक परिणाम की उम्मीद

गॉलब्लैडर कैंसर एक अत्यधिक घातक बीमारी है जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है

नई दिल्ली। कैंसर (Cancer) वैश्विक स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम रहा है, हर साल तमाम प्रकार के कैंसर (Cancer) के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कैंसर (Cancer) का खतरा किसी को भी हो सकता है, इससे बचाव के लिए लगातार प्रयास करते रहने की आवश्यकता होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तकनीक के विकास और मेडिकल की क्षेत्र में आधुनिकता के साथ पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अब कैंसर (Cancer) का इलाज आसान तो हुआ है पर अब भी यह आम लोगों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। कैंसर के कारण मृत्यु के बढ़ते मामलों के लिए इसका समय पर निदान न हो पाना एक कारण माना जाता रहा है।

इस बीच एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने कैंसर के निदान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को प्रभावी पाया है। द लैंसेट रीजनल हेल्थ (The Lancet Regional Health) में प्रकाशित एक अध्ययन की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया कि एआई के माध्यम से पित्ताशय के कैंसर का पता लगाना आसान हो सकता है, एक अनुभवी रेडियोलॉजिस्ट (Radiologist) की तरह ही इसके माध्यम से समय पर कैंसर (Cencer) का पता लगाया जा सकता है।

मेडिकल के क्षेत्र में तकनीक के इस संयोजन को स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी प्रभावी मान रहे हैं।

चंडीगढ़ में पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), नई दिल्ली की टीम डीप लर्निंग मॉडल को बनाने की दिशा में काम कर रही है जो पेट के अल्ट्रासाउंड के माध्यम से पित्ताशय के कैंसर (Gall Bladder cancer) का पता लगा सके।

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यहां जानना जरूरी है कि डीप लर्निंग, एआई में एक ऐसी विधि है जो कंप्यूटर को उसी तरह से डेटा प्रोसेस करना सिखाती है जैसा कि इंसानों का मस्तिष्क करता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इसकी मदद से दुनिया के कई देशों में तेजी से बढ़ रहे इस कैंसर का समय रहते निदान किया जा सकेगा।

वैज्ञानिकों की टीम ने 233 रोगियों के डेटासेट पर डीप लर्निंग के इस मेथड को ट्रेन किया और 273 रोगियों पर इसका परीक्षण किया गया। परीक्षण के अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट की दो रेडियोलॉजिस्टों ने समीक्षा भी की। अध्ययन के अनुसार परीक्षण सेट में डीएल मॉडल की प्रभाविकता 92.3 प्रतिशत पाई गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि रेडियोलॉजिस्ट की तरह एआई के माध्यम से भी कैंसर का आसानी से निदान करने में मदद मिल सकती है।

कैंसर के समय पर निदान को बढ़ावा देने में इसका लाभ हो सकता है, वैज्ञानिकों की टीम ने इस तकनीक को लेकर आशा जताई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, गॉलब्लैडर कैंसर (Gallbladder cancer a) एक अत्यधिक घातक बीमारी है, जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ज्यादातर मामलों में रोग का प्रारंभिक निदान चुनौतीपूर्ण है क्योंकि पित्ताशय के घावों का आसानी से पता लगाना कठिन हो सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि मेडिकल के क्षेत्र में इस नई तकनीक के माध्यम से कैंसर का पता लगाना आसान हो सकेगा साथ ही यह वैश्विक स्तर पर पड़ रहे दबाव को कम करने में भी मददगार हो सकेगी।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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