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उम्र बढ़ने पर बहुत कॉमन है मोतियाबिंद

None 2023-09-14 15:21:18
उम्र बढ़ने पर बहुत कॉमन है मोतियाबिंद

Report By: Safdar Ali

लापरवाही से बढ़ जाता है दृष्टि में धुंधलापन होने का जोखिम

नई दिल्ली। क्या आपके भी माता-पिता को समय के साथ कम दिखना शुरू हो गया है ? अगर हां तो इसे सिर्फ उम्र से संबंधित समस्या मानकर न चलें, कुछ मामलों में ये आंखों की गंभीर बीमारी (Serious eye disease) का संकेत भी हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 50 की आयु के बाद मोतियाबिंद (cataracts) की समस्या होना काफी सामान्य माना जाता है। मोतियाबिंद (cataracts) आंखों में होने वाली बीमारी है जिसमें लेंस वाले हिस्से में धुंधलापन होने की दिक्कत बढ़ जाती है। इस स्थिति में आपको धुंधला दिखाई देने या रोशनी के चारों ओर चकाचौंध की दिक्कत होती रह सकती है। समय पर इसका इलाज किया जाना आवश्यक माना जाता है।

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि मोतियाबिंद की समस्या का अगर समय रहते इलाज न हो पाए तो इससे आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा रहता है। मोतियाबिंद के निदान के बाद सर्जरी की आवश्यकता होती है जिसमें कृत्रिम लेंस लगाई जाती है।

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क्यों होती है मोतियाबिंद की समस्या ?

अधिकांश मामलों में मोतियाबिंद (cataracts) विकसित होने का कारण उम्र बढ़ना, आंखों में चोट लगना या फिर आंख के लेंस को बनाने वाले ऊतकों में परिवर्तन हो सकता है। लेंस में मौजूद प्रोटीन और फाइबर का ब्रेक डाउन होने लगता है जिससे आपको दृष्टि में धुंधलापन होने का जोखिम बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ आनुवांशिक विकार भी मोतियाबिंद के खतरे को बढ़ा सकते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि स्टेरॉयड दवाओं के लंबे समय तक उपयोग से भी मोतियाबिंद विकसित हो सकता है।

मोतियाबिंद (cataracts) के लक्षणों का समय रहते पता चलना और इसका इलाज बहुत आवश्यक माना जाता है। इसमें आपको धुंधला दिखाई देने या आंखों के सामने फिल्म बनी रहने जैसी समस्या हो सकती है। इसके अलावा आंखों में होने वाले अन्य कुछ प्रकार के बदलावों के प्रति भी सावधानी बरतते रहनी सलाह दी जाती है।

तेज धूप, हेडलाइट्स या लैंप के प्रति संवेदनशीलता।
चकाचौंध, रोशनी के चारों ओर धारियां दिखना।
रात में देखने में कठिनाई होना।
पढ़ने के लिए तेज रोशनी की आवश्यकता है।

मोतियाबिंद (cataracts) से बचाव के लिए कोई खास तरीका नहीं है, हालांकि कुछ सामान्य से उपायों का पालन करके आंखों की बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि नियमित रूप से आंखों की जांच कराते रहें। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि धूम्रपान भी आपके जोखिमों को बढ़ा सकती है, आंखों को स्वस्थ रखने और मोतियाबिंद से बचाव के लिए धूम्रपान न करने की सलाह दी जाती है।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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