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उन्नाव रेप केस: कुलदीप सेंगर की सज़ा सस्पेंड पर CBI सुप्रीम कोर्ट जाएगी

None 2025-12-25 08:30:56
उन्नाव रेप केस: कुलदीप सेंगर की सज़ा सस्पेंड पर CBI सुप्रीम कोर्ट जाएगी

कुलदीप सेंगर की उम्रकैद पर रोक, CBI दायर करेगी स्पेशल लीव पिटीशन

 उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद सज़ा सस्पेंड किए जाने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को CBI सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। एजेंसी जल्द स्पेशल लीव पिटीशन दाखिल करने की तैयारी में है।

📍New Delhi ✍️Asif Khan

उन्नाव रेप केस से जुड़े एक अहम घटनाक्रम में दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सज़ा को उसकी अपील लंबित रहने तक सस्पेंड कर दिया है। कोर्ट ने इस दौरान सेंगर को ज़मानत भी प्रदान की, हालांकि आदेश के अनुसार उसकी तत्काल रिहाई नहीं होगी। वह पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े एक अन्य मामले में अब भी सज़ा काट रहा है।

CBI की सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन ने दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश की स्टडी पूरी कर ली है। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन दाखिल करने का निर्णय लिया गया है। एजेंसी का कहना है कि वह सज़ा पर लगी रोक हटाने और मूल सज़ा बहाल करने की मांग करेगी।

हाई कोर्ट में CBI का पक्ष

दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान CBI ने सेंगर की अपील और ज़मानत याचिका का कड़ा विरोध किया था। एजेंसी ने समय पर जवाब और लिखित दलीलें दाखिल की थीं। इन दलीलों में ट्रायल कोर्ट के फैसले, गवाहों के बयान और केस से जुड़े रिकॉर्ड का हवाला दिया गया।

पीड़िता परिवार की आपत्तियां

पीड़िता के परिवार ने भी हाई कोर्ट में ज़मानत का विरोध किया। परिवार ने सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और कथित धमकियों का उल्लेख किया। परिवार का कहना था कि आरोपी के बाहर आने से उनकी जान को खतरा हो सकता है।

ज़मानत की शर्तें

दिल्ली हाई कोर्ट ने ज़मानत देते समय कड़ी शर्तें तय की हैं। आदेश के मुताबिक, सेंगर पीड़िता के घर के पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएगा। उसे अपील लंबित रहने तक दिल्ली में ही रहना होगा। इसके अलावा, उसे पीड़िता या उसकी मां को किसी भी तरह की धमकी न देने का निर्देश दिया गया है।

पासपोर्ट और पुलिस रिपोर्टिंग

कोर्ट ने यह भी कहा है कि सेंगर अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करेगा। साथ ही उसे हर सोमवार सुबह दस बजे स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में ज़मानत स्वतः रद्द मानी जाएगी।

अन्य मामले में सज़ा जारी

हालांकि रेप केस में सज़ा सस्पेंड की गई है, लेकिन सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेगा। वह पीड़िता के पिता की साज़िश और हिरासत में मौत से जुड़े मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और उस केस में दस साल की सज़ा काट रहा है।

पीड़िता की प्रतिक्रिया

हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन्नाव की पीड़िता ने अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक की। उसने कहा कि सज़ा सस्पेंड होने का फैसला उसके परिवार के लिए काल जैसा है। पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही और कहा कि वह इस फैसले से बेहद आहत है।

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन

हाल ही में पीड़िता और उसकी मां दिल्ली में एक प्रोटेस्ट के दौरान सामने आई थीं। वहां उन्होंने सेंगर को मिली ज़मानत को लेकर चिंता जताई। सुरक्षा कारणों से उन्हें वहां से हटाया गया था।

पीड़िता का बयान

पीड़िता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि फैसले के बाद उसके मन में खुदकुशी का विचार आया था। उसने बताया कि वह अपने बच्चों और परिवार के बारे में सोचकर रुक गई। उसने कहा कि अगर आरोपी को रिहा किया जाता है तो उसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका है।

राष्ट्रपति से मिलने की इच्छा

पीड़िता ने यह भी कहा कि वह राष्ट्रपति से मिलकर अपनी बात रखना चाहती है। उसका कहना है कि इस फैसले से उसे और उसके परिवार को जो तकलीफ हो रही है, उसे वह सीधे सामने रखना चाहती है।

मां की प्रतिक्रिया

पीड़िता की मां ने कहा कि परिवार को सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है। उन्होंने बताया कि उनके वकील दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएंगे।

बहन का बयान

पीड़िता की बहन ने कहा कि परिवार के सदस्यों को अब भी धमकियां मिल रही हैं। उसने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई और प्रशासन से निगरानी बढ़ाने की मांग की।

केस का पृष्ठभूमि

उन्नाव रेप केस वर्ष 2017 का है। मामले में आरोप था कि तत्कालीन विधायक ने युवती के साथ बलात्कार किया। लंबे समय तक चले ट्रायल के बाद दिसंबर 2019 में निचली अदालत ने सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट के पहले निर्देश

इस केस से जुड़े पांच मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर किया था। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और मामलों की सुनवाई तय समय सीमा में पूरी की जाए।

CBI की अगली कार्रवाई

अब CBI सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाने वाली SLP में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देगी। एजेंसी का कहना है कि वह कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सज़ा बहाल कराने की कोशिश करेगी।

मौजूदा स्थिति

फिलहाल सेंगर जेल में है और दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश उसकी अपील लंबित रहने तक लागू रहेगा। सुप्रीम कोर्ट में CBI की याचिका के बाद आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगी।

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कुलदीप सेंगर की उम्रकैद पर रोक, CBI दायर करेगी स्पेशल लीव पिटीशन

 उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद सज़ा सस्पेंड किए जाने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को CBI सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। एजेंसी जल्द स्पेशल लीव पिटीशन दाखिल करने की तैयारी में है।

📍New Delhi ✍️Asif Khan

उन्नाव रेप केस से जुड़े एक अहम घटनाक्रम में दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सज़ा को उसकी अपील लंबित रहने तक सस्पेंड कर दिया है। कोर्ट ने इस दौरान सेंगर को ज़मानत भी प्रदान की, हालांकि आदेश के अनुसार उसकी तत्काल रिहाई नहीं होगी। वह पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े एक अन्य मामले में अब भी सज़ा काट रहा है।

CBI की सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन ने दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश की स्टडी पूरी कर ली है। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन दाखिल करने का निर्णय लिया गया है। एजेंसी का कहना है कि वह सज़ा पर लगी रोक हटाने और मूल सज़ा बहाल करने की मांग करेगी।

हाई कोर्ट में CBI का पक्ष

दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान CBI ने सेंगर की अपील और ज़मानत याचिका का कड़ा विरोध किया था। एजेंसी ने समय पर जवाब और लिखित दलीलें दाखिल की थीं। इन दलीलों में ट्रायल कोर्ट के फैसले, गवाहों के बयान और केस से जुड़े रिकॉर्ड का हवाला दिया गया।

पीड़िता परिवार की आपत्तियां

पीड़िता के परिवार ने भी हाई कोर्ट में ज़मानत का विरोध किया। परिवार ने सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और कथित धमकियों का उल्लेख किया। परिवार का कहना था कि आरोपी के बाहर आने से उनकी जान को खतरा हो सकता है।

ज़मानत की शर्तें

दिल्ली हाई कोर्ट ने ज़मानत देते समय कड़ी शर्तें तय की हैं। आदेश के मुताबिक, सेंगर पीड़िता के घर के पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएगा। उसे अपील लंबित रहने तक दिल्ली में ही रहना होगा। इसके अलावा, उसे पीड़िता या उसकी मां को किसी भी तरह की धमकी न देने का निर्देश दिया गया है।

पासपोर्ट और पुलिस रिपोर्टिंग

कोर्ट ने यह भी कहा है कि सेंगर अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करेगा। साथ ही उसे हर सोमवार सुबह दस बजे स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में ज़मानत स्वतः रद्द मानी जाएगी।

अन्य मामले में सज़ा जारी

हालांकि रेप केस में सज़ा सस्पेंड की गई है, लेकिन सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेगा। वह पीड़िता के पिता की साज़िश और हिरासत में मौत से जुड़े मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और उस केस में दस साल की सज़ा काट रहा है।

पीड़िता की प्रतिक्रिया

हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन्नाव की पीड़िता ने अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक की। उसने कहा कि सज़ा सस्पेंड होने का फैसला उसके परिवार के लिए काल जैसा है। पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही और कहा कि वह इस फैसले से बेहद आहत है।

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन

हाल ही में पीड़िता और उसकी मां दिल्ली में एक प्रोटेस्ट के दौरान सामने आई थीं। वहां उन्होंने सेंगर को मिली ज़मानत को लेकर चिंता जताई। सुरक्षा कारणों से उन्हें वहां से हटाया गया था।

पीड़िता का बयान

पीड़िता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि फैसले के बाद उसके मन में खुदकुशी का विचार आया था। उसने बताया कि वह अपने बच्चों और परिवार के बारे में सोचकर रुक गई। उसने कहा कि अगर आरोपी को रिहा किया जाता है तो उसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका है।

राष्ट्रपति से मिलने की इच्छा

पीड़िता ने यह भी कहा कि वह राष्ट्रपति से मिलकर अपनी बात रखना चाहती है। उसका कहना है कि इस फैसले से उसे और उसके परिवार को जो तकलीफ हो रही है, उसे वह सीधे सामने रखना चाहती है।

मां की प्रतिक्रिया

पीड़िता की मां ने कहा कि परिवार को सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है। उन्होंने बताया कि उनके वकील दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएंगे।

बहन का बयान

पीड़िता की बहन ने कहा कि परिवार के सदस्यों को अब भी धमकियां मिल रही हैं। उसने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई और प्रशासन से निगरानी बढ़ाने की मांग की।

केस का पृष्ठभूमि

उन्नाव रेप केस वर्ष 2017 का है। मामले में आरोप था कि तत्कालीन विधायक ने युवती के साथ बलात्कार किया। लंबे समय तक चले ट्रायल के बाद दिसंबर 2019 में निचली अदालत ने सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट के पहले निर्देश

इस केस से जुड़े पांच मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर किया था। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और मामलों की सुनवाई तय समय सीमा में पूरी की जाए।

CBI की अगली कार्रवाई

अब CBI सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाने वाली SLP में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देगी। एजेंसी का कहना है कि वह कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सज़ा बहाल कराने की कोशिश करेगी।

मौजूदा स्थिति

फिलहाल सेंगर जेल में है और दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश उसकी अपील लंबित रहने तक लागू रहेगा। सुप्रीम कोर्ट में CBI की याचिका के बाद आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगी।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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