अखिलेश यादव ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम पर सवाल उठाते हुए भाजपा पर तीखा हमला किया। भाजपा ने उनकी सोच पर निशाना साधा और देशविरोधी करार दिया। जानें पूरी खबर।
लखनऊ (शाह टाइम्स) समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निशाने पर आ गए हैं। इस बार विवाद की वजह बना है पाकिस्तान के साथ जारी सीजफायर को लेकर अखिलेश यादव का बयान। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जश्न तो जीत का होता है, न कि सीजफायर या घेराबंदी का। उनके इस बयान को लेकर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और उनकी मानसिकता पर सवाल खड़े किए हैं।
अखिलेश यादव ने एक दिन पहले अपने बयान में कहा था, “हमारी सीमाएं इतनी असुरक्षित क्यों हैं? ऐसा क्यों हो रहा है कि कोई भी हमारी सीमा के अंदर प्रवेश कर जाता है? सरकार को जनता को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि भविष्य में ऐसा कोई हमला नहीं होगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा “झूठ का पूरा भंडार” है।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “भाजपा को लोग अब विभाजन, भूल और लूट की पार्टी के रूप में पहचानेंगे। ये वही लोग हैं जो तिरंगे के लिए हजारों किलोमीटर चलने का दावा करते थे, लेकिन अब कुछ किलोमीटर भी चलने को तैयार नहीं हैं।” अखिलेश ने कहा कि सरकार को अपनी सीमाओं को इतना मजबूत बनाना चाहिए कि कोई अगली बार ऐसी गलती दोहराने की हिम्मत न करे।
पहलगाम हमले के बाद से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और इसी संदर्भ में अखिलेश का बयान आया है। उन्होंने पूछा, “सरकार यह क्यों कह रही है कि अगली बार मुंहतोड़ जवाब देंगे? क्या इसका मतलब है कि सरकार खुद ही फिर से हमले की संभावना मान रही है?” उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब जागरूक है और आगामी चुनावों में भाजपा को उसकी गलतियों का सबक सिखाएगी।
भाजपा का पलटवार
अखिलेश यादव के बयान पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि यह सोच राष्ट्रहित के खिलाफ है और देश की सुरक्षा एजेंसियों के मनोबल को तोड़ने का प्रयास है। भाजपा प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि अखिलेश का यह रवैया राष्ट्रविरोधी ताकतों को ताकत देने वाला है। उन्होंने सवाल किया कि जब देश एकजुट होकर आतंक के खिलाफ खड़ा होता है, तब विपक्ष ऐसे बयानों से किसका समर्थन कर रहा है?
नई बहस को दिया जन्म
अखिलेश यादव के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक ओर विपक्ष सरकार की नीति और सुरक्षा उपायों पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रविरोधी मानसिकता का नाम दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है, खासकर जब देश चुनावी माहौल की ओर बढ़ रहा है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।