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Chandrayaan-3 Mission : रोवर स्लीप मोड में

None • 2023-09-03 10:32:47
Chandrayaan-3 Mission : रोवर स्लीप मोड में

इसरो ने चंद्रयान-3 मिशन पर लैंडर द्वारा तैनात अपने रोवर को स्लीप मोड पर डाल दिया ताकि सूर्योदय पर सूरज की रोशनी मिलने के बाद सक्रिय किया जा सके

चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शनिवार देर रात चंद्रयान-3 मिशन (Chandrayaan-3 Mission) पर लैंडर द्वारा तैनात अपने रोवर (Rover) को स्लीप मोड पर डाल दिया ताकि 22 सितंबर को सूर्योदय पर सूरज की रोशनी मिलने के बाद इसे फिर से सक्रिय किया जा सके।

इसरो ने एक अपडेट में कहा, ''चंद्रयान-3 मिशन: (Chandrayaan-3 Mission) रोवर (Rover) ने अपना कार्य पूरा कर लिया।''
''इसे अब सुरक्षित रूप से पार्क किया गया है और स्लीप मोड में सेट किया गया है। एपीएक्सएस और एलआईबीएस पेलोड बंद कर दिए गए हैं। इन पेलोड से डेटा लैंडर के माध्यम से पृथ्वी पर प्रेषित किया जाता है।''

https://twitter.com/isro/status/1698010732128764164?s=20

अपडेट में कहा गया ''वर्तमान में, बैटरी पूरी तरह से चार्ज है।'' सौर पैनल (Solar Panels) 22 सितंबर, 2023 को अपेक्षित अगले सूर्योदय पर प्रकाश प्राप्त करने के लिए उन्मुख है।
इसरो ने कहा, ''रिसीवर को चालू रखा गया है। असाइनमेंट के दूसरे सेट के लिए सफल जागृति की उम्मीद है अन्यथा, यह हमेशा भारत के चंद्र राजदूत के रूप में वहीं रहेगा।''

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इससे पहले, इसरो के अध्यक्ष सोमनाथ (Somnath) ने आदित्य-एल1 (Aditya-L1) के सफल प्रक्षेपण के बाद कहा था, ''लैंडर और रोवर काम कर रहे हैं। हमारी टीम वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करके बहुत काम कर रही है। अच्छी खबर यह है कि रोवर लैंडर से 100 मीटर दूर चला गया है।
सोमनाथ ने कहा कि इसरो आने वाले दिनों में रोवर को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। उन्होंने कहा, ''हम आने वाले दिनों में रोवर को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहे हैं क्योंकि इसे रात का सामना करना पड़ेगा।''

हालाँकि, कुछ घंटों बाद रोवर शून्य से नीचे की जलवायु पर काबू पाने के लिए सो गया जब तक कि उन्हें अगली बार फिर से सूरज की रोशनी नहीं मिल जाती। सोमनाथ ने पहले कहा था ''लैंडर और रोवर सूर्य की रोशनी मिलने तक 14 दिनों तक चंद्रमा पर रहेंगे। जब सूरज की रोशनी नहीं होगी, तो एक छोटा सौर पैनल, जो रोवर पर है, अगले 14 दिनों तक बैटरी को चार्ज करने के लिए बिजली पैदा करेगा जब तक कि उन्हें सूरज की रोशनी न मिल जाए।''
एक बार जब सूर्य चंद्रमा पर डूब जाता है, तो तापमान शून्य से 200 डिग्री सेल्सियस नीचे तक गिर सकता है।

सोमनाथ ने कहा था ''वहां तापमान माइनस 200 डिग्री तक नीचे चला जाता है। ऐसे माहौल में, इसकी कोई गारंटी नहीं है कि बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स बचे रहेंगे, लेकिन हमने कुछ परीक्षण किए और मुझे लग रहा है कि वे ऐसी कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रहेंगे''।

#ShahTimes

इसरो ने चंद्रयान-3 मिशन पर लैंडर द्वारा तैनात अपने रोवर को स्लीप मोड पर डाल दिया ताकि सूर्योदय पर सूरज की रोशनी मिलने के बाद सक्रिय किया जा सके

चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शनिवार देर रात चंद्रयान-3 मिशन (Chandrayaan-3 Mission) पर लैंडर द्वारा तैनात अपने रोवर (Rover) को स्लीप मोड पर डाल दिया ताकि 22 सितंबर को सूर्योदय पर सूरज की रोशनी मिलने के बाद इसे फिर से सक्रिय किया जा सके।

इसरो ने एक अपडेट में कहा, ''चंद्रयान-3 मिशन: (Chandrayaan-3 Mission) रोवर (Rover) ने अपना कार्य पूरा कर लिया।''
''इसे अब सुरक्षित रूप से पार्क किया गया है और स्लीप मोड में सेट किया गया है। एपीएक्सएस और एलआईबीएस पेलोड बंद कर दिए गए हैं। इन पेलोड से डेटा लैंडर के माध्यम से पृथ्वी पर प्रेषित किया जाता है।''

https://twitter.com/isro/status/1698010732128764164?s=20

अपडेट में कहा गया ''वर्तमान में, बैटरी पूरी तरह से चार्ज है।'' सौर पैनल (Solar Panels) 22 सितंबर, 2023 को अपेक्षित अगले सूर्योदय पर प्रकाश प्राप्त करने के लिए उन्मुख है।
इसरो ने कहा, ''रिसीवर को चालू रखा गया है। असाइनमेंट के दूसरे सेट के लिए सफल जागृति की उम्मीद है अन्यथा, यह हमेशा भारत के चंद्र राजदूत के रूप में वहीं रहेगा।''

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इससे पहले, इसरो के अध्यक्ष सोमनाथ (Somnath) ने आदित्य-एल1 (Aditya-L1) के सफल प्रक्षेपण के बाद कहा था, ''लैंडर और रोवर काम कर रहे हैं। हमारी टीम वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करके बहुत काम कर रही है। अच्छी खबर यह है कि रोवर लैंडर से 100 मीटर दूर चला गया है।
सोमनाथ ने कहा कि इसरो आने वाले दिनों में रोवर को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। उन्होंने कहा, ''हम आने वाले दिनों में रोवर को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहे हैं क्योंकि इसे रात का सामना करना पड़ेगा।''

हालाँकि, कुछ घंटों बाद रोवर शून्य से नीचे की जलवायु पर काबू पाने के लिए सो गया जब तक कि उन्हें अगली बार फिर से सूरज की रोशनी नहीं मिल जाती। सोमनाथ ने पहले कहा था ''लैंडर और रोवर सूर्य की रोशनी मिलने तक 14 दिनों तक चंद्रमा पर रहेंगे। जब सूरज की रोशनी नहीं होगी, तो एक छोटा सौर पैनल, जो रोवर पर है, अगले 14 दिनों तक बैटरी को चार्ज करने के लिए बिजली पैदा करेगा जब तक कि उन्हें सूरज की रोशनी न मिल जाए।''
एक बार जब सूर्य चंद्रमा पर डूब जाता है, तो तापमान शून्य से 200 डिग्री सेल्सियस नीचे तक गिर सकता है।

सोमनाथ ने कहा था ''वहां तापमान माइनस 200 डिग्री तक नीचे चला जाता है। ऐसे माहौल में, इसकी कोई गारंटी नहीं है कि बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स बचे रहेंगे, लेकिन हमने कुछ परीक्षण किए और मुझे लग रहा है कि वे ऐसी कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रहेंगे''।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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